बिहार में आम जनता की जेब पर बढ़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ: सुधा डेयरी ने दूध की कीमतों में किया ₹2 प्रति लीटर का इजाफा, शुक्रवार से प्रभावी हुईं नई दरें।

बिहार के लाखों उपभोक्ताओं और आम नागरिकों के घरेलू बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है, क्योंकि राज्य की सबसे बड़ी

May 22, 2026 - 12:46
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बिहार में आम जनता की जेब पर बढ़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ: सुधा डेयरी ने दूध की कीमतों में किया ₹2 प्रति लीटर का इजाफा, शुक्रवार से प्रभावी हुईं नई दरें।
बिहार में आम जनता की जेब पर बढ़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ: सुधा डेयरी ने दूध की कीमतों में किया ₹2 प्रति लीटर का इजाफा, शुक्रवार से प्रभावी हुईं नई दरें।
  • महंगाई के दौर में सुधा गोल्ड अब ₹67 और सुधा शक्ति ₹59 प्रति लीटर की दर से मिलेगा, आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ेगा सीधा असर
  • बिहार से पहले राजस्थान की सरस डेयरी ने भी बढ़ाए दाम; पड़ोसी राज्यों में डेयरी उत्पादों की बढ़ती लागत के चलते कॉम्फेड ने लिया कीमतों में संशोधन का फैसला

बिहार के लाखों उपभोक्ताओं और आम नागरिकों के घरेलू बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है, क्योंकि राज्य की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी ब्रांड सुधा ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी करने का आधिकारिक एलान कर दिया है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) द्वारा प्रबंधित सुधा डेयरी ने दूध के विभिन्न वेरिएंट्स की कीमतों में सीधे तौर पर ₹2 प्रति लीटर की वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जिससे आम जनता की सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक की लागत बढ़ जाएगी। प्रबंधन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, दूध की ये संशोधित और बढ़ी हुई कीमतें शुक्रवार से पूरे राज्य भर में पूरी तरह से प्रभावी हो गई हैं। अचानक लिए गए इस फैसले के बाद राज्य के सभी खुदरा काउंटरों, सुधा बूथों और सामान्य किराना दुकानों पर उपभोक्ताओं को दूध के पैकेट खरीदने के लिए अब पहले की तुलना में अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है, जिससे मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक खर्च का गणित पूरी तरह से प्रभावित होने की संभावना बन गई है।

इस नई मूल्य वृद्धि के बाद अगर दूध के अलग-अलग प्रकारों की नई दरों पर विस्तार से नजर डालें, तो उपभोक्ताओं के बीच सबसे लोकप्रिय और अधिक मांग वाले सुधा गोल्ड (फुल क्रीम दूध) की कीमत में बड़ा बदलाव आया है। अब तक ₹65 प्रति लीटर की दर से बिकने वाला सुधा गोल्ड दूध अब आम उपभोक्ताओं को ₹67 प्रति लीटर की बढ़ी हुई कीमत पर मिल रहा है। इसके साथ ही, टोंड मिल्क की श्रेणी में आने वाले सुधा शक्ति दूध की कीमतों में भी समान रूप से इजाफा किया गया है, जिसके चलते अब यह दूध ₹57 प्रति लीटर के पुराने भाव के स्थान पर ₹59 प्रति लीटर की नई दर से बाजारों में उपलब्ध हो रहा है। सुधा डेयरी के इस कदम से न केवल आधा लीटर और एक लीटर के पैकेट खरीदने वाले आम गृहस्थ प्रभावित हुए हैं, बल्कि चाय की दुकानों, होटलों, मिठाई निर्माताओं और कैटरिंग का व्यवसाय करने वाले छोटे व मझोले व्यापारियों के संचालन की लागत में भी एकाएक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

नई दरों का संक्षिप्त विवरण:

सुधा गोल्ड (फुल क्रीम): पुरानी कीमत ₹65 से बढ़कर अब हुई ₹67 प्रति लीटर।

सुधा शक्ति (स्टैंडर्ड): पुरानी कीमत ₹57 से बदलकर अब हुई ₹59 प्रति लीटर।

प्रभावी तिथि: नए मूल्य निर्धारण की दरें शुक्रवार की सुबह से पूरे बिहार में लागू।

बिहार में दुग्ध उत्पादों की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी को देश के अन्य राज्यों में चल रहे डेयरी उद्योग के घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि बिहार से ठीक पहले राजस्थान में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था। राजस्थान की प्रमुख सहकारी डेयरी सरस ने भी पशुपालकों की बढ़ती लागत और परिवहन खर्चों का हवाला देते हुए अपने दूध की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर का इजाफा किया था। हालांकि, राजस्थान और बिहार के इस मूल्य संशोधन में एक बड़ा और मुख्य अंतर यह देखने को मिला है कि राजस्थान की सरस डेयरी ने दूध के साथ-साथ दही, घी, छाछ और दूध से निर्मित होने वाले अन्य सह-उत्पादों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी की थी। इसके विपरीत, बिहार के उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सुधा डेयरी प्रबंधन ने फिलहाल केवल दूध के दामों को ही बढ़ाने का सीमित फैसला लिया है, जबकि दैनिक उपयोग में आने वाले अन्य उत्पादों जैसे दही, पनीर और घी के पुराने दामों को यथावत बनाए रखा गया है।

डेयरी फेडरेशन के प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त विस्तृत जानकारी के मुताबिक, दूध की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे कई अत्यंत महत्वपूर्ण और अपरिहार्य आर्थिक कारण जिम्मेदार रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना सहकारी समिति के संचालन के लिए कठिन होता जा रहा था। पिछले कुछ समय से ग्रामीण इलाकों में पशुचारे, खल, भूसे और पशु चिकित्सा दवाओं की कीमतों में लगातार रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके कारण दुग्ध उत्पादक किसानों और पशुपालकों पर पशुपालन का खर्च काफी अधिक बढ़ गया था। पशुपालक लगातार कॉम्फेड से दूध के खरीद मूल्य को बढ़ाने की मांग कर रहे थे ताकि वे अपने मवेशियों का भरण-पोषण सही तरीके से कर सकें। किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें दूध का उचित मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से डेयरी प्रबंधन ने खरीद मूल्य में वृद्धि की, और इसी बढ़े हुए वित्तीय बोझ को संतुलित करने के लिए अंततः उपभोक्ताओं के लिए बिक्री मूल्य में संशोधन करना पड़ा।

इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में समय-समय पर होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में भी व्यापक वृद्धि हुई है, जो दूध के दामों को बढ़ाने का एक अन्य प्रमुख कारक बनी है। चूंकि दूध एक अत्यंत संवेदनशील और जल्दी खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसे गांवों के संग्रहण केंद्रों से शीतलन संयंत्रों और फिर वहां से प्रसंस्करण इकाइयों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए रेफ्रिजरेटेड वाहनों और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। कोल्ड चेन को बनाए रखने और प्रसंस्करण के दौरान उपयोग होने वाली पैकेजिंग सामग्री, जैसे प्लास्टिक फिल्म और लेबर कॉस्ट में हुई बढ़ोतरी ने डेयरी के परिचालन मार्जिन को काफी कम कर दिया था। सहकारी संघों के सुचारू संचालन और राज्य में दुग्ध क्रांति की निरंतरता को बनाए रखने के लिए कीमतों में यह आंशिक वृद्धि करना प्रशासनिक रूप से अनिवार्य हो गया था।

शुक्रवार सुबह से लागू हुई इस नई व्यवस्था के बाद राज्य के विभिन्न जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया और पूर्णिया के सुधा बूथों पर सुबह-सुबह दूध लेने पहुंचे नागरिकों को जब इस मूल्य वृद्धि की जानकारी मिली, तो रिटेल काउंटरों पर विक्रेताओं और ग्राहकों के बीच फुटकर पैसों को लेकर हल्की बहस भी देखने को मिली। अधिकांश उपभोक्ताओं का मानना है कि दूध जैसी आवश्यक जीवनरक्षक वस्तु की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी सीधे तौर पर बच्चों के पोषण स्तर को प्रभावित करती है, क्योंकि सीमित आय वाले परिवारों को अब उतनी ही राशि में कम दूध से संतोष करना पड़ेगा। छोटे दूध विक्रेताओं का यह भी कहना है कि अचानक दाम बढ़ने से शुरुआती कुछ दिनों तक बिक्री की मात्रा में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन चूंकि सुधा ब्रांड पर लोगों का भरोसा बहुत मजबूत है, इसलिए जल्द ही बाजार इस नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढाल लेगा।

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