भोजशाला की दीवारों और जमीन के नीचे छिपे रहस्यों से उठेगा पर्दा: एएसआई की टीम खुदाई में मिले अवशेषों और शिलालेखों की कोर्ट को देगी जानकारी।
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर में चल रहे वैज्ञानिक सर्वेक्षण का मामला आज एक निर्णायक
- धार भोजशाला वैज्ञानिक सर्वेक्षण का अहम पड़ाव: आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट पेश करेगा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण।
- 29 दिनों के उत्खनन और तकनीकी जांच का लेखा-जोखा होगा सार्वजनिक: इंदौर खंडपीठ तय करेगी धार भोजशाला में आगे के सर्वेक्षण की दिशा।
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर में चल रहे वैज्ञानिक सर्वेक्षण का मामला आज एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम आज, यानी 18 अप्रैल 2026 को, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के समक्ष अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने जा रही है। पिछले करीब एक महीने से चल रहे इस सर्वेक्षण के दौरान एएसआई ने परिसर के भीतर और बाहर कई महत्वपूर्ण स्थानों पर खुदाई और आधुनिक मशीनों से जांच की है। अदालत ने पिछली सुनवाई में एएसआई को सर्वेक्षण के लिए पर्याप्त समय देते हुए निर्देश दिया था कि अब तक की गई गतिविधियों और प्राप्त साक्ष्यों का विवरण प्रस्तुत किया जाए। आज की सुनवाई पर न केवल हिंदू और मुस्लिम पक्षों की, बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह रिपोर्ट तय करेगी कि इस सदियों पुराने ढांचे का वास्तविक स्वरूप और इतिहास क्या है।
सर्वेक्षण की प्रक्रिया 22 मार्च 2026 से शुरू हुई थी और तब से लेकर अब तक एएसआई की टीम ने प्रतिदिन बिना रुके वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग किया है। रिपोर्ट में मुख्य रूप से परिसर के उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में की गई खुदाई का विवरण शामिल होगा। सूत्रों के अनुसार, सर्वेक्षण के दौरान टीम को पत्थर के कुछ नक्काशीदार टुकड़े, प्राचीन स्तंभों के अवशेष और कुछ शिलालेख मिले हैं, जिन्हें संरक्षित कर लिया गया है। इन अवशेषों की कार्बन डेटिंग और पुरालेखीय जांच के माध्यम से उनकी प्राचीनता का निर्धारण किया जाना है। एएसआई ने सर्वेक्षण के लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) और जीपीएस जैसी उच्च तकनीकों का भी सहारा लिया है, ताकि जमीन को नुकसान पहुंचाए बिना नीचे दबी संरचनाओं का पता लगाया जा सके। भोजशाला परिसर के भीतर स्थित कमाल मौला मस्जिद और सरस्वती मंदिर के दावों के बीच, एएसआई की टीम ने मस्जिद के पिछले हिस्से और मुख्य प्रार्थना कक्ष के आसपास की दीवारों का सूक्ष्म निरीक्षण किया है। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख होने की संभावना है कि परिसर की दीवारों पर जो नक्काशी और आकृतियां मौजूद हैं, वे किस कालखंड की स्थापत्य शैली को प्रदर्शित करती हैं। एएसआई ने सर्वेक्षण के दौरान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के साथ-साथ हर छोटे-छोटे पत्थर की थ्री-डी मैपिंग भी की है। आज कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट में इन डिजिटल साक्ष्यों का एक संक्षिप्त संकलन भी शामिल हो सकता है, जो न्यायाधीशों को सर्वेक्षण की गंभीरता और बारीकियों को समझाने में मदद करेगा। एएसआई ने भोजशाला के गर्भगृह और मस्जिद के आंगन के नीचे दबी हुई मिट्टी की परतों का वैज्ञानिक परीक्षण किया है। इस दौरान टीम ने 'ब्रश क्लीनिंग' तकनीक का उपयोग करके उन शिलालेखों को साफ किया है जो धूल और समय के साथ धुंधले पड़ गए थे। इन शिलालेखों पर अंकित लिपि का अध्ययन करने के लिए विशेष पुरालेख विशेषज्ञों (Epigraphists) को बुलाया गया है, जिनकी प्रारंभिक टिप्पणियां आज कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट का हिस्सा बन सकती हैं।
कानूनी परिप्रेक्ष्य में यह सर्वेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की याचिका पर आधारित है। याचिका में दावा किया गया था कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी का मंदिर है। आज की सुनवाई के दौरान कोर्ट एएसआई से यह भी पूछ सकता है कि क्या उन्हें सर्वेक्षण कार्य पूरा करने के लिए और अधिक समय की आवश्यकता है। एएसआई की टीम ने अब तक परिसर के बाहरी क्षेत्र में लगभग 50 मीटर की परिधि में भी जांच की है, जहां से कुछ प्राचीन ईंटों के ढांचे मिले हैं। इन ढांचों की बनावट और उनके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का मिलान मुख्य भोजशाला भवन से किया जा रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि मूल परिसर का विस्तार कितना बड़ा था। मुस्लिम पक्ष की ओर से भी इस सर्वेक्षण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उनके प्रतिनिधि सर्वेक्षण के दौरान टीम के साथ मौजूद रहे हैं। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों को एएसआई की रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां या सुझाव देने का अवसर मिल सकता है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से, धार जिले में और विशेष रूप से भोजशाला के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। एएसआई की रिपोर्ट में साक्ष्यों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसे सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाने की भी संभावना है, क्योंकि यह एक संवेदनशील धार्मिक और पुरातात्विक मुद्दा है।
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