हरदोई: मकर संक्रान्ति पर विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह रानू समरसता भोज में शामिल हुए, दाधिकारियों को सम्मानित भी किया

इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और पतंगबाजी और तिल-गुड़ के साथ इस त्यौहार का जश्न मनाते है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान अक्षय फलदायी होता है। शनि देव के लिए प्रकाश का दान ..

Jan 14, 2025 - 21:57
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हरदोई: मकर संक्रान्ति पर विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह रानू समरसता भोज में शामिल हुए, दाधिकारियों को सम्मानित भी किया

By INA News Hardoi.

मकर संक्रान्ति के पर्व पर सवायजपुर विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह रानू ने बाबा लक्ष्मण दास आश्रम अमिरता में आयोजित हुए समरसता भोज एवं नवनिर्वाचित मण्डल अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह के अवसर सम्मिलित होकर कार्यकर्ता पदाधिकारियों से भेंट कर उन्हें मकर संक्रांति पर्व की शुभकामनाएं दीं और उनसे संवाद करते हुए संगठन के कार्यों की चर्चा की, इस बीच उन्होंने पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया। विधायक माधवेन्द्र प्रताप सिंह रानू ने मकर संक्रांति पर्व के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो नए आरंभ और समृद्धि का संदेश देता है। मकर संक्रांति इस साल भी बड़े धूमधाम से मानाई जा रही है।इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और पतंगबाजी और तिल-गुड़ के साथ इस त्यौहार का जश्न मनाते है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान अक्षय फलदायी होता है। शनि देव के लिए प्रकाश का दान करना भी बहुत शुभ होता है। पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में ये नई फसल काटने का समय होता है। इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है। इसके अलावा मकर संक्रांति पर कहीं-कहीं पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। आगे कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं।चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। एक अन्य कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा। जिला उपाध्यक्ष प्रीतेश दीक्षित, आजाद सिंह भदौरिया, गन्ना समिति रुपापुर के अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्रा सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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