Pilibhit News: पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में एक्वाटिक स्कूल का समापन, संरक्षण ज्ञान, कौशल और उपलब्धियों के साथ 8वां संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न।
मलेशिया सरवाक विश्वविद्यालय के संरक्षण जीवविज्ञानी, डॉ. इंद्रनील दास के पहले लाइव ऑनलाइन सत्र से हुई। उन्होंने कछुआ टैक्सोनॉमी पर विस्तृत ...
रिपोर्ट- कुँवर निर्भय सिंह
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में आयोजित स्कूल ऑफ़ एक्वाटिक वाइल्डलाइफ बायोलॉजी एंड कंज़र्वेशन का छठा और अंतिम दिन डीएफओ कार्यालय में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को टीएसए फाउंडेशन इंडिया (TSAFI), उत्तर प्रदेश वन विभाग और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के संयुक्त प्रयासों से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मलेशिया सरवाक विश्वविद्यालय के संरक्षण जीवविज्ञानी, डॉ. इंद्रनील दास के पहले लाइव ऑनलाइन सत्र से हुई। उन्होंने कछुआ टैक्सोनॉमी पर विस्तृत सत्र लिया, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रजातियों की पहचान और वर्गीकरण की बारीकियां समझीं सुंदरवन टाइगर रिज़र्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर, जोन्स जस्टिन ने सॉल्टवाटर क्रोकोडाइल जनगणना पर ज्ञानवर्धक जानकारी दी। प्रतिभागियों ने मगरमच्छ जनगणना के तकनीकी पहलुओं को जाना। पत्रकार केशव अग्रवाल ने प्रतिभागियों को संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। डीएफओ भारत कुमार डीके ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम के सफल संचालन की सराहना की।
कार्यक्रम के मानद अतिथि, डिप्टी फील्ड डायरेक्टर, मनीष सिंह, पत्रकार केशव अग्रवाल, डीएफओ भारत कुमार डीके और प्रोविजनरी IFS अधिकारी विपिन की उपस्थिति में विजेताओं को सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों ने चार अलग-अलग प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। फाइंड योर वॉइस प्रतियोगिता के विजेता अनुषा सिंह और सुमना छेत्री रहे। ग्रांट लेखन प्रतियोगिता में ग्रुप घड़ियाल रहा जिसमें मोहित आनंद, अनुषा सिंह, आशा खत्री, सुमना छेत्री रही। एनक्लोज़र डिज़ाइनिंग प्रतियोगिता में ग्रुप डॉल्फिन जिसमें राहुल उनियाल, मेघा खंडूरी, नवराज पोखरेल, निकीत प्रधान ने जीत दर्ज की। फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता में ग्रुप टर्टल विजेता रहा जिसमें मनीष कछवाहा, मनीष कंडेल, कृष्ण दीप डौगरा, ऐश्वर्या सिंह ने प्रतिभाग किया।
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पूरे कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए विनीत तिमालसिना (नेपाल) को सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी घोषित किया गया, जबकि ग्रुप ओटर के विनीत तिमालसिना, संस्कार मिश्रा, आरती कुमारी साहनी, गौरव धवाड़े ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। छह दिनों तक चले इस कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण, फील्ड तकनीक, कथा-वाचन और संचार कौशल पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने फील्ड में व्यावहारिक अनुभव के साथ-साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति की कला भी सीखी। यह स्कूल अब भविष्य के संरक्षण योद्धाओं को तैयार करने की प्रेरणा बन गया है।
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