Lucknow : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 160 वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर नए युग की शुरुआत की
न्यायिक कार्यवाही को सुगम बनाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घोषणा की है कि वह सभी न्यायालयों द्वारा 17 मार्च 2026 से निर्णित किए जाने वाले तीन पृष्ठों या उससे अधि
सभी न्यायालयों द्वारा 17 मार्च 2026 से प्रभावी नान-एएफआर अंतिम निर्णय / आदेशों का हिंदी में अनुवाद का आरम्भ
लखनऊ। 17 मार्च, 2026 यानी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थापना दिवस (17 मार्च, 1866) को एक महत्वपूर्ण "मील के पत्थर" के रूप में चिन्हित करने के उद्देश्य से, अब इस तिथि को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सभी न्यायालयों (इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ, दोनों) द्वारा 17 मार्च 2026 से पारित नॉन-ए.एफ. आर. अंतिम निर्णय / आदेशों के हिंदी अनुवाद की शुरुआत की जा रही है। ज्ञात हो कि अब तक कुछ विशिष्ट श्रेणियों के निर्णयों का हिंदी अनुवाद किया जा रहा था। यह अनुवादित निर्णय न्यायालय की वेबसाइट पर डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे।
न्यायिक कार्यवाही को सुगम बनाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने घोषणा की है कि वह सभी न्यायालयों द्वारा 17 मार्च 2026 से निर्णित किए जाने वाले तीन पृष्ठों या उससे अधिक के नॉन-ए.एफ.आर. अंतिम निर्णयों/ आदेशों का अरेगा। इसके साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ए.एफ. आर. निर्णयों और उत्तर प्रदेश, बॉम्बे हाई कोर्ट और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से उत्पन्न होने वाले सुप्रीम कोर्ट के मामलों के निर्णयों का भी अनुवाद किया जा रहा है। यह पहल वादी, अधिवक्ताओ और आम लोगों के लिए भाषा की बाधाओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ की जा रही है।
यह अनुवाद परियोजना सुवास सेल, इलाहाबाद और लखनऊ द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति के संरक्षण और एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-ए.एच.सी.आर. और आई.एल.आर. समिति के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है, जिसका यह कदम सुनिश्चित करता है के न्याय सिर्फ दिया ही नहीं जाए बल्कि हर नागरिक द्वारा वास्तव में समझा भी जाए, चाहे उनकी राषाई पृष्ठभूमि कुछ भी हो। यह निर्णय विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे विविधतापूर्ण राज्य में बहुभाषी यायिक संसाधनों की बढ़ती मांग के बीच आया है।
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