घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से लात मार-मारकर हम लोग निकालेंगे, हिमंत बिस्वा सरमा का पश्चिम बंगाल में चुनावी शंखनाद, बोले- 'भाजपा आने पर होगा सफाया'।

भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने प्रखर बयानों और आक्रामक तेवरों के लिए जाने

Apr 18, 2026 - 13:30
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घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से लात मार-मारकर हम लोग निकालेंगे, हिमंत बिस्वा सरमा का पश्चिम बंगाल में चुनावी शंखनाद, बोले- 'भाजपा आने पर होगा सफाया'।
घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से लात मार-मारकर हम लोग निकालेंगे, हिमंत बिस्वा सरमा का पश्चिम बंगाल में चुनावी शंखनाद, बोले- 'भाजपा आने पर होगा सफाया'।
  • घुसपैठ और तुष्टीकरण के मुद्दे पर असम के मुख्यमंत्री का बड़ा प्रहार: बंगाल की सुरक्षा के लिए सीमा सील करना और सख्त कदम उठाना अनिवार्य।
  • "बंगाल को बांग्लादेश बनने से रोकना है तो भाजपा को लाएं": कूचबिहार की रैली में हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठियों के खिलाफ दी सीधी चेतावनी।

भारतीय राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने प्रखर बयानों और आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं। अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रचार के लिए पहुंचे सरमा ने उत्तर बंगाल के कूचबिहार, फासीदेवा और कालचीनी में जनसभाओं को संबोधित करते हुए घुसपैठ के मुद्दे पर अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे हर सभा में यह बात दोहराते हैं कि बंगाल में एक बार भाजपा की सरकार आने दीजिए, घुसपैठियों को चुन-चुनकर राज्य से बाहर निकाला जाएगा। सरमा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार वोट बैंक की राजनीति के चलते बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी और सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ गई हैं। उनके इस बयान ने बंगाल के चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण और सुरक्षा के सवाल को केंद्र में ला दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठ की समस्या को केवल एक राज्य तक सीमित न मानकर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने असम और त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा की सरकारों ने बांग्लादेशी सीमा पर निगरानी सख्त की है और घुसपैठ पर प्रभावी लगाम लगाई है, लेकिन बंगाल में सीमाएं खुली छोड़ दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर घुसपैठ की यही गति बनी रही, तो आने वाले कुछ दशकों में बंगाल की मूल संस्कृति और पहचान पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उन्होंने आगाह किया कि घुसपैठिए न केवल संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं, बल्कि वे राज्य की शांति व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। सरमा के अनुसार, जिस तरह असम में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, वैसी ही सख्त कार्रवाई बंगाल में भी समय की मांग है।

चुनावी सभाओं के दौरान असम के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि असम और बंगाल दोनों ही राज्यों में मूल निवासियों की संख्या में गिरावट आई है, जबकि एक विशेष समुदाय की जनसंख्या में असामान्य वृद्धि हुई है, जिसका सीधा संबंध सीमा पार से होने वाली अवैध आवक से है। सरमा ने कहा कि वे यह संदेश लेकर आए हैं कि अगर बंगाल को 'मिनी बांग्लादेश' बनने से बचाना है, तो यहां एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो तुष्टीकरण के बजाय राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखे। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा सरकार आने पर न केवल सीमा को पूरी तरह सील किया जाएगा, बल्कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के लिए ठोस विधिक प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।  हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने भाषणों में अक्सर इस बात पर जोर दिया है कि घुसपैठ को रोकना केवल सीमा सुरक्षा बल (BSF) का कार्य नहीं है, बल्कि राज्य प्रशासन का सहयोग इसमें अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल का स्थानीय प्रशासन और पुलिस अक्सर घुसपैठियों को दस्तावेज़ बनवाने और बसने में मदद करते हैं। सरमा का 'लात मारकर निकालने' वाला मुहावरा राजनीतिक हलकों में एक कड़े प्रशासनिक संकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो अवैध प्रवासियों के प्रति उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दर्शाता है। असम के मुख्यमंत्री ने बंगाल सरकार पर भ्रष्टाचार और माफिया राज को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल के चाय बागानों की स्थिति दयनीय है क्योंकि सरकार श्रमिकों के कल्याण के बजाय बिचौलियों और तस्करों के साथ मिली हुई है। गाय तस्करी और कोयला सिंडिकेट का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि इन अवैध गतिविधियों से मिलने वाले धन का उपयोग चुनावों को प्रभावित करने और घुसपैठियों को बसाने में किया जा रहा है। उन्होंने असम के विकास मॉडल की तुलना बंगाल की वर्तमान स्थिति से करते हुए दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों में कानून का शासन है, जबकि बंगाल में 'बाहुबल और डर' का माहौल बना दिया गया है। उनके भाषणों का मुख्य लक्ष्य मतदाताओं को यह समझाना था कि सुरक्षा और विकास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए सांप्रदायिकता के आरोपों का जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि वे किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे उन 'अवैध तत्वों' के खिलाफ हैं जो भारत के संविधान और संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत के वैध नागरिकों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन जो लोग चोरी-छिपे सीमा पार कर यहां आए हैं और संसाधनों का उपभोग कर रहे हैं, उन्हें जाना ही होगा। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति ने बंगाल के मूल निवासियों को उनके अपने ही राज्य में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है। सरमा ने अपील की कि इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि बंगाल के अस्तित्व को बचाने की एक बड़ी लड़ाई है।

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