Hardoi News: निजी वाहनों पर लाल-नीली बत्ती लगाकर रौब झाड रहे कुछ लोग, VIP कल्चर से नहीं छूट रहा मोह
हरदोई में कई ऐसी गाडियां देखने को मिल जायेंगी, जहां वाहन मालिक अपनी ठसक दिखाने के लिए लाल-नीली बत्ती, हूटर आदि का उपयोग करता है, साथ ही कई निजी वाहनों पर आपको पुलिस, नायब तहसीलदार, एसडीएम ...
By INA News Hardoi.
VIP कल्चर को दूर करने के लिए आज से करीब 8 साल पहले अफसरों-नेताओं की गाड़ियों से लाल और नीली बत्तियां को हटाने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। केन्द्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, केवल आपातकालीन वाहनों जैसे एंबुलेंस, फायर सर्विस तथा पुलिस व सेना के अधिकारियों को नीली बत्ती लगाने की छूट दी गई थी। नियम के अनुसार, अधिकारी इसका इस्तेमाल सिर्फ VVIP एस्कॉर्ट में लगी गाड़ी में कर सकते हैं। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात को लेकर सभी से अपील की थी। लेकिन पीएम मोदी की अपील धरातल पर नजर नहीं आ रही है। आज भी अधिकारी धड़ल्ले से लाल-नीली बत्ती का उपयोग कर रहे हैं। यही नहीं हैरान करने वाली बात तो ये है कि सरकारी गाड़ियों के साथ- साथ अफसर अपनी निजी गाड़ियों में भी निसंकोच लाल और नीली बत्ती लगाकर घूम रहें हैं।
हरदोई में कई ऐसी गाडियां देखने को मिल जायेंगी, जहां वाहन मालिक अपनी ठसक दिखाने के लिए लाल-नीली बत्ती, हूटर आदि का उपयोग करता है, साथ ही कई निजी वाहनों पर आपको पुलिस, नायब तहसीलदार, एसडीएम आदि लिखा भी मिल जाएगा। ऐसे में ट्रैफिक रूल्स तोड़ने की दशा में उसका चालान काटने से भी कतराते हैं। बता दें कि 19 अप्रैल 2017 को केंद्र सरकार ने 1998 की मोटर वाहन नियमावली के नियम 108 (1-तृतीय) और 108 (2) में संशोधन किया था। वहीं 1 मई 2017 को इसको लागू कर दिया गया था।
भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने कहा था कि लाल बत्ती पूरी तरह बैन रहेगी, मगर नीली बत्ती इमरजेन्सी वाहनों पर लगेगी। उन्होंने जिन इमरजेन्सी वाहनों को गिनाया था, उसमें ऐम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपदा राहत और पुलिस की गाड़ियां शामिल हैं। लेकिन अधिकारियों ने अपनी आधिकारिक गाड़ी को ही 'पुलिस का आपातकालीन वाहन' मान लिया है। इसके साथ ही निजी गाड़ियों में भी लाल और नीली बत्ती लगाकर घूम रहें हैं। जबकि सरकार ने जिन पुलिस की गाड़ियों का जिक्र किया, उनमें थाने में मौजूद पीआरवी (पुलिस रेस्पॉन्स वीकल्स) और जिप्सी, टाटा सूमो आदि शामिल हैं।
बता दें कि 1 मई 2017 से, भारत सरकार ने लाल बत्ती का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए सीमित कर दिया है। सामान्य जनता या अन्य सरकारी अधिकारियों को लाल या नीली बत्ती का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। इस नियम का उल्लंघन करने पर जुर्माना और कानूनी कार्यवाही हो सकती है। लाल बत्ती का उपयोग अब केवल उच्च सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों की गाड़ियों पर ही किया जा सकता है। जिसमें मुख्य तौर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा अध्यक्ष जैसे अधिकारियों की गाड़ियों पर लाल बत्ती लग सकती है।
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