Special : NIA के रडार पर NCR का जासूसी नेटवर्क: संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियो रिकॉर्डिंग पाकिस्तान भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली-NCR में सक्रिय एक बेहद खतरनाक और सुव्यवस्थित जासूसी नेटवर्क की कमान अपने हाथों में ले

Apr 18, 2026 - 13:18
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Special : NIA के रडार पर NCR का जासूसी नेटवर्क: संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियो रिकॉर्डिंग पाकिस्तान भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़।
Special : NIA के रडार पर NCR का जासूसी नेटवर्क: संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियो रिकॉर्डिंग पाकिस्तान भेजने वाले गिरोह का भंडाफोड़।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सक्रिय जासूसी मॉड्यूल की कमान संभालेगी एनआईए: सीमा पार बैठे आकाओं को डिजिटल डेटा भेजने वाले संदिग्धों पर कसता कानूनी शिकंजा।
  • सुरक्षा घेरे में सेंधमारी की बड़ी साजिश विफल: दिल्ली-NCR के प्रतिबंधित इलाकों की रेकी कर आईएसआई को सूचना देने वाले नेटवर्क की NIA करेगी गहन पड़ताल।

By Sukhmal Jain(Senior Journalist & Social Activist)

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली-NCR में सक्रिय एक बेहद खतरनाक और सुव्यवस्थित जासूसी नेटवर्क की कमान अपने हाथों में ले ली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर शुरू की गई इस जांच का मुख्य उद्देश्य उन संदिग्धों की पहचान करना और उन्हें कानून के दायरे में लाना है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संवेदनशील और प्रतिबंधित इलाकों की अवैध रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। शुरुआती इनपुट के अनुसार, यह जासूसी मॉड्यूल न केवल महत्वपूर्ण इमारतों की भौगोलिक स्थिति की जानकारी जुटा रहा था, बल्कि सैन्य आवाजाही और रणनीतिक ठिकानों की डिजिटल मैपिंग भी कर रहा था। NIA की एंट्री इस बात का संकेत है कि यह मामला केवल स्थानीय अपराध नहीं है, बल्कि देश की अखंडता और सुरक्षा पर एक बड़ा विदेशी हमला है, जिसके तार सीधे तौर पर पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़े होने का संदेह है। इस जासूसी कांड का खुलासा तब हुआ जब सुरक्षा एजेंसियों ने NCR के कुछ इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि इस गिरोह के सदस्य आम नागरिक की तरह संवेदनशील इलाकों, जैसे हिंडन एयरबेस, दिल्ली कैंट और विभिन्न वीवीआईपी आवासों के आसपास घूमते थे। वे अत्याधुनिक मोबाइल फोन और छिपे हुए कैमरों का उपयोग कर इन स्थानों की हाई-डेफिनिशन वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार करते थे। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ऐप्स और विदेशी सर्वर के माध्यम से पाकिस्तान भेजा जा रहा था। NIA अब इन डिजिटल पदचिह्नों का पीछा कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितना संवेदनशील डेटा सीमा पार भेजा जा चुका है और इससे भारतीय सुरक्षा तंत्र को किस स्तर का नुकसान पहुंच सकता है।

जासूसी के इस 'मॉडस ऑपरेंडी' ने सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि इसमें शामिल लोग कथित तौर पर 'स्लीपर सेल्स' की तरह काम कर रहे थे। ये लोग स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे रोजगार में लगे थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। NIA की जांच में इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि इन संदिग्धों को सीमा पार से किस तरह का प्रलोभन दिया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, इस काम के लिए हवाला के जरिए या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से बड़ी रकम का भुगतान किया गया है। बैंक खातों के लेन-देन और डिजिटल वॉलेट्स की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय कमर तोड़ी जा सके और फंडिंग के मुख्य स्रोत का पता लगाया जा सके।  राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर, गृह मंत्रालय ने NCR के सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने का निर्देश दिया है। अब इन इलाकों में 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' के साथ-साथ 'डिजिटल जैमर्स' की तैनाती पर विचार किया जा रहा है, ताकि किसी भी अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग को तकनीकी रूप से रोका जा सके। संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार उपकरणों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है ताकि डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया जा सके।

NIA की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू इस नेटवर्क के स्थानीय मददगारों की पहचान करना है। माना जा रहा है कि बिना किसी स्थानीय सहायता के संवेदनशील इलाकों की इतनी सटीक जानकारी जुटाना संभव नहीं है। एजेंसी उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जो इन संदिग्धों के संपर्क में थे या जिन्होंने उन्हें रहने और घूमने-फिरने के लिए रसद मुहैया कराई थी। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज, विदेशी सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए गए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर NIA गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) के तहत आरोपियों पर शिकंजा कस रही है।

तकनीकी विश्लेषण के दौरान यह भी पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने जासूसों को विशेष प्रशिक्षण दिया था कि कैसे सुरक्षा कर्मियों की नजरों से बचकर वीडियो शूट किया जाए। इसके लिए उन्होंने 'गूगल मैप्स' के उन फीचर्स का भी उपयोग किया जो आमतौर पर प्रतिबंधित क्षेत्रों में स्पष्टता नहीं दिखाते, लेकिन जमीन पर मौजूद जासूसों ने उसे 'ग्राउंड ट्रुथ' डेटा के साथ अपडेट कर आईएसआई को भेजा। NIA की टीम अब सैटेलाइट इमेजरी और पकड़े गए वीडियो का मिलान कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि दुश्मनों ने भारत के रक्षा बुनियादी ढांचे की कितनी सटीक मैपिंग कर ली है। यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में राजधानी में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। एजेंसी इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध पूर्व में पकड़े गए जासूसी मॉडल्स से तो नहीं है। हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां हनीट्रैप या पैसों के लालच में आकर लोगों ने सेना की गोपनीय जानकारी साझा की थी। हालांकि, यह वर्तमान मामला अधिक संगठित और तकनीक-आधारित नजर आ रहा है। NIA के अधिकारी विभिन्न राज्यों की एटीएस (ATS) टीमों के साथ भी समन्वय कर रहे हैं, क्योंकि इस नेटवर्क के तार सीमावर्ती राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।

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