Lucknow : अवधी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए एसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. सत्येंद्र अवस्थी ने कहा कि अवधी को गूगल जैसी तकनीक से जोड़ने के लिए अधिक गद्य साहित्य और अनुवाद कार्य की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राम बहादुर मिश्र
लखनऊ के बीकेटी स्थित एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में अवध भारती संस्थान, भारतीय भाषा संस्थान मैसूर और एसआर ग्रुप के सहयोग से पांच दिवसीय अवधी राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तीसरे दिन राजदेवी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अवधी बोलने वाले लोग सरल स्वभाव के होते हैं और इस भाषा के व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार करने पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि हमारे पारंपरिक अवधी व्यंजन मौसम के अनुसार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। सरकार की ओर से उन्होंने भरोसा दिलाया कि अवधी भाषा के विकास के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. सत्येंद्र अवस्थी ने कहा कि अवधी को गूगल जैसी तकनीक से जोड़ने के लिए अधिक गद्य साहित्य और अनुवाद कार्य की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अवधी को वैदिक काल की प्राचीन भाषा बताते हुए सभी से इसमें लेखन शुरू करने का आग्रह किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. नीरज शुक्ला ने लोक गीतों, त्योहारों और व्यंजनों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने को साझा जिम्मेदारी बताया। कार्यक्रम संयोजक नागेंद्र बहादुर सिंह चौहान के संचालन में संपन्न हुई इस संगोष्ठी में 12 विद्वानों की अवधी बोली में रिकॉर्डिंग भी की गई। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और माँ चंद्रिका देवी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रदीप सारंग, कुसुम वर्मा, संजोली पाण्डेय और काजल सिंह सहित कई विद्वान उपस्थित रहे।
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