Sitapur News: तहसील प्रशासन के संरक्षण में महर्षि दधीचि की धरती हो रही तालाब विहीन ।
महर्षि दधीचि की धर्म धरती पर भू माफिया के चंगुल में जकड़ कर निरंतर तालाब बिहीन होती चली जा रही है । जब कि सैकड़ो वर्ष पुराने तालाबों...
रिपोर्ट- संदीप चौरसिया
मिश्रित / सीतापुर। महर्षि दधीचि की धर्म धरती पर भू माफिया के चंगुल में जकड़ कर निरंतर तालाब बिहीन होती चली जा रही है । जब कि सैकड़ो वर्ष पुराने तालाबों का खुले आम होने वाला पटान न तो क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों को दिखाई देता है । और न ही हेल्का लेखपालों को । वर्तमान समय नहर चौराहा से सिधौली जाने वाली रोड के किनारे ग्राम करुआमाऊ के मौर्य लोगों के मकानों के पीछे स्थित सैकड़ो वर्ष पुराना जगलिया नामक तालाब भू माफियाओं द्वारा रातों-रात पटान कराया जा रहा है । बताया यह भी जा रहा है । कि इस तालाब की भूमि का पटान कराने के बाद बेसकीमती जमीन को प्लाटिंग करके ऊंची दरों पर बेचा जाएगा ।
तालाब पटान के इस कार्य में सत्ता पक्षीय एक नेता के कथित प्रतिनिधि का पूरा हाथ बताया जा रहा है । जिसके दबाव में क्षेत्रीय लेखपाल की तो बात ही बहुत दूर है । समूचा तहसील प्रशासन नतमस्तक है । सिधौली रोड के किनारे स्थित इस तालाब पटान के बावत पूंछने पर क्षेत्रीय लेखपाल अजय कुमार पांडेय ने बताया है । कि मौके पर तो तालाब है । लेकिन अभिलेखों में मोहल्ला पांडेय नगर निवासी प्रेमचंद मिश्रा और हरीशचंद्र मिश्रा के नाम गाटा संख्या 1001 रकवा 384 हेक्टेयर संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज है । इन लोगों ने ही किसी के हाथ यह भूमि बेच दी है । और क्रेता पटान करा रहे हैं । मांमले में गौरतलब बात तो यह है । कि राजस्व अभिलेखों में अहम भूमिका निभाने वाला खसरा हर छठे मांह अपडेट किया जाता है तो फिर दसको पुराने तालाब वह चाहे सरकारी भूमि पर हो या व्यक्तिगत भूमि पर हो खसरे में दर्ज क्यों नहीं किए गए हैं।
इस कार्य में तहसील प्रशासन की पूरी मिली भगत और भ्रष्टता उजागर होती है ।इसी तरह सीतापुर हरदोई मार्ग पर चाइल्ड हेराल्ड स्कूल के समीप स्थित सैकड़ो वर्ष पुराना तालाब जो रोड के दोनों और फैला हुआ था । पूर्वी तरफ का भाग पूरी तरह पाटकर भवन और गेस्ट हाउस में तब्दील हो चुका है । इस मांमले में बताया यह जाता है । कि यह तालाबी भूमि महर्षि दधीचि आश्रम के ब्रम्हलीन महंत देवदत्त गिरी के भाई दीवानचंद गिरी के नाम संक्रमणीय भूमि धर के रूप में दर्ज थी । जिन्होंने भू माफिया के हाथों उसे बेंच लिया। और क्रेता भूमाफियाओं ने इस तलबी भूमि को पाट कर भवन और गेस्ट हाउस जैसी इमारतें खड़ी कर ली। रोड के पश्चिम तरफ स्थित तालाब का हिस्सा भी पटान और भवन निर्माण की ओर अग्रसर है । इतना ही नहीं सिधौली रोड पर एमडी इंटर कालेज के समीप रोड के दक्षिण स्थित सैकड़ो वर्ष पुराना तालाब भी पटान की तरफ अग्रसर है । इस तालाबी भूमि के अंदर भी भू माफिया ने भवन आदि निर्माण कराने के लिए पिलर खड़े कर लिए हैं । इसी तरह यह तालाब भी विलुप्तता की ओर अग्रसर हो रहा है।
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इसी तरह मिश्रित कुतुबनगर मार्ग पर स्थित तालाब महावत मोहल्ला से मिला हुआ पटान की तरफ अग्रसर हैं। भूमाफियाओं की इस करतूत से तहसील प्रशासन पता नहीं किसके दबाव में अंजान बना हुआ है। जिस तरह सीतापुर हरदोई रोड पर स्थित तालाब का आधा हिस्सा गायब हो चुका है। नगर के अधिकांश तालाब भवन निर्माण की भेट चढ़े हुए हैं । इसी तरह सिधौली रोड का जगतलिया नामक तालाब भी विलुप्त हो जाएगा । एक तरफ प्रदेश शासन जल संरक्षण के लिए नए तालाब बनवाने और पुराने का जीर्णोध्दार करा रही है।
वहीं मिश्रित नगर की वसुंधरा को क्षेत्रीय लेखपाल और तहसील प्रशासन की मिली भगत से तालाब विहीन करने का खेल खेला जा रहा है । जांच का गंभीर विषय यह भी है कि जब मौके पर सैकड़ो वर्ष पुराने तालाब हैं । तो फिर हर छठे मांह खसरा बनाने में क्यों नहीं दर्ज किए गए तालाब । क्या फसली खसरा परिवर्तन की बात भी हवा हवाई है । क्या प्रदेश शासन और जिला प्रशासन जांच कराकर इन भूमाफियाओं और उनका संरक्षण देने वाले तहसील प्रशासन पर करेगा कार्यवाही । शासन और प्रशासन के सामने गंभीर प्रश्न बना हुआ हैं ।
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