गढ़चिरौली में भूपति समेत 61 नक्सलियों का सशस्त्र आत्मसमर्पण: महाराष्ट्र नक्सल मुक्त होने की कगार पर
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक ऐतिहासिक घटना घटी है। यहां के कुख्यात नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू समेत 61 नक्सलियों ने हथियारों के साथ
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक ऐतिहासिक घटना घटी है। यहां के कुख्यात नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू समेत 61 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ, जिसे राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की सबसे बड़ी सफलता बताया है। भूपति पर केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर 6 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। इन नक्सलियों ने 54 हथियार सौंपे, जिनमें 7 एके-47 राइफलें और 9 इंसास राइफलें शामिल हैं। इस घटना ने नक्सल आंदोलन की रीढ़ तोड़ दी है और महाराष्ट्र को नक्सल मुक्त राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है।
यह आत्मसमर्पण 14 अक्टूबर 2025 की देर रात शुरू हुआ और 15 अक्टूबर को औपचारिक रूप से पूरा किया गया। गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस समारोह में भूपति और उनके साथी पहुंचे। भूपति ने आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्ष अब व्यर्थ हो चुका है। उन्होंने घटते जन समर्थन और संगठन के अंदर फूट का जिक्र किया। भूपति ने एक पर्चा भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने हथियार डालने की अपील की थी। यह पर्चा वायरल हो गई थी और पुलिस को उनके आत्मसमर्पण का संकेत मिल गया था। एक महीने से अधिक समय से पुलिस उनसे संपर्क में थी। भूपति की पत्नी तारका ने इस साल की शुरुआत में ही आत्मसमर्पण कर लिया था, जो दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति की सदस्य थी। तारका के इस कदम ने भी भूपति को प्रभावित किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अवसर पर कहा कि यह माओवाद के अंत की शुरुआत है। उन्होंने गढ़चिरौली पुलिस को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की। फडणवीस ने बताया कि भूपति 40 वर्ष पहले अहेरी और सिरोंचा क्षेत्र में माओवादी आंदोलन की नींव रखने वाले प्रमुख नेता थे। उनका आत्मसमर्पण देश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है। सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। महाराष्ट्र इस दिशा में सबसे आगे है। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया और संविधान की प्रति भेंट की। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि नक्सलियों को सरेंडर के लिए मजबूर करने वाली नीतियां सफल साबित हुई हैं।
भूपति का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे मूल रूप से शिक्षक थे, लेकिन 1980 के दशक में नक्सल आंदोलन से जुड़ गए। भाकपा माओवादी की केंद्रीय समिति और पोलिट ब्यूरो के सदस्य के रूप में वे संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार थे। दंडकारण्य क्षेत्र में उनकी भूमिका सबसे बड़ी थी। वे कई बड़े हमलों की योजना बनाने के लिए कुख्यात थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, भूपति पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा समेत पांच राज्यों में मोस्ट वांटेड का दर्जा था। उनके नाम पर कुल 6 करोड़ का इनाम था। आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सली भी उच्च पदस्थ थे। इनमें दो डिवीजनल कमेटी सदस्य, कई एरिया कमेटी सदस्य और सशस्त्र दस्तों के कमांडर शामिल हैं। कई ने पहले मुठभेड़ों में हिस्सा लिया था।
गढ़चिरौली जिला महाराष्ट्र का सबसे पिछड़ा और नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है। यह राज्य की पूर्वी सीमा पर स्थित है और छत्तीसगढ़ तथा मध्य प्रदेश से सटा हुआ है। यहां घने जंगल, पहाड़ियां और नदियां हैं, जो नक्सलियों के लिए छिपने का सुरक्षित स्थान प्रदान करती हैं। 1980 के दशक में आंध्र प्रदेश के पीपुल्स वॉर ग्रुप के प्रभाव से यहां नक्सलवाद की जड़ें पड़ीं। सरकारी भ्रष्टाचार, आदिवासी शोषण और विकास की कमी ने आंदोलन को बल दिया। आदिवासी महिलाओं का यौन शोषण और भूमि विवाद प्रमुख मुद्दे थे। नक्सलियों ने स्थानीय लोगों को लामबंद किया, लेकिन समय के साथ उनकी क्रूरता ने जन समर्थन खो दिया। अब जिले में नक्सली गतिविधियां लगभग शून्य हो चुकी हैं।
राज्य सरकार की सख्त नीतियों ने नक्सलवाद को कमजोर किया है। 'लोन वर्राटू' अभियान के तहत आत्मसमर्पण को प्रोत्साहन दिया जाता है। इस अभियान में सरेंडर करने वालों को नौकरी, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं दी जाती हैं। गढ़चिरौली पुलिस ने पिछले चार वर्षों में सैकड़ों नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटाया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियानों ने जंगलों में घुसपैठ की। ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल बढ़ा। भर्ती में कमी और आंतरिक कलह ने नक्सल संगठन को तोड़ा। 21 मई 2025 को छत्तीसगढ़ में शीर्ष नक्सली बसवराजू के मारे जाने के बाद दंडकारण्य क्षेत्र कमजोर पड़ गया।
इस साल महाराष्ट्र में 300 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। गढ़चिरौली में ही पिछले दो महीनों में 100 से ज्यादा सरेंडर हो चुके हैं। जनवरी 2025 में 11 नक्सलियों ने सीएम फडणवीस के सामने हथियार डाले थे। इनमें विमला उर्फ तारका सिदाम भी थीं। फडणवीस ने तब कहा था कि नक्सलवाद अंतिम सांसें ले रहा है। अब भूपति के सरेंडर से यह प्रक्रिया तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इसकी सराहना की है। एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास सराहनीय है। हालांकि, उन्होंने विकास कार्यों को तेज करने की मांग की।
आत्मसमर्पण के बाद इन नक्सलियों का पुनर्वास महत्वपूर्ण है। सरकार ने उनके लिए विशेष पैकेज तैयार किया है। भूपति जैसे नेताओं को सुरक्षा दी जाएगी। उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे। जिले में सड़कें, पुल और बिजली जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। गट्टा-गार्डेवाड़ा सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। आदिवासी युवाओं को पुलिस भर्ती में प्राथमिकता दी जा रही है। 1500 से अधिक स्थानीय युवा अब सुरक्षा बलों में हैं। इनमें से कई पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं।
यह घटना पूरे देश के लिए संदेश है। नक्सलवाद अब 'लाल गलियारे' से बाहर हो रहा है। छत्तीसगढ़ में भी हाल ही में 71 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। केंद्र सरकार का लक्ष्य 2026 तक नक्सल मुक्त भारत है। महाराष्ट्र में केवल उंगलियों पर गिनी जाने वाली संख्या में नक्सली बचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार जल्द ही नक्सल मुक्त घोषणा कर सकती है। फडणवीस ने कहा कि गढ़चिरौली पहला नक्सल मुक्त जिला बनेगा। यह आदिवासियों के लिए नई उम्मीद की किरण है। विकास के बिना शांति टिकाऊ नहीं होती। सरकार अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस कर रही है।
नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और असमानता में हैं। महाराष्ट्र सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में बजट बढ़ाया है। स्कूलों में मिड-डे मील और छात्रावासों का विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या दोगुनी की गई। किसानों को सब्सिडी और बीमा योजनाएं दी जा रही हैं। ये कदम नक्सलवाद की पुनरावृत्ति रोकेंगे। भूपति जैसे नेताओं का सरेंडर साबित करता है कि हिंसा का रास्ता बंद हो चुका है। अब शांति और विकास का समय है।
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