मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर 'गुरु मां' ज्योति गिरफ्तार, 30 साल से फर्जी दस्तावेजों से भारत में बसी, 200 से ज्यादा लोगों की तस्करी का खुलासा। 

मुंबई पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर महिला को गिरफ्तार किया, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के बल

Oct 17, 2025 - 15:22
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मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर 'गुरु मां' ज्योति गिरफ्तार, 30 साल से फर्जी दस्तावेजों से भारत में बसी, 200 से ज्यादा लोगों की तस्करी का खुलासा। 
मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर 'गुरु मां' ज्योति गिरफ्तार, 30 साल से फर्जी दस्तावेजों से भारत में बसी, 200 से ज्यादा लोगों की तस्करी का खुलासा। 

मुंबई पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर महिला को गिरफ्तार किया, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के बल पर भारत में रह रही थी। आरोपी की पहचान बाबू अयान खान उर्फ ज्योति उर्फ गुरु मां के रूप में हुई है। यह गिरफ्तारी अवैध आप्रवासन के खिलाफ चल रही विशेष मुहिम का हिस्सा है। जांच में सामने आया है कि ज्योति न केवल खुद भारत में बसी हुई थी, बल्कि बांग्लादेश से सैकड़ों लोगों को अवैध रूप से भारत लाने का काम भी कर रही थी। अब तक की पूछताछ से पता चला है कि उसने 200 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को देश में घुसाने में मदद की। यह संख्या और बढ़ सकती है। पुलिस ने उसके खिलाफ पासपोर्ट एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ज्योति के पास मिले दस्तावेजों की जांच में वे सब नकली साबित हुए। यह घटना मुंबई में अवैध प्रवासियों के नेटवर्क को उजागर करती है।

ज्योति का असली नाम बाबू अयान खान है। वह मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। लगभग तीन दशक पहले वह अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुई। सीमा पार करने के बाद उसने अपनी पहचान बदल ली। ट्रांसजेंडर बनकर वह मुंबई के ट्रांसजेंडर समुदाय में घुल-मिल गई। समय के साथ वह एक आध्यात्मिक नेता के रूप में उभरी। लोग उसे गुरु मां कहकर बुलाते। उसके करीब 300 अनुयायी थे, जो मुंबई के विभिन्न इलाकों में फैले हुए हैं। ज्योति ने खुद को भारतीय नागरिक बताने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाए। इन दस्तावेजों से वह बैंक खाते खोल चुकी थी और संपत्ति खरीद चुकी थी। उसके नाम पर मुंबई के रफीक नगर, गोवांडी और अन्य क्षेत्रों में 20 से अधिक संपत्तियां हैं। ये संपत्तियां अवैध कमाई का स्रोत बनीं। ज्योति ने ट्रांसजेंडर समुदाय में अपनी साख बनाई। वह पूजा-पाठ और सलाह देती। अनुयायी उसे गुरु मानते। लेकिन यह सब एक धोखे की परत थी।

गिरफ्तारी की कहानी कुछ महीने पुरानी है। इस साल की शुरुआत में मुंबई पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर नकेल कसने के लिए विशेष छापेमारी शुरू की। शिवाजी नगर इलाके में एक रूटीन जांच के दौरान ज्योति के कुछ सहयोगियों को पकड़ा गया। पूछताछ में उन लोगों ने ज्योति का नाम लिया। पुलिस ने ज्योति को हिरासत में लिया। शुरुआत में उसने फर्जी दस्तावेज दिखाए। आधार और पैन कार्ड में उसका नाम ज्योति शेख दर्ज था। लेकिन गहन जांच में ये दस्तावेज नकली साबित हो गए। फॉरेंसिक टीम ने पुष्टि की कि जन्म प्रमाण पत्र पर हेराफेरी की गई थी। ज्योति ने कबूल किया कि वह बांग्लादेश से बिना वीजा के घुसी। सीमा के रास्ते पश्चिम बंगाल होते हुए मुंबई पहुंची। वहां एजेंटों की मदद से नकली कागजात बनवाए। पुलिस ने कहा कि ज्योति का नेटवर्क मुंबई तक सीमित नहीं। वह बांग्लादेश के विभिन्न जिलों से लोगों को लाती। एजेंटों का जाल था। 15,000 से 20,000 टका प्रति व्यक्ति लेकर सीमा क्रॉस करवाती।

पूछताछ में ज्योति ने कई राज खोले। उसने बताया कि वह 1990 के दशक के मध्य में भारत आई। शुरुआत में मुंबई के स्लम में मजदूरी की। फिर ट्रांसजेंडर बनने का फैसला लिया। दिल्ली और मुंबई के क्लिनिकों में सर्जरी कराई। फर्जी दस्तावेजों से वह सामाजिक सहायता लेती। ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड से पेंशन भी मिल रही थी। लेकिन मुख्य कमाई तस्करी से। ज्योति ने 200 से ज्यादा लोगों को भारत बसाया। इनमें ज्यादातर युवा थे। वे मुंबई, सूरत और अन्य शहरों में काम ढूंढते। कुछ फैक्ट्रियों में, तो कुछ घरेलू काम में लगे। ज्योति उन्हें नौकरी और आश्रय का वादा करती। बदले में पैसे वसूलती। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क बड़े गिरोह से जुड़ा। बांग्लादेश के एजेंट सीमा पर इंतजार करते। भारत में ज्योति उन्हें संभालती। अब पुलिस उसके फोन रिकॉर्ड और संपर्कों की छानबीन कर रही। कई सहयोगी फरार हैं।

मुंबई में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का मुद्दा पुराना है। शहर की आबादी में हजारों ऐसे लोग घुलमिल गए। वे फर्जी दस्तावेजों से वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस तक बनवा लेते। पुलिस की मुहिम से अब तक दर्जनों गिरफ्तारियां हुईं। जनवरी 2025 में सहार पुलिस ने नीलूफा याशिम को पकड़ा। वह भारतीय पासपोर्ट से ढाका लौट रही थी। अप्रैल में नवी मुंबई में दो एजेंट गिरफ्तार। वे बैंक खाते खोलने में मदद करते। जुलाई में भोपाल में एक ट्रांसजेंडर पुरुष पकड़ा गया। वह 20 साल से फर्जी पहचान से रह रहा। पुणे में अक्टूबर में 21 बांग्लादेशी गिरफ्तार। इनमें दो ट्रांसजेंडर शामिल। ये मामले दिखाते कि तस्करी का जाल कितना फैला। एजेंट 10,000 से 50,000 रुपये प्रति व्यक्ति लेते। सीमा पर घुसपैठ आसान। पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते लोग आते। मुंबई पहुंचकर वे फैल जाते।

ज्योति के खिलाफ पहले से कई केस दर्ज हैं। शिवाजी नगर, नरपोली, डीओनार, ट्रॉम्बे और कुरला थानों में मामले हैं। ये चोरी, धमकी और जमीन हड़पने से जुड़े। एक मामले में उसने अनुयायी से पैसे ऐंठे। ट्रांसजेंडर समुदाय में उसकी साख अब डगमगा गई। अनुयायी स्तब्ध हैं। एक ने कहा कि हमने उसे मां माना। लेकिन वह धोखेबाज निकली। पुलिस ने उसके 20 गुना संपत्ति जब्त की। इनकी कीमत करोड़ों में। नीलामी से प्रभावितों को राहत मिलेगी। ज्योति को कोर्ट में पेश किया गया। रिमांड मिला। पूछताछ जारी। वह बांग्लादेश प्रत्यर्पण का सामना करेगी। लेकिन पहले मुकदमे चलेंगे।

यह गिरफ्तारी अवैध आप्रवासन रोकने में मील का पत्थर। केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बढ़ाई। बीएसएफ ने ड्रोन और वॉल का इस्तेमाल किया। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निर्देश दिए। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मुहिम तेज होगी। हर इलाके में वेरिफिकेशन। किरायेदारों की जांच। नियोक्ताओं पर सख्ती। अवैध प्रवासी पकड़े जाएंगे। इससे अर्थव्यवस्था पर बोझ कम होगा। काला धन रोकेगा। लेकिन मानवीय पहलू भी। कई प्रवासी गरीबी से भागे। बांग्लादेश में बेरोजगारी। भारत में अवसर। लेकिन कानून तोड़ना गलत। ज्योति का केस चेतावनी। फर्जी दस्तावेजों से बचें।

ट्रांसजेंडर समुदाय प्रभावित। वे कहते कि ज्योति ने हमारी छवि खराब की। लेकिन हम निर्दोष। एनजीओ मदद मांग रहे। पुलिस ने आश्वासन दिया कि निर्दोषों को निशाना नहीं। जांच निष्पक्ष। ज्योति के अनुयायी पूछताछ में सहयोग कर रहे। कुछ ने तस्करी के सबूत दिए। पुलिस का मानना है कि नेटवर्क तोड़ दिया। लेकिन जड़ें गहरी। बांग्लादेश पुलिस से संपर्क। संयुक्त जांच। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाएगा।

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