Sambhal: 'विश्व गुरु नहीं, हकीकत का आईना!' - जोशी के बयान पर सियासी संग्राम, AIMIM ने भी मानी बात।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के “भारत अभी विश्व गुरु नहीं है” वाले बयान ने सियासी गलियारों में नई
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के “भारत अभी विश्व गुरु नहीं है” वाले बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ यह बयान बीजेपी की अपनी विचारधारा के भीतर आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका बना लिया है।
इसी कड़ी में सय्यद असलम, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में AIMIM के महासचिव हैं, उन्होंने जोशी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि “यह बिल्कुल सच है।” असलम ने कहा कि भारत कभी “विश्व गुरु” रहा होगा, लेकिन वर्तमान हालात इस दावे को सही साबित नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिख रही जितनी होनी चाहिए थी। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दबाव में नजर आता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छोटे देश जैसे पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय मामलों में मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि भारत इस भूमिका में पीछे रह गया है। मध्य पूर्व के मुद्दों—खासतौर पर ईरान, इज़राइल और फ़िलिस्तीन—पर भारत की चुप्पी को लेकर भी असलम ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जहां दुनिया के कई देश खुलकर अपनी राय रखते हैं, वहीं भारत ने संतुलन बनाए रखने के नाम पर अपनी स्पष्ट भूमिका नहीं दिखाई। असलम ने साफ कहा कि “जिस जगह भारत और उसके प्रधानमंत्री को होना चाहिए था, वहां आज हम नहीं हैं। ऐसे में ‘विश्व गुरु’ का दावा करना हकीकत से दूर लगता है।” जोशी के बयान के बाद यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत वैश्विक नेतृत्व की उस स्थिति में है, जैसा अक्सर राजनीतिक मंचों से दावा किया जाता है, या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक नारा बनकर रह गया है।
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