200 लड़ाकू विमानों ने 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, इजरायल ने ईरान पर किया अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला

हमले के दौरान इजरायली विमानों ने ईरान के 24 से अधिक प्रांतों में लक्ष्यों को निशाना बनाया, जिसमें तेहरान, तबरिज और अन्य प्रमुख शहरों के आसपास के सैन्य ठिकाने शामिल थे। इजरायल ने दावा

Mar 1, 2026 - 07:56
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200 लड़ाकू विमानों ने 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, इजरायल ने ईरान पर किया अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला
200 लड़ाकू विमानों ने 500 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, इजरायल ने ईरान पर किया अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला

इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अपने इतिहास का सबसे बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें उसकी वायुसेना के लगभग 200 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और 500 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यह ऑपरेशन 'रोरिंग लायन' के नाम से जाना गया, जो अमेरिका के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया था और इसमें सैकड़ों मुनिशन्स का इस्तेमाल किया गया। हमले की शुरुआत ईरान के समयानुसार सुबह 10 बजे के आसपास हुई, जब इजरायली विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित लक्ष्यों पर एक साथ हमला बोला। इजरायल की सेना ने दावा किया कि इस हमले में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, बैलिस्टिक मिसाइल लांचर, सैन्य कमांड सेंटर और अन्य रणनीतिक स्थलों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। यह हमला पूर्व नियोजित था और खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया, जिसमें इजरायली वायुसेना ने अपने पूरे बेड़े का एक बड़ा हिस्सा तैनात किया।

हमले के दौरान विमानों ने एक साथ कई स्थानों पर हमला किया, जिससे ईरान की रक्षा प्रणाली को जवाब देने का मौका नहीं मिला। इस ऑपरेशन को इजरायली वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी उड़ान बताया गया, जिसमें लड़ाकू विमानों ने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके लक्ष्यों तक पहुंच बनाई। हमले के बाद इजरायल ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करने के लिए आवश्यक थी, और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया और कहा कि यह ईरान के लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा मौका है। हमले में शामिल विमानों में एफ-35 और एफ-15 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान थे, जो सटीक हमलों के लिए जाने जाते हैं। इस घटना ने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया और वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी।

हमले के दौरान इजरायली विमानों ने ईरान के 24 से अधिक प्रांतों में लक्ष्यों को निशाना बनाया, जिसमें तेहरान, तबरिज और अन्य प्रमुख शहरों के आसपास के सैन्य ठिकाने शामिल थे। इजरायल ने दावा किया कि उनके हमलों ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को पहले चरण में ही निष्क्रिय कर दिया, जिससे आगे के हमलों के लिए हवाई क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल हो गया। इस ऑपरेशन में सैकड़ों मुनिशन्स गिराए गए, जो विशेष रूप से मिसाइल लांचरों और हवाई रक्षा बैटरियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए थे। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के आवासीय परिसर को भी निशाना बनाया गया, और अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इजरायली सेना ने सात उच्च पदाधिकारियों के मारे जाने की पुष्टि की, जिसमें ईरान की रक्षा परिषद के सचिव, आईआरजीसी कमांडर और रक्षा मंत्री शामिल थे। यह हमला इतना व्यापक था कि इजरायली विमानों ने एक साथ कई स्थानों पर हमला किया, जिससे ईरान की प्रतिक्रिया क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई। हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इजरायल ने कहा कि उनके हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव से जुड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा। इस ऑपरेशन की योजना महीनों से चल रही थी, और इसमें अमेरिकी खुफिया जानकारी का बड़ा योगदान था। हमले ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर झटका दिया, और इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया। वैश्विक स्तर पर इस हमले की निंदा और समर्थन दोनों देखने को मिले, लेकिन मध्य पूर्व में यह एक नए संघर्ष की शुरुआत माना जा रहा है।

ईरान ने हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसमें उसने इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान की राज्य मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की और उन्हें 'शहीद' घोषित कर 40 दिनों का शोक घोषित किया। जवाबी हमलों में इजरायल के उत्तरी क्षेत्र में एक 9 मंजिला इमारत पर मिसाइल गिरी, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ। ईरान ने दावा किया कि उसके हमलों ने इजरायल और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन इजरायल ने कहा कि उसके इंटरसेप्शन सिस्टम ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया। इस संघर्ष ने हवाई यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसमें दुबई और अन्य खाड़ी देशों के एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द हो गईं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सुरक्षित बताए गए और उन्होंने 'क्रशिंग रिस्पॉन्स' की घोषणा की। हमलों से ईरान में कम से कम 200 लोगों की मौत हुई, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हैं। यह संघर्ष अब व्यापक युद्ध में बदलने की आशंका पैदा कर रहा है, क्योंकि ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे हिजबुल्लाह और हूती विद्रोही भी सक्रिय हो सकते हैं। अमेरिका ने हमले को ईरान की आक्रामकता के खिलाफ आवश्यक बताया और कहा कि ऑपरेशन सप्ताह भर जारी रहेगा। इजरायल ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि वे आगे के हमलों के लिए तैयार हैं। इस घटना ने तेल की कीमतों में उछाल ला दिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला।

इजरायल और अमेरिका के इस संयुक्त हमले ने मध्य पूर्व की भू-राजनीति को बदल दिया, क्योंकि ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत से सत्ता में बड़ा शून्य पैदा हो गया। खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और उन्होंने अमेरिका तथा इजरायल विरोधी नीतियों को मजबूत किया था। उनकी मौत के बाद उत्तराधिकारी की नियुक्ति विशेषज्ञों की सभा द्वारा की जाएगी, लेकिन फिलहाल कोई स्पष्ट नाम नहीं है। इजरायल ने हमले को पूर्व नियोजित बताया और कहा कि यह ईरान से आने वाले मिसाइल हमलों के जवाब में किया गया। हमले में इजरायली विमानों ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया, जिससे ईरान की वायुसेना को जवाब देने में कठिनाई हुई। अमेरिका ने इस ऑपरेशन को 'एपिक फ्यूरी' नाम दिया और कहा कि यह क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में हमलों की निंदा की और कहा कि यह आक्रामकता है। क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित रहीं, जहां सऊदी अरब और इजरायल ने समर्थन किया, जबकि रूस और चीन ने आपातकालीन बैठक बुलाई। हमले ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी असर डाला, क्योंकि कुछ लक्ष्य इससे जुड़े थे। इजरायल ने दावा किया कि उनके हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता 50 प्रतिशत से अधिक कम हो गई। यह घटना 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है।

इस हमले के बाद इजरायल और अमेरिका ने आगे की कार्रवाई की तैयारी की, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार बमबारी शामिल है। ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपील की कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें और नया नेतृत्व चुनें। ईरान में आंतरिक अस्थिरता बढ़ गई, क्योंकि शोक के साथ-साथ सत्ता संक्रमण की प्रक्रिया शुरू हो गई। इजरायल ने अपने हमलों को सटीक बताया और कहा कि नागरिक क्षेत्रों से दूर रखा गया, लेकिन ईरान ने नागरिक मौतों का दावा किया। यह संघर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडरा रहा है। इजरायली सेना ने कहा कि उनके विमानों ने कोई नुकसान नहीं उठाया और सभी सुरक्षित लौटे। ईरान की आईआरजीसी ने मजबूत जवाब देने की बात कही और क्षेत्रीय सहयोगियों को सक्रिय किया। यह घटना पिछले महीनों के तनाव का परिणाम है, जिसमें ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए थे। अमेरिका ने अपने सैनिकों को अलर्ट पर रखा और कहा कि वे किसी भी जवाबी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। इस युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित किया, जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई।

हमले के परिणामस्वरूप ईरान में बड़े पैमाने पर क्षति हुई, जिसमें सैन्य ठिकानों के अलावा सरकारी इमारतें और कमांड सेंटर प्रभावित हुए। इजरायल ने वीडियो जारी किए, जिसमें मिसाइल लांचरों को नष्ट होते दिखाया गया। ईरान ने अपने हमलों में इजरायल के शहरों को निशाना बनाया, लेकिन अधिकांश मिसाइलें इंटरसेप्ट हो गईं। यह संघर्ष अब लंबा खिंच सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों ने आगे की कार्रवाई की बात कही है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि जवाबी हमले जारी रहे तो और बड़े हमले होंगे। इजरायल ने अपने नागरिकों को बंकरों में रहने की सलाह दी। ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, क्योंकि हमलों से उत्पादन प्रभावित हुआ। वैश्विक समुदाय ने शांति की अपील की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर लग रही है। यह घटना इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद की जाएगी।

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