डिंडौरी के जामझूला गांव में दशगात्र कार्यक्रम के दौरान बड़ा हादसा: जहरीला भोजन करने से 60 से अधिक ग्रामीण हुए बीमार।
बीमार हुए ग्रामीणों ने बताया कि भोजन करने के लगभग आधे से एक घंटे के भीतर ही उन्हें पेट में तेज दर्द और मरोड़ की समस्या होने लगी थी। इसके तुरंत बाद कई लोगों को लगातार उल्टी और दस्त शुरू हो गए, जिस
- भोजन के बाद गांव में मची चीख-पुकार: उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए दर्जनों लोग।
- मध्य प्रदेश में फूड पॉइजनिंग का कहर: प्रशासन ने शुरू की मामले की उच्च स्तरीय जांच, खाने के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए।
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के अंतर्गत आने वाले जामझूला गांव में शुक्रवार की रात एक शोक कार्यक्रम के दौरान उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सामूहिक भोज में शामिल हुए बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगे। यह घटना एक दशगात्र कार्यक्रम के दौरान घटित हुई, जहाँ गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए ग्रामीण एकत्र हुए थे। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में परोसे गए भोजन को ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद लोगों को बेचैनी महसूस होने लगी। देखते ही देखते बीमारों की संख्या बढ़ने लगी और पूरे गांव में कोहराम मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में साठ से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। गांव की शांति अचानक एंबुलेंस के सायरन और पीड़ित परिवारों के रोने-बिलखने की आवाजों में बदल गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल व्याप्त है।
बीमार हुए ग्रामीणों ने बताया कि भोजन करने के लगभग आधे से एक घंटे के भीतर ही उन्हें पेट में तेज दर्द और मरोड़ की समस्या होने लगी थी। इसके तुरंत बाद कई लोगों को लगातार उल्टी और दस्त शुरू हो गए, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी होने लगी और वे निढाल पड़ गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कुछ मरीजों ने अपने चेहरे और आंखों में तेज जलन की शिकायत भी की, जिससे यह अंदेशा गहरा गया कि भोजन में इस्तेमाल की गई किसी सामग्री में जहरीला तत्व मौजूद था। जैसे-जैसे रात गहराती गई, स्थिति और अधिक गंभीर होती गई क्योंकि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने के लिए परिवहन के सीमित साधन उपलब्ध थे। ग्रामीण अपने निजी वाहनों, बाइक और पिकअप गाड़ियों की मदद से पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटे रहे।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं और आनन-फानन में एंबुलेंस को प्रभावित गांव के लिए रवाना किया गया। पीड़ितों को डिंडौरी के जिला अस्पताल और नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनका उपचार कर रही है। अस्पताल के वार्ड मरीजों से भर गए हैं और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त बिस्तरों और दवाइयों का इंतजाम किया गया है। चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक रूप से यह मामला फूड पॉइजनिंग का ही प्रतीत होता है, जिसमें दूषित भोजन या पानी के कारण लोगों के पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ा है। फिलहाल अधिकांश मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन कुछ बुजुर्गों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें गहन निगरानी में रखा गया है।
जांच के आदेश
जिला प्रशासन ने इस पूरी घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम में बने भोजन के सभी अवशेषों को सुरक्षित रखा जाए। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शनिवार सुबह गांव पहुंचकर खाने के नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि असल में भोजन के किस हिस्से में संक्रमण था।
प्रशासनिक जांच में इस बिंदु पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया पानी कहाँ से लाया गया था और क्या उसमें किसी प्रकार की गंदगी मिली हुई थी। अक्सर ग्रामीण अंचलों में सामूहिक भोज के लिए कुओं या बोरवेल के पानी का उपयोग किया जाता है, जो कभी-कभी दूषित हो सकता है। इसके अलावा, भोजन बनाने वाले रसोइयों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं। दशगात्र जैसे भावुक कार्यक्रमों में भीड़ अधिक होने के कारण स्वच्छता के मानकों की अनदेखी अक्सर इस तरह की आपदाओं को जन्म देती है। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि इस मामले में किसी की लापरवाही पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जामझूला गांव में हुई इस घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर भी रोशनी डाली है। ग्रामीणों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि गांव से मुख्य सड़क और अस्पताल की दूरी काफी अधिक है। हालांकि, बाद में जिला मुख्यालय से डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी टीम के पहुंचने से राहत कार्य में तेजी आई। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर गांव में ही एक अस्थाई शिविर लगा दिया है ताकि यदि कोई अन्य व्यक्ति भी लक्षणों की शिकायत करता है, तो उसे तुरंत मौके पर ही उपचार दिया जा सके। गांव के लोगों को सलाह दी गई है कि वे फिलहाल बाहर का खाना खाने से बचें और केवल उबला हुआ पानी ही पिएं।
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