नोएडा में बिजली मीटर फैक्ट्री में भीषण आग, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से कूदे लोग, 37 कर्मचारी घायल।
नोएडा के सेक्टर-4 में स्थित कैपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड नामक बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में 12 मार्च 2026 की सुबह करीब 5:30 बजे भीषण
- सेक्टर-4 की कैपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड में शॉर्ट सर्किट से लगी आग
- दूसरी-तीसरी मंजिल से कूदकर बचाने की कोशिश, 250 से अधिक फंसे थे
नोएडा के सेक्टर-4 में स्थित कैपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड नामक बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में 12 मार्च 2026 की सुबह करीब 5:30 बजे भीषण आग लग गई, जिसमें 37 कर्मचारी घायल हो गए। फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट चल रही थी और लगभग 340 से 350 कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें से कई तीसरी और चौथी मंजिल पर फंस गए। आग शॉर्ट सर्किट से लगी मानी जा रही है, जिसके बाद प्लास्टिक, कार्डबोर्ड और अन्य ज्वलनशील सामग्री से फैक्ट्री तेजी से जलने लगी। धुएं और लपटों से कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और कई ने जान बचाने के लिए दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से कूदने का फैसला किया। इस वजह से अधिकांश घायल पैरों और सिर में चोटों के साथ अस्पताल पहुंचे। आग इतनी तेज फैली कि फैक्ट्री का पूरा हिस्सा धुएं से भर गया और बाहर से बचाव कार्य मुश्किल हो गया। फायर ब्रिगेड की 15 से 20 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। घटना में किसी की मौत नहीं हुई लेकिन कई कर्मचारी गंभीर हालत में हैं और आईसीयू में भर्ती हैं।
आग लगने के समय फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट चल रही थी, जहां कर्मचारी बिजली मीटर के पार्ट्स असेंबल कर रहे थे। शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग ने तेजी से फैलते हुए प्लास्टिक और कार्डबोर्ड के स्टॉक को अपनी चपेट में ले लिया। धुआं इतना घना था कि कर्मचारी सांस लेने में असमर्थ हो गए और बाहर निकलने के रास्ते बंद हो गए। कई कर्मचारियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर कूदने की कोशिश की, जिसमें से कुछ पहले पहले फ्लोर की बालकनी पर गिरे और फिर जमीन पर। एक कर्मचारी ने बताया कि आग से बचने के लिए कूदना बेहतर लगा बजाय जलने के। घायलों में अधिकांश फ्रैक्चर, सिर में चोट और स्मोक इनहेलेशन से प्रभावित हैं। जिला अस्पताल में कुल 37 घायलों को भर्ती किया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई लेकिन सभी स्थिर हैं। फायर ब्रिगेड ने लिफ्ट और सीढ़ियों से फंसे लोगों को निकाला और खिड़कियों से रस्सी के सहारे रेस्क्यू किया।
फैक्ट्री में कुल चार मंजिलें हैं और आग मुख्य रूप से ऊपरी मंजिलों पर फैली। नाइट शिफ्ट में लगभग 250 से 340 कर्मचारी काम कर रहे थे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। आग लगने के बाद भगदड़ मची और कर्मचारी दरवाजे और खिड़कियों की ओर भागे। कई ने कूदकर जान बचाई लेकिन ऊंचाई के कारण चोटें गंभीर आईं। फायर ब्रिगेड को सूचना मिलने के बाद तुरंत 20 से अधिक टेंडर मौके पर पहुंचे और पानी की बौछारें चलाईं। एक फायरफाइटर स्मोक इनहेलेशन से बेहोश हो गया लेकिन बाद में ठीक हो गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग भी शामिल हुए। आग बुझने के बाद फैक्ट्री का मलबा हटाया गया और फंसे लोगों की तलाशी ली गई। सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया लेकिन फैक्ट्री में भारी नुकसान हुआ है।
घटना के बाद घायलों को जिला अस्पताल और नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि अधिकांश चोटें कूदने से आई हैं, जिसमें पैरों में फ्रैक्चर, सिर में चोट और स्मोक से सांस संबंधी समस्या शामिल है। कुछ कर्मचारी आईसीयू में हैं जहां उनकी निगरानी की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि सभी घायलों की हालत स्थिर है और कोई जानलेवा खतरा नहीं है। पुलिस ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का कारण माना जा रहा है लेकिन फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की जांच भी की जा रही है। फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी और इमरजेंसी एग्जिट की अनुपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में सुरक्षा मानकों की कमी को सामने लाती है। फैक्ट्री में फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे, जिससे आग तेजी से फैली। कर्मचारियों ने बताया कि आग लगने पर कोई अलार्म नहीं बजा और वे खुद बाहर निकलने की कोशिश में लगे। प्रशासन ने फैक्ट्री मालिक से पूछताछ शुरू की है और अन्य फैक्टरियों में सुरक्षा निरीक्षण के आदेश दिए हैं। यह हादसा पिछले कुछ वर्षों में नोएडा में फैक्ट्री आग की कई घटनाओं में से एक है, जहां कर्मचारी सुरक्षा उपकरणों की कमी से प्रभावित होते हैं। पुलिस ने FIR दर्ज की है और जांच में लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी।
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