मंडी में भ्रष्टाचार की खुली पोल: बिना बोर्ड और दस्तावेज के 72 लाख के शेड निर्माण में गड़बड़ी, रेत-डस्ट से काम, SDO और सब इंजीनियर पर बंदरबांट का आरोप।
Madhyapradesh: मध्यप्रदेश के बैतूल में लगातार सुर्खियों में बनी कृषि उपज मंडी में भृष्टाचार चरम पर है मंडी प्रबंधन का इस ओर ध्यान ही नही है इसी का फायदा टेक्नीकल टीम के एसडीओ और सब इंजीनियर उठा रहे है मंडी
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के बैतूल में लगातार सुर्खियों में बनी कृषि उपज मंडी में भृष्टाचार चरम पर है मंडी प्रबंधन का इस ओर ध्यान ही नही है इसी का फायदा टेक्नीकल टीम के एसडीओ और सब इंजीनियर उठा रहे है मंडी में व्यवस्थाओं में सुधार तो दूर की बात है अभी तो यह हाल है कि शासन से आये हुए बजट की बंदरबांट की जा रही है दरअसल बडोरा कृषि उपज मंडी में 72 लाख की लागत से 20×30 मीटर हाई राइज़ शेड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जो कोई भोपाल का ठेकेदार को काम दिया गया है।
जिसमे सर्टिफाइड लोहा और अन्य मटेरियल का उपयोग किया जाना है और 15 सेंटीमीटर पर बांधने वाला लोहा 25 सेंटीमीटर पर बांध रहा है टेक्निकल सपोर्ट के चलते घटिया लोहा और अपनी मनमानी से ठेकेदार लोहा बांध रहा है और कॉलम बीम में 10 mm का लोहा उपयोग किया जा रहा है वहीं रिंग को 15 सेंटीमीटर की जगह 25 सेंटीमीटर पर बांधा गया है जिसके चलते इस निर्माण की उम्र ही बहुत कम हो जाएगी शासन की मंशा अनुरूप कार्य न होने से इसका खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना होगा पर और इस कार्य मे काली मिट्टी वाली रेत का उपयोग किया जा रहा है वहीं निर्माण के 2 माह पूर्व से ही मंडी में 4,5 डम्पर रेता का भी अवैध भंडारण ठेकेदार द्वारा बिना मंडी सचिव के जानकारी के कर रखा है।
जबकि सरकारी मंडी परिसर में इस तरह के अवैध भंडारण करने पर कार्यवाही किये जाने की बात खनिज विभाग द्वारा कही गई है वहीं इस निर्माण कार्य मे मिट्टी मिली रेत और डस्ट का उपयोग कर शासन की राशि की बंदरबांट में एसडीओ और सब इंजीनियर ठेकेदार के साथ मिलकर करने में लगे है इस मामले में एसडीओ से जब सवाल पूछे गए तो वह साफ तौर पर ठेकेदार के पक्ष में ही कार्य को सही मापदंड में होने का हवाला देने से भी पीछे नही हटे जबकि मौके पर स्थिति हमारे कैमरे में कैद है और जांच में भृष्टाचार का खुलासा हो जाएगा अब देखना यह होगा कि खबर चलने के बाद जिले के तेजतर्रार कलेक्टर मामले को संज्ञान में लेकर क्या जांच करवाते है या एसडीओ और सब इंजीनियर ठेकेदार के साथ बंदरबांट कर शासन को लाखों का चूना लगा देंगे और किसानों को मिलने वाली सुविधा असुविधा बन जाएगी।
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