Amarnath Yatra 2025: गंदेरबल में भूस्खलन से राजस्थान की महिला तीर्थयात्री की मौत, यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई। 

Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर में चल रही अमरनाथ यात्रा के दौरान 16 जुलाई 2025 को गंदेरबल जिले के बालटाल मार्ग पर एक दुखद हादसा हुआ। रेलपथरी क्षेत्र में ...

Jul 17, 2025 - 14:11
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Amarnath Yatra 2025: गंदेरबल में भूस्खलन से राजस्थान की महिला तीर्थयात्री की मौत, यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई। 
Amarnath Yatra 2025: गंदेरबल में भूस्खलन से राजस्थान की महिला तीर्थयात्री की मौत, यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई। 

जम्मू-कश्मीर में चल रही अमरनाथ यात्रा के दौरान 16 जुलाई 2025 को गंदेरबल जिले के बालटाल मार्ग पर एक दुखद हादसा हुआ। रेलपथरी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में राजस्थान की 55 वर्षीय महिला तीर्थयात्री सोना बाई की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य तीर्थयात्री घायल हो गए। इस घटना के बाद प्रशासन ने भारी बारिश और सुरक्षा चिंताओं के चलते 17 जुलाई को बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों से यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया। इस हादसे के साथ 2025 की अमरनाथ यात्रा में मरने वालों की संख्या 15 हो गई है। 

16 जुलाई 2025 की शाम को गंदेरबल जिले के बालटाल मार्ग पर रेलपथरी के पास जेड-मोड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ। इस हादसे में चार तीर्थयात्री बह गए, जिनमें से सोना बाई, जो राजस्थान के दारा राम की पत्नी थीं, को गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत बालटाल बेस कैंप अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अन्य तीन घायल तीर्थयात्रियों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, भूस्खलन का कारण बालटाल क्षेत्र में अचानक हुई तेज बारिश थी, जिसके चलते पहाड़ों से पानी, मिट्टी और चट्टानें यात्रा मार्ग पर आ गईं। यह हादसा उस समय हुआ जब तीर्थयात्री 3,880 मीटर ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ रहे थे।

हादसे के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, एनडीआरएफ, और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। घायलों को बालटाल बेस कैंप अस्पताल ले जाया गया, और BRO ने रेलपथरी क्षेत्र में मलबा हटाने का काम शुरू किया। कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर विजय कुमार बिधूड़ी ने बताया कि भारी बारिश के कारण दोनों मार्गों (बालटाल और पहलगाम) पर यात्रा मार्गों को नुकसान पहुंचा है, जिसके लिए मरम्मत और सुरक्षा जांच जरूरी है।

17 जुलाई 2025 को प्रशासन ने जम्मू से कोई नया तीर्थयात्री जत्था रवाना नहीं किया और दोनों मार्गों पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया। पंचतरनी कैंप में रुके तीर्थयात्रियों को BRO और माउंटेन रेस्क्यू टीमों की मदद से सुरक्षित बालटाल लाया गया। IMD ने अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिसके चलते यात्रा 18 जुलाई को मौसम सुधरने और मार्गों की मरम्मत के बाद ही शुरू होगी।

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 को शुरू हुई और 9 अगस्त 2025 को रक्षा बंधन के दिन समाप्त होगी। इस 38-दिवसीय यात्रा में अब तक 2.47 लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा दो मार्गों से संचालित होती है:

बालटाल मार्ग: 14 किलोमीटर का यह मार्ग छोटा लेकिन खड़ा और जोखिम भरा है, खासकर बुजुर्गों के लिए।

पहलगाम मार्ग: 48 किलोमीटर का यह मार्ग लंबा और अधिक प्राकृतिक दृश्यों वाला है, लेकिन इसमें तीन दिन लगते हैं।

इस साल यात्रा की शुरुआत से पहले 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, ने सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी थीं। इसके बावजूद, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सेना, सीआरपीएफ, और ड्रोन निगरानी के साथ कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

  • भूस्खलन और यात्रा में चुनौतियां

अमरनाथ यात्रा के दौरान भूस्खलन और भारी बारिश से होने वाले हादसे नई बात नहीं हैं। मानसून के मौसम में कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा रहता है। इससे पहले भी यात्रा के दौरान ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं:

2018: बालटाल मार्ग पर भूस्खलन में पांच तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी।

2023: अनंतनाग जिले में शूटिंग स्टोन्स की घटना में 53 वर्षीय उर्मिलाबेन मोदी की मौत हुई थी।

इस साल यात्रा में अब तक 15 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें भूस्खलन, सड़क हादसे, और स्वास्थ्य कारण शामिल हैं। 5 जुलाई को रामबन जिले में एक बस दुर्घटना में 36 तीर्थयात्री घायल हुए थे, और 13 जुलाई को कुलगाम में तीन बसों की टक्कर में 10 तीर्थयात्री घायल हुए थे।

इस हादसे ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। X पर @ndtvindia ने लिखा, “अमरनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, पत्थर गिरने से एक महिला की मौत।” @SudarshanNewsTV ने प्रशासन से यात्रियों की सुरक्षा के लिए और कड़े इंतजाम करने की मांग की।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा, “अमरनाथ यात्रा में इस साल रिकॉर्ड तीर्थयात्री आने की उम्मीद है, लेकिन सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने पहलगाम हमले के बाद भी यात्रा की सफलता पर भरोसा जताया।

विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सवाल उठाए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक नेता ने X पर लिखा, “हर साल भूस्खलन और हादसों की खबरें आती हैं, लेकिन मार्गों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय क्यों नहीं किए जाते?”

  • प्रशासन के उपाय

प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं:

BRO की तैनाती: मलबा हटाने और मार्गों की मरम्मत के लिए BRO ने भारी मशीनरी और कर्मचारियों को तैनात किया है।

मौसम निगरानी: IMD की चेतावनियों के आधार पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था: सेना, सीआरपीएफ, और ड्रोन निगरानी के साथ यात्रा मार्गों पर चौकसी बढ़ाई गई है।

आपातकालीन सुविधाएं: बालटाल और पहलगाम बेस कैंपों पर मेडिकल टीमें और राहत दल तैनात हैं।

प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे मौसम और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। यात्रियों को वैध मेडिकल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, और RFID कार्ड साथ रखने की सलाह दी गई है।

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