ममता दीदी को चाहिए घुसपैठिए, उनके साथ ही उनका 'इलू-इलू' है, हिमंत बिस्वा सरमा के बयान से मचा हड़कंप

भारतीय राजनीति में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ हमेशा से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, लेकिन अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव

Apr 18, 2026 - 13:27
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ममता दीदी को चाहिए घुसपैठिए, उनके साथ ही उनका 'इलू-इलू' है, हिमंत बिस्वा सरमा के बयान से मचा हड़कंप
ममता दीदी को चाहिए घुसपैठिए, उनके साथ ही उनका 'इलू-इलू' है, हिमंत बिस्वा सरमा के बयान से मचा हड़कंप
  • हिमंत बिस्वा सरमा का ममता बनर्जी पर तीखा हमला: सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन न देने को बताया घुसपैठियों के प्रति 'इलू-इलू' प्यार।
  • सीमा सुरक्षा पर सियासत: असम के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार पर लगाया घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप, BSF के काम में बाधा का मुद्दा गरमाया।

भारतीय राजनीति में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ हमेशा से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, लेकिन अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह बहस एक नए स्तर पर पहुंच गई है। असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी सरकार पर सीधा और बेहद हमलावर रुख अपनाया है। कूचबिहार और फासीदेवा की रैलियों में सरमा ने आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने (Border Fencing) के लिए राज्य सरकार से बार-बार जमीन की मांग कर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जानबूझकर जमीन उपलब्ध नहीं करा रही हैं। सरमा ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि ममता दीदी और घुसपैठियों के बीच एक तरह का 'इलू-इलू' (प्यार) चल रहा है, जिसके कारण वे राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रही हैं। हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान ने बंगाल में जमीन अधिग्रहण और केंद्र-राज्य संबंधों के पुराने विवाद को फिर से जीवंत कर दिया है। 29 जनवरी 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस ऐतिहासिक आदेश के बाद यह मुद्दा और भी ज्वलंत हो गया है, जिसमें कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि सीमा बाड़ के लिए अधिग्रहित सभी जमीन 31 मार्च 2026 तक BSF को सौंप दी जाए। मुख्यमंत्री सरमा ने इसी अदालती आदेश का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार केवल अपने वोट बैंक को बचाने के लिए अदालती आदेशों और राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी कर रही है। उनके अनुसार, अगर सीमा पूरी तरह सुरक्षित हो गई, तो घुसपैठियों का आना बंद हो जाएगा, जो कि वर्तमान सत्तारूढ़ दल के चुनावी समीकरणों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा की वर्तमान स्थिति को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा ने आंकड़ों और जमीनी हकीकतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के कई जिलों में मवेशी तस्करी और अवैध आवक की घटनाएं केवल इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि कई संवेदनशील हिस्सों पर अभी भी कटीले तारों की बाड़ नहीं लग पाई है। BSF के अधिकारियों ने भी समय-समय पर रिपोर्ट दी है कि कंचनजंघा कॉरिडोर और कूचबिहार के 'चिकन नेक' क्षेत्र में बाड़ न होने के कारण निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। सरमा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी BSF के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर किए जाने का विरोध भी केवल इसलिए करती हैं ताकि घुसपैठियों को अंदरूनी इलाकों में छिपने के लिए सुरक्षित गलियारा मिल सके। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा नदीय और दुर्गम है। केंद्र सरकार ने 2026 तक इस सीमा को पूरी तरह सील करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन लगभग 80 किलोमीटर से अधिक की जमीन अभी भी राज्य सरकार द्वारा हस्तांतरित न किए जाने के कारण लंबित है। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट के दखल के बाद यह प्रक्रिया शुरू तो हुई है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसके कार्यान्वयन की गति को धीमा कर दिया है। असम के मुख्यमंत्री ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए असम मॉडल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा सरकार ने पुलिस और BSF के बीच ऐसा तालमेल बिठाया है कि घुसपैठियों को पकड़ने के 24 घंटे के भीतर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया (Pushback) शुरू कर दी जाती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि जो काम असम में हो सकता है, वह बंगाल में क्यों नहीं? सरमा ने 'इलू-इलू' शब्द का प्रयोग करते हुए कटाक्ष किया कि जब दिल घुसपैठियों के साथ लगा हो, तो बाड़ लगाना मुश्किल लगता है। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह उन मूल निवासियों के अधिकारों का हनन है जिनकी जमीनें और नौकरियां ये अवैध अप्रवासी छीन रहे हैं।

चुनावी सभाओं में सरमा का यह आक्रामक अंदाज बंगाल के स्थानीय मतदाताओं को अपनी ओर खींचने की एक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेष रूप से कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे क्षेत्रों में, जहां सीमा पार से होने वाले अपराधों से स्थानीय लोग त्रस्त हैं, वहां 'सीमा बाड़' एक बड़ा चुनावी वादा बन गया है। सरमा ने दावा किया कि भाजपा के सत्ता में आने पर न केवल BSF को जमीन दी जाएगी, बल्कि आधुनिक थर्मल सेंसर और ड्रोन निगरानी प्रणाली भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस बार 'वोट बैंक की राजनीति' को नकार कर 'राष्ट्र सुरक्षा की राजनीति' को चुनें, ताकि बंगाल की जनसांख्यिकीय संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सके। इस बयान पर पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार का तर्क रहा है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे किसानों की उपजाऊ जमीन और संघीय ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, हिमंत बिस्वा सरमा ने इन दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार जमीन के बदले मुआवजा देने को तैयार है, तब राज्य सरकार का अड़ंगा केवल और केवल राजनीतिक द्वेष है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं हुआ, तो भविष्य की पीढ़ियां इस लापरवाही के लिए माफ नहीं करेंगी। सरमा के भाषणों ने बंगाल चुनाव को 'सुरक्षा बनाम तुष्टीकरण' की लड़ाई में तब्दील कर दिया है, जिसमें घुसपैठियों के साथ 'इलू-इलू' का मुहावरा एक बड़ा नारा बन गया है।

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