Sambhal News: ईद की नमाज से पहले अदा करे सदक़ा ए फित्र- मुफ़्ती रियाज
रमजान का सदका-ए-फितर 50 रुपये नकद या इतनी ही राशि के एक किलो 661 ग्राम गेहूं बाजार की कीमत के अनुसार तय करे अथवा खजूर....
रिपोर्ट- उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल। जामा मस्जिद के इमाम मुफ़्ती रियाज उल हक कासमी ने बताया कि ईद के पहले हर मुस्लिम के लिए अनिवार्य रूप से अदा किए जाने वाले सदका-ए-फितर की राशि बाजार के गेंहू की दाम के हिसाब से पौने दो किलो यानी 50 रुपये मुकर्रर की गई है। उन्होंने कहा कि सदका ए फितर बाजार में गेहूं की कीमत के हिसाब से तय किया गया है। उन्होंने कहा कि सदका-ए-फितर (दान) रमजान के रोजे पूरे होने के बाद दिया जाता है।
रमजान का सदका-ए-फितर 50 रुपये नकद या इतनी ही राशि के एक किलो 661 ग्राम गेहूं बाजार की कीमत के अनुसार तय करे अथवा खजूर, किशमिश या मुनक्का आदि की शक्ल में भी दिया जा सकता है, जोकि हर मुसलमान पर फर्ज है, चाहे वह मर्द हो या फिर औरत। फितरा का मकसद ईद के दिन किसी को भीख नहीं मांगना पड़े। अगर कोई व्यक्ति नकद पैसा नहीं देकर अनाज देना चाहें तो उन्हें एक किलो 661 ग्राम गेहूं या उसके बराबर कीमत ईद की नमाज से पहले अदा कर सकता है। फितरे की रकम भी गरीब, विधवा, यतीम और जरूरतमंदों को दी जाती है।
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- सदका-ए-फितर व जकात के मसाइल
उन्होंने ने बताया वह शख्स जिस पर जकात फर्ज है। उस पर फितर वाजिब है। यह फकीरों, मिसकीनों (असहाय) या मोहताजों को देना बेहतर है। ईद का चांद देखते ही फितर वाजिब हो जाता है तथा ईद की नमाज पढ़ने से पहले इसे अदा करना चाहिए। ऐसे ही जकात है, जिस व्यक्ति के पास साढ़े सात तोले सोना या साढे़ 52 तोले चांदी अथवा इतनी रकम हो उस पर नेक कमाई के प्रत्येक सौ रुपये पर ढाई रुपये जकात फर्ज बनता है। रमजान के आखिर में नौ रात इबादत की होती हैं, इस रात को शब्बे कद्र की रात कहा जाता हैं। इन रातों में मुस्लिम इबादत करे तथा देश दुनियां में सुख शांति की दुआ मांगे। इन रातों में की गई इबादत का एक हजार रातों की इबादत का सवाब मिलता है।
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