Prayagraj : राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने के लिए कैकेयी ने सहा कलंक, भावुक कर गया 'कैकेयी का राम' नाटक
मंच पर जब कैकेयी के दर्द और उनके दूरदर्शी उद्देश्यों को दर्शाया गया, तो प्रेक्षागृह में मौजूद दर्शकों की आंखें नम हो गईं। नाटक में स्पष्ट किया गया कि कैकेयी ने खुद पर कलंक झेलना स्वीकार किया ताकि राम वन जाकर ऋषि
प्रयागराज के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में बैसाखी महोत्सव के दौरान मंचित नाटक 'कैकेयी का राम' ने रामायण की प्रचलित धारणाओं को एक नया नजरिया दिया। मुकेश शर्मा के लेखन और निर्देशन में तैयार इस नाटक में दिखाया गया कि राम को वनवास भेजना कैकेयी की कोई ईर्ष्या या साजिश नहीं थी, बल्कि यह राम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' बनाने और मानवता की रक्षा के लिए उनका अपना महान त्याग था। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि महलों के सुख-सुविधाओं के बीच रहकर राम वह परिवर्तन नहीं ला सकते थे, जो उन्होंने एक तपस्वी के रूप में समाज के बीच रहकर और राक्षसों का अंत करके किया।
मंच पर जब कैकेयी के दर्द और उनके दूरदर्शी उद्देश्यों को दर्शाया गया, तो प्रेक्षागृह में मौजूद दर्शकों की आंखें नम हो गईं। नाटक में स्पष्ट किया गया कि कैकेयी ने खुद पर कलंक झेलना स्वीकार किया ताकि राम वन जाकर ऋषि-मुनियों को आतंक से मुक्त करा सकें। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. पंकज माला शर्मा, सदविंदर पाल सिंह, धर्मेंद्र प्रधान, मोहन टंडन, सुखमिंदर कौर ब्रार और केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने दीप जलाकर किया। प्रभावशाली संगीत और संवादों ने नाटक को जीवंत बना दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।
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