चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव का बड़ा बयान: 'पैसे की कमी नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई के लिए गया था जेल'।

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर राजपाल यादव पिछले कुछ समय से अपनी

Apr 22, 2026 - 13:02
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चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव का बड़ा बयान: 'पैसे की कमी नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई के लिए गया था जेल'।
चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव का बड़ा बयान: 'पैसे की कमी नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई के लिए गया था जेल'।
  • तिहाड़ में सरेंडर से लेकर करोड़ों के नुकसान तक: राजपाल यादव ने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े विवाद से हटाया पर्दा
  • सिनेमा की चकाचौंध के पीछे का कड़वा सच: अभिनेता राजपाल यादव ने बताया क्यों 2012 से खिंचता चला गया कानूनी विवाद

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर राजपाल यादव पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों से कहीं अधिक कानूनी पचड़ों के कारण चर्चा में रहे हैं। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में उनके सरेंडर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों को चौंका दिया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रियाओं और बकाया राशि का एक निश्चित हिस्सा जमा करने की प्रतिबद्धता के बाद उन्हें कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। अब इस पूरे प्रकरण के महीनों बाद राजपाल यादव ने पहली बार इस विवाद की गहराई और इसके पीछे की असली वजहों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई केवल धन की नहीं थी, बल्कि उन परिस्थितियों की थी जिसने एक कलाकार को अदालत के कटघरे तक पहुँचा दिया।

राजपाल यादव ने अपने हालिया साक्षात्कार में उन धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि उनके पास 5 करोड़ रुपये जैसा मामूली फंड नहीं था। 250 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता के लिए इतनी राशि चुकाना संभव था, लेकिन उन्होंने इसे एक सैद्धांतिक लड़ाई करार दिया। अभिनेता के अनुसार, लोगों का यह सोचना गलत है कि वह आर्थिक तंगी के कारण जेल गए थे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जिस दिन दुनिया इस विवाद की जड़ को समझ जाएगी, उस दिन उनके प्रति लोगों का नजरिया बदल जाएगा। यह मामला साल 2010 से शुरू हुआ था जब उन्होंने अपनी फिल्म के निर्देशन और निर्माण के लिए कर्ज लिया था, और उनके अनुसार यह विवाद 2012 में ही खत्म हो सकता था यदि परिस्थितियां सामान्य रहतीं। अभिनेता ने इस विवाद के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान का जो आंकड़ा पेश किया है, वह काफी बड़ा है। उन्होंने बताया कि जिस प्रोजेक्ट के कारण यह पूरा विवाद खड़ा हुआ, उस पर शुरुआत में 12 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। समय के साथ कानूनी उलझनों और देरी की वजह से यह लागत बढ़कर 22 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। राजपाल यादव का तर्क है कि यदि किसी फिल्म या प्रोजेक्ट में वैचारिक मतभेद या दुश्मनी भी हो, तो भी उसे रिलीज होने देना चाहिए ताकि जनता उसका भविष्य तय कर सके। उनका मानना है कि फिल्म का फ्लॉप होना या व्यावसायिक रूप से सफल न होना किसी धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह सिनेमाई व्यापार का एक हिस्सा है जिसे गलत तरीके से अपराध के रूप में पेश किया गया।

क्या था मामला?

यह पूरा विवाद एक निजी कंपनी से लिए गए कर्ज से जुड़ा है, जो राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' के लिए लिया था। भुगतान न हो पाने के कारण मामला अदालत में पहुँचा और चेक बाउंस होने की वजह से अभिनेता को कई बार कानूनी नोटिस जारी किए गए। साल 2018 में भी उन्हें इसी मामले में जेल जाना पड़ा था, और 2026 में एक बार फिर उन्होंने इसी विवाद के चलते सरेंडर किया।

राजपाल यादव ने भारतीय न्यायपालिका के प्रति अपना अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी कानून से भागने की कोशिश नहीं की। सरेंडर करना उनके लिए कानून का सम्मान करने का एक जरिया था। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि इस पूरे विवाद के दौरान उनके बारे में कई गलतफहमियां फैलाई गईं। अभिनेता का कहना है कि यह लड़ाई उन्होंने शुरू नहीं की थी, लेकिन वे इसे तार्किक और कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे चाहते हैं कि लोग केवल सुर्खियों को न देखें, बल्कि उस पूरी कहानी और उन दस्तावेजों को समझें जो इस विवाद के पीछे के असल सच को बयां करते हैं।

फिल्म इंडस्ट्री से मिलने वाले सहयोग पर बात करते हुए अभिनेता ने संकेत दिया कि मुश्किल दौर में इंसान को अपनों और परायों की पहचान हो जाती है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका दर्द साफ झलकता था कि व्यावसायिक हितों के लिए कैसे एक कलाकार के करियर को दांव पर लगा दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माण एक जोखिम भरा काम है और इसमें सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। 100 फिल्मों में से केवल चंद फिल्में ही मुनाफा कमाती हैं, ऐसे में घाटे को व्यक्तिगत धोखाधड़ी मान लेना सिनेमा की प्रकृति के विरुद्ध है। राजपाल यादव के अनुसार, उनके साथ जो हुआ वह एक व्यापारिक असफलता थी जिसे गलत तरीके से व्यक्तिगत विवाद बना दिया गया। इन तमाम कानूनी और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद राजपाल यादव का फिल्मी सफर थमा नहीं है। वर्तमान में वे अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'भूत बंगला' की सफलता का आनंद ले रहे हैं। इस फिल्म में वे लंबे समय बाद अपने पुराने साथी अक्षय कुमार के साथ नजर आए हैं। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों का उनके प्रति प्यार आज भी बरकरार है। पर्दे पर उनकी वापसी ने यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत संकट चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, एक सच्चा कलाकार अपनी कला के माध्यम से फिर से खड़ा होने की क्षमता रखता है।

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