Hardoi : विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: डीएम- एसपी की अगुआई में अंबेडकर पार्क से गांधी भवन तक कैंडल मार्च निकाला
कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें स्थानीय निवासी, प्रशासनिक अधिकारी और विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले परिवारों के सदस्य भी थे। मार्च की शुरुआत
हरदोई : जिले में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी को याद किया गया, जिसमें लाखों लोगों ने अपने प्रियजनों और घरों को खो दिया। जिला प्रशासन ने इस दिन को गंभीरता से मनाने के लिए अंबेडकर पार्क से गांधी भवन तक एक कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस मार्च का नेतृत्व जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने किया। यह आयोजन न केवल विभाजन की पीड़ा को याद करने का अवसर था, बल्कि यह सामाजिक एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने का भी संदेश देता था।
कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिनमें स्थानीय निवासी, प्रशासनिक अधिकारी और विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले परिवारों के सदस्य भी थे। मार्च की शुरुआत अंबेडकर पार्क से हुई, जहां लोग हाथों में जलती मोमबत्तियां लिए चुपचाप चल रहे थे। यह दृश्य भावुक करने वाला था, क्योंकि यह उस दर्द और बलिदान की याद दिलाता था, जो विभाजन के समय लोगों ने सहा।
मार्च गांधी भवन पर समाप्त हुआ, जहां एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इस प्रदर्शनी में विभाजन की त्रासदी से जुड़े चित्र, दस्तावेज और कहानियां प्रदर्शित की गई थीं। इन दृश्यों को देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभाजन के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के सदस्यों से बातचीत की। इन परिवारों ने उस समय की अपनी आपबीती साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपने घर, जमीन और अपनों को छोड़कर एक नई शुरुआत करनी पड़ी। इन लोगों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया, जो उनके बलिदान और साहस के प्रति प्रशासन की कृतज्ञता का प्रतीक था।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा, अपर जिलाधिकारी वीरा प्रियंका सिंह, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रफुल्ल त्रिपाठी, नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार त्रिवेदी सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की शुरुआत 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान हुई हिंसा, विस्थापन और पीड़ा को याद करना है। इस विभाजन के कारण लगभग 10 से 20 मिलियन लोग विस्थापित हुए और 2 लाख से 20 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। यह दिन न केवल उस त्रासदी को याद करने का अवसर है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने का भी संदेश देता है। हरदोई में इस दिन को मनाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तौर पर की थी।
कैंडल मार्च के साथ-साथ, हर घर तिरंगा अभियान के तहत भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान के तहत लोगों को अपने घरों पर तिरंगा फहराने और विभाजन की त्रासदी को याद करने के लिए प्रेरित किया गया। मार्च के दौरान लोग देशभक्ति के नारे लगा रहे थे और तिरंगे के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे। यह आयोजन न केवल विभाजन के दर्द को याद करने का अवसर था, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का भी संदेश देता था।
गांधी भवन में आयोजित प्रदर्शनी में विभाजन के दौरान की तस्वीरें और दस्तावेज प्रदर्शित किए गए, जो उस समय की भयावहता को दर्शाते थे। इनमें रेलगाड़ियों में शरणार्थियों की भीड़, हिंसा के दृश्य और विस्थापित परिवारों की कहानियां शामिल थीं। इन चित्रों ने नई पीढ़ी को उस दौर की भयावहता से अवगत कराया और यह संदेश दिया कि ऐसी त्रासदी को दोबारा नहीं दोहराया जाना चाहिए।
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