सावन में ललन सिंह की मटन पार्टी ने मचाया सियासी बवाल- बिहार में धार्मिक भावनाओं पर विवाद।
Political News: बिहार के लखीसराय जिले में 16 जुलाई 2025 को केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह द्वारा आयोजित मटन भोज ने सियासी और धार्मिक...
बिहार के लखीसराय जिले में 16 जुलाई 2025 को केंद्रीय मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह द्वारा आयोजित मटन भोज ने सियासी और धार्मिक विवाद को जन्म दे दिया है। सूर्यगढ़ा प्रखंड में एक रैली के बाद आयोजित इस भोज में हजारों जदयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। सावन के पवित्र महीने में मांसाहारी भोजन परोसने की घोषणा ने विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP), को हमलावर होने का मौका दे दिया। ललन सिंह ने मंच से कहा, “सावन मनाने वालों के लिए भी भोजन का इंतजाम है, और जो नहीं मनाते, उनके लिए भी।” 16 जुलाई 2025 को लखीसराय के सूर्यगढ़ा प्रखंड में NH-80 के पास एक पेट्रोल पंप के नजदीक जदयू ने एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन मंत्री ललन सिंह और बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी मुख्य अतिथि थे। रैली के बाद हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भोजन का इंतजाम किया गया, जिसमें मटन-चावल और शाकाहारी व्यंजन दोनों शामिल थे। ललन सिंह ने मंच से मुस्कुराते हुए घोषणा की, “बढ़िया भोजन का इंतजाम है। सावन मनाने वालों के लिए सावन वाला भोजन है, और जो सावन नहीं मनाते, उनके लिए भी इंतजाम है।”
हालांकि, सावन के महीने में, जब हिंदू समुदाय परंपरागत रूप से मांसाहार से परहेज करता है, मटन भोज की सार्वजनिक घोषणा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से विवाद बढ़ गया। आयोजकों ने शाकाहारी भोजन की व्यवस्था भी की थी, लेकिन मटन भोज की चर्चा ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मुद्दा बना दिया।
- सियासी प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दलों ने इस आयोजन को धार्मिक असंवेदनशीलता का प्रतीक बताकर ललन सिंह और जदयू पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा, “सावन के पवित्र महीने में ललन सिंह मटन पार्टी देने से बाज नहीं आए। ये हिंदू धर्म के ठेकेदार दूसरों को नसीहत देते हैं, लेकिन अपनी बारी आने पर धर्म और परंपराएं भूल जाते हैं।” RJD नेता तेजस्वी यादव ने इसे “हिंदू आस्था का अपमान” करार दिया और कहा कि सत्ताधारी दल की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखता है।
बीजेपी, जो जदयू की गठबंधन सहयोगी है, ने भी इस मुद्दे पर असहजता जताई। बीजेपी के कुछ नेताओं ने निजी तौर पर कहा कि सावन में मटन भोज का प्रचार गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, बीजेपी के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस पर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की।
वहीं, जदयू ने इस विवाद का बचाव करते हुए कहा कि भोज में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के भोजन की व्यवस्था थी, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, “ललन सिंह ने सभी समुदायों का सम्मान करते हुए भोजन का इंतजाम किया। यह एक सामान्य कार्यकर्ता सम्मेलन था, जिसे धार्मिक रंग देना गलत है।”
- सावन और मटन- बिहार में पुराना विवाद
बिहार की राजनीति में मांसाहारी भोजन और धार्मिक पवित्रता का मुद्दा पहले भी विवाद का कारण बन चुका है। 2023 में RJD नेता लालू प्रसाद यादव ने सावन में राहुल गांधी के साथ मटन भोज आयोजित किया था, जिस पर बीजेपी और जदयू ने कड़ा ऐतराज जताया था। इसी तरह, 2024 में पितृपक्ष के दौरान तेजस्वी यादव के मछली खाने का वीडियो वायरल होने पर बीजेपी ने इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ बताया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल सावन और नवरात्र में मांसाहारी भोजन को लेकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा था, कहते हुए कि “इन्हें लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने में मजा आता है।” अब ललन सिंह की मटन पार्टी ने इस सियासी जंग को नया मोड़ दे दिया है, खासकर तब जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
मटन भोज में भारी भीड़ के कारण कुछ अव्यवस्था की भी खबरें सामने आईं। कई कार्यकर्ताओं ने शिकायत की कि समय पर मटन और चावल नहीं मिला, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा, और भीड़ बढ़ने से टेबल-कुर्सी की व्यवस्था भी बाधित हुई। हालांकि, आयोजकों ने दावा किया कि हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद सभी के लिए पर्याप्त भोजन का इंतजाम था।
यह पहली बार नहीं है जब ललन सिंह की मटन पार्टी में अव्यवस्था की बात सामने आई हो। 2023 में मुंगेर के पोलो मैदान में आयोजित एक मटन भोज में भारी हंगामा हुआ था, जहां भोजन के लिए मारपीट हुई और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। उस घटना में डीएसपी राजेश कुमार सिन्हा घायल हो गए थे।
- 2023 की मटन पार्टी और गंभीर आरोप
2023 में ललन सिंह की एक मटन पार्टी ने भी सुर्खियां बटोरी थीं, जब बीजेपी नेता विजय सिन्हा ने आरोप लगाया था कि भोज में “हजारों कुत्तों का मांस” परोसा गया, क्योंकि मुंगेर में उस दौरान कई कुत्ते गायब हो गए थे। इस आरोप को जदयू ने “बकवास” और “घटिया राजनीति” करार दिया था। बीजेपी नेता सम्राट चौधरी ने यह भी दावा किया था कि भोज में शराब परोसी गई, जिसकी जांच की मांग की गई। ये आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन इस बार सावन के संदर्भ में मटन भोज ने फिर से धार्मिक और सियासी विवाद को हवा दे दी है।
सावन का महीना, जो 11 जुलाई 2025 से शुरू हुआ, हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान लाखों लोग मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक भोजन से परहेज करते हैं। बिहार में सावन की विशेष आस्था है, जहां लोग कांवड़ यात्रा, शिव मंदिरों में पूजा और व्रत रखते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से मटन भोज का प्रचार कई लोगों को धार्मिक भावनाओं के खिलाफ लगा, जिसने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया।
ललन सिंह अपने संसदीय क्षेत्र मुंगेर में मटन भोज के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए ऐसे आयोजन करते रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता बढ़ाने का साधन रहे हैं। लेकिन सावन जैसे पवित्र महीने में मटन भोज का आयोजन और उसका सार्वजनिक प्रचार इस बार विवाद का कारण बन गया। X पर वायरल वीडियो में ललन सिंह का बयान और भोज की तस्वीरें तेजी से फैलीं, जिसने इसे राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बना दिया।
X पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। @sanjayyadavij ने लिखा, “सावन में भगवान भोलेनाथ का अपमान और दर्जनों बकरों की जान लेना हिंदू होने के नाते शर्मनाक है।” @WaleAyodhy70737 ने सवाल उठाया कि क्या कोई हिंदू संगठन इसका विरोध करेगा। वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे सियासी स्टंट बताते हुए कहा कि बिहार में मटन और मछली खाना सामान्य है, और इसे धार्मिक रंग देना गलत है।
चुनाव से पहले यह विवाद जदयू और बीजेपी गठबंधन के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे हिंदू भावनाओं के खिलाफ प्रचारित कर रहा है। बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं, और वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर पहले से ही सियासी घमासान मचा हुआ है। ऐसे में यह मटन भोज गठबंधन की एकता और छवि पर असर डाल सकता है।
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