Prayagraj : बैसाखी महोत्सव में लोक संगीत और वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी ने मोहा मन, कलाकारों ने बिखेरे पंजाब के रंग

महोत्सव में प्रसिद्ध गायिका राखी हुंदल ने अपनी आवाज से समां बांध दिया, उनके गीतों पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। वहीं कुलदीप तूर ने रूहानी अंदाज में सूफी कलाम पेश कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सुखविंदर कौर के सूफी गीतों ने भी

Apr 20, 2026 - 23:35
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Prayagraj : बैसाखी महोत्सव में लोक संगीत और वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी ने मोहा मन, कलाकारों ने बिखेरे पंजाब के रंग
Prayagraj : बैसाखी महोत्सव में लोक संगीत और वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी ने मोहा मन, कलाकारों ने बिखेरे पंजाब के रंग

प्रयागराज के सांस्कृतिक केंद्र प्रेक्षागृह में आयोजित बैसाखी महोत्सव के दौरान पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत मंच पर जीवंत हो उठी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के साझा सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में ढोल की थाप और सारंगी की धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक फोक ऑर्केस्ट्रा के साथ हुई, जिसमें कलाकारों ने लोकप्रिय पंजाबी गीतों की धुनों से पूरे हॉल में उत्साह भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को पंजाब की मिट्टी और वहां के पारंपरिक मेलों का अहसास कराया।

महोत्सव में प्रसिद्ध गायिका राखी हुंदल ने अपनी आवाज से समां बांध दिया, उनके गीतों पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। वहीं कुलदीप तूर ने रूहानी अंदाज में सूफी कलाम पेश कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सुखविंदर कौर के सूफी गीतों ने भी शाम को यादगार बनाया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी रही। परमजीत पम्मी और उनके दल ने ढोल, बांसुरी, सारंगी, अलगुजा और तुंबी का ऐसा बेजोड़ संगम पेश किया कि लोग देर रात तक कुर्सियों से बंधे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राणा चावला, मंजीत सिंह, सुखमिंदर कौर बराड़ और केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने दीप जलाकर किया। इस दौरान उप निदेशक मुकेश उपाध्याय और कल्पना सहाय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंच का संचालन हिमानी रावत ने किया।

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