Noida Voilence : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी हिंसा और आगजनी: 350 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और वाहनों को फूंका गया

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुई इस हिंसा का व्यापक असर दिल्ली-एनसीआर के यातायात पर भी पड़ा है। विशेष रूप से दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर और कालिंदी कुंज मार्ग पर घंटों तक जाम लगा रहा। पुलिस ने एहतियात के

Apr 13, 2026 - 23:45
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Noida Voilence : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी हिंसा और आगजनी: 350 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और वाहनों को फूंका गया
Noida Voilence : नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी हिंसा और आगजनी: 350 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और वाहनों को फूंका गया

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला: श्रमिकों के विवादों को सुलझाने के लिए हाई-लेवल कमेटी का किया गया गठन
  • नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर भारी तनाव के बीच पुलिस की सख्त तैनाती: आगजनी और पथराव की घटनाओं ने लिया उग्र रूप

नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सोमवार को वेतन वृद्धि और काम करने की बेहतर स्थितियों की मांग को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारी उग्रता दिखाते हुए लगभग 350 फैक्ट्रियों में जमकर तोड़फोड़ की और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर मौजूद साक्ष्यों के अनुसार, भीड़ ने न केवल औद्योगिक इकाइयों के शीशे तोड़े, बल्कि वहां लगे कीमती मशीनरी और उपकरणों को भी निशाना बनाया। शहर के होजरी कॉम्प्लेक्स और फेज-2 जैसे व्यस्त औद्योगिक केंद्रों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वहां काम करने वाले अन्य कर्मचारी और अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। उपद्रवियों ने कई स्थानों पर पत्थरबाजी की, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई।

हिंसा की यह आग केवल फैक्ट्रियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया। प्रदर्शनकारियों ने नोएडा के सेक्टर 60 और फेज-2 के पास शोरूम के बाहर खड़ी कारों को आग के हवाले कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 150 से अधिक वाहनों को या तो पूरी तरह से जला दिया गया या फिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। आग की लपटों में घिरे वाहनों से उठते धुएं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। पुलिस और प्रशासन की टीम जब मौके पर पहुंची, तो उन्हें भी भारी विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा। इस दौरान कई पुलिस वाहनों को भी क्षति पहुंची है, जिससे सरकारी संपत्ति को भी बड़ा नुकसान हुआ है। नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वेतनमान में भारी अंतर बताया जा रहा है। जहां हरियाणा में न्यूनतम वेतन लगभग 19,000 रुपये है, वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा में यह करीब 13,000 रुपये के आसपास बना हुआ है। इसी असमानता ने श्रमिकों के भीतर लंबे समय से पनप रहे असंतोष को हवा दी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा की इस गंभीर स्थिति का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने राजधानी लखनऊ में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी अराजक तत्व को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। औद्योगिक शांति बनाए रखने और श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने एक हाई-लेवल कमेटी (उच्च स्तरीय समिति) के गठन का आदेश दिया है। यह कमेटी औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी और सभी हितधारकों के साथ बातचीत करके जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

विस्तृत जांच में यह बात सामने आ रही है कि इस हिंसा के पीछे कुछ बाहरी तत्वों का भी हाथ हो सकता है, जिन्होंने भोले-भाले श्रमिकों को उकसाकर अशांति फैलाने की कोशिश की। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि जो लोग राज्य की औद्योगिक प्रगति और विकास में बाधा डालना चाहते हैं, उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो एक नजीर बनेगी। पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन लोगों की पहचान करें जिन्होंने भीड़ को हिंसा के लिए प्रेरित किया। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि यह केवल एक साधारण वेतन वृद्धि का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ असामाजिक तत्वों की सोची-समझी साजिश भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की शांति भंग करना था।

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हुई इस हिंसा का व्यापक असर दिल्ली-एनसीआर के यातायात पर भी पड़ा है। विशेष रूप से दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर और कालिंदी कुंज मार्ग पर घंटों तक जाम लगा रहा। पुलिस ने एहतियात के तौर पर कई रूटों को डायवर्ट किया है और प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में पीएसी और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है। पुलिस द्वारा इलाके में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है और संदिग्धों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है। जिला मजिस्ट्रेट ने भी श्रमिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

श्रमिकों की मांगों पर गौर करें तो उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में उनके वर्तमान वेतन से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वे लंबे समय से वेतन संशोधन, डबल ओवरटाइम भुगतान, वार्षिक बोनस और कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग कर रहे थे। हालांकि, औद्योगिक घरानों का पक्ष है कि वे श्रम कानूनों का पालन कर रहे हैं और अचानक हुई इस हिंसा से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है। प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है ताकि औद्योगिक इकाइयों में कामकाज दोबारा शुरू हो सके। सरकार ने आश्वासन दिया है कि श्रमिकों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, लेकिन हिंसा के रास्ते को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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