दुबई के एमिरेट्स एनबीडी बैंक को आरबीएल बैंक में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की मिली आधिकारिक मंजूरी

अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरबीएल बैंक के संगठनात्मक ढांचे, प्रबंधन और तकनीकी क्षमताओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एमिरेट्स एनबीडी के पास मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काम करने का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है, जिसका सीधा

By INA News Desk
May 17, 2026 - 09:58
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दुबई के एमिरेट्स एनबीडी बैंक को आरबीएल बैंक में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की मिली आधिकारिक मंजूरी
दुबई के एमिरेट्स एनबीडी बैंक को आरबीएल बैंक में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की मिली आधिकारिक मंजूरी

  • बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश, भारतीय वित्तीय बाजार में बढ़ेगा वैश्विक निवेशकों का भरोसा
  • 26,850 करोड़ रुपये के इस महासौदे से आरबीएल बैंक के परिचालन और पूंजीगत आधार को मिलेगी अभूतपूर्व मजबूती

वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रमुख बैंकिंग समूह एमिरेट्स एनबीडी को भारत के निजी क्षेत्र के आरबीएल बैंक में एक बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इस निर्णय के तहत विदेशी बैंक को आरबीएल बैंक की कुल चुकता इक्विटी शेयर पूंजी में 49 प्रतिशत से अधिक और अधिकतम 74 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने की अनुमति दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और वित्तीय संबंधों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नियामक संस्थाओं की ओर से मिली यह मंजूरी भारतीय बैंकिंग इतिहास में विदेशी पूंजी के आगमन के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

इस रणनीतिक सौदे की रूपरेखा और प्रारंभिक घोषणा पूर्व में 18 अक्टूबर, 2025 को की गई थी, जिसके बाद से ही वित्तीय बाजारों में इसके अंतिम अनुमोदन को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। शुक्रवार को आरबीएल बैंक द्वारा शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सूचना के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम मुहर लग गई है। इस निवेश प्रस्ताव को सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब बैंकिंग नियामक और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अन्य दिशा-निर्देशों के तहत आगे की औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जाएंगी। बाजार नियामक और निवेशकों के बीच इस सौदे को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही अनिश्चितता अब पूरी तरह समाप्त हो गई है।

इस वृहद अधिग्रहण सौदे के जरिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली में लगभग 26,850 करोड़ रुपये के भारी-भरकम विदेशी निवेश का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। इतनी बड़ी मात्रा में पूंजी का प्रवाह न केवल आरबीएल बैंक की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि देश के बैंकिंग क्षेत्र में लिक्विडिटी और ऋण देने की क्षमता को भी व्यापक रूप से बढ़ावा देगा। इस सौदे के वित्तीय आकार को देखते हुए इसे घरेलू बैंकिंग परिदृश्य में अब तक के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निवेशों की सूची में शीर्ष पर रखा जा रहा है। इतनी बड़ी राशि का भारतीय बाजार में आना देश की आर्थिक स्थिरता और विकास दर पर वैश्विक भरोसे को दर्शाता है।

अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरबीएल बैंक के संगठनात्मक ढांचे, प्रबंधन और तकनीकी क्षमताओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एमिरेट्स एनबीडी के पास मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काम करने का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है, जिसका सीधा लाभ अब भारतीय बैंक के ग्राहकों और शेयरधारकों को मिलेगा। बैंक के पास इस नई पूंजी की मदद से अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे को उन्नत करने, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी शाखाओं का विस्तार करने और नए वित्तीय उत्पादों को पेश करने के पर्याप्त अवसर होंगे। इसके अतिरिक्त, बैंक अपनी बैलेंस शीट को और अधिक सुरक्षित तथा गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के जोखिम से मुक्त रखने में सक्षम हो सकेगा। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में शत-प्रतिशत स्वचालित मार्ग के तहत विदेशी निवेश की कुछ सीमाएं तय हैं, लेकिन 49 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की विशेष अनुमति अनिवार्य होती है। आरबीएल बैंक के मामले में मिली 74 प्रतिशत तक की यह मंजूरी इस बात का संकेत है कि देश में मजबूत और बड़े वैश्विक बैंकों की उपस्थिति को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि बैंकिंग प्रतिस्पर्धा को वैश्विक स्तर पर ले जाया जा सके।

इस बड़े सौदे का प्रभाव केवल आरबीएल बैंक तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका व्यापक असर पूरे भारतीय शेयर बाजार और विशेष रूप से बैंक निफ्टी सूचकांक पर भी देखने को मिलेगा। इस मंजूरी की खबर के बाद से ही बैंकिंग शेयरों के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य निजी बैंकों के मूल्यांकन को भी प्रभावित कर सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और बड़े संस्थागत खरीदारों के लिए यह सौदा एक सकारात्मक संदेश है कि भारत का नियामक तंत्र पारदर्शी और बड़े निवेशों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले हफ्तों में इस सौदे से जुड़े शेयरों के लेन-देन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

वैश्विक स्तर पर इस सौदे को भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मजबूत होते आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के एक व्यावहारिक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के बाद से ही वित्तीय सेवाओं के आदान-प्रदान में तेजी आई है, और एमिरेट्स एनबीडी का यह कदम इसी कड़ी का एक हिस्सा है। इस पूंजी निवेश के माध्यम से खाड़ी देशों के अन्य बड़े निवेशक भी भारतीय बाजारों में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों की तलाश करने के लिए प्रेरित होंगे। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की नियामक मजबूती और सख्त निगरानी व्यवस्था ने हमेशा से ही विदेशी निवेशकों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान किया है।

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