Noida Voilence : 300 से अधिक उपद्रवी गिरफ्तार, नोएडा हिंसा के पीछे गहरी साजिश, व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए भड़काई गई भीड़,
नोएडा के फेज-2 और होजरी कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों में हुई 350 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और 150 से अधिक वाहनों को फूंकने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। पुलिस ने पूरे इलाके को जोन और सेक्टर में
- पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 7 अलग-अलग एफआईआर दर्ज, बाहरी तत्वों के संलिप्त होने के मिले पुख्ता सबूत
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हाई-लेवल कमेटी ने शुरू की जांच: 7 सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुपों के डिजिटल डेटा की हो रही पड़ताल
नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुई भीषण हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह कोई अचानक उपजा श्रमिक असंतोष नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश रची गई थी। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक 300 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें वीडियो फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चिन्हित किया गया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ बाहरी संगठनों और असामाजिक तत्वों ने वेतन वृद्धि की मांग की आड़ में औद्योगिक शांति को भंग करने का प्रयास किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई ऐसे भी हैं जिनका संबंधित फैक्ट्रियों से कोई सीधा लेना-देना नहीं था, जिससे इस घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश के संकेत मिलते हैं।
प्रशासन ने इस व्यापक उपद्रव को लेकर अब तक 7 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें लूटपाट, आगजनी, सरकारी कार्य में बाधा डालने और जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस की साइबर सेल और इंटेलिजेंस विंग ने जांच के दौरान 7 ऐसे व्हाट्सएप ग्रुपों की पहचान की है, जिनका उपयोग भीड़ को इकट्ठा करने और उन्हें हिंसा के लिए उकसाने के लिए किया गया था। इन ग्रुपों में भेजे गए संदेशों और कॉल रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट हो रहा है कि किस तरह से योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को निशाना बनाने के निर्देश दिए गए थे। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उन एडमिन्स और मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने पर्दे के पीछे से इस पूरी घटना की पटकथा लिखी थी। जांच में यह पाया गया है कि हिंसा शुरू होने से ठीक पहले इन व्हाट्सएप ग्रुपों पर भ्रामक सूचनाएं फैलाई गई थीं। श्रमिकों को यह विश्वास दिलाया गया कि अन्य राज्यों की तुलना में उनके साथ भारी अन्याय हो रहा है और केवल उग्र प्रदर्शन ही समाधान है। इन ग्रुपों में शामिल कई सदस्य ऐसे नंबरों का उपयोग कर रहे थे जो फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए थे, जो एक गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित 12 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी ने नोएडा पहुंचकर अपनी जांच तेज कर दी है। औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली यह समिति न केवल आर्थिक नुकसान का आकलन कर रही है, बल्कि उन कारणों की भी तह तक जा रही है जिसके कारण स्थिति इतनी बेकाबू हुई। समिति के सदस्यों ने विभिन्न फैक्ट्री मालिकों और श्रमिक प्रतिनिधियों से वार्ता शुरू की है। जांच का एक मुख्य पहलू यह भी है कि क्या इस हिंसा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश की निवेश-अनुकूल छवि को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुंचाना था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच की आंच उन सफेदपोश चेहरों तक भी जानी चाहिए जो सीधे तौर पर सड़कों पर नहीं थे लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को नियंत्रित कर रहे थे।
नोएडा के फेज-2 और होजरी कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों में हुई 350 से अधिक फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और 150 से अधिक वाहनों को फूंकने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। पुलिस ने पूरे इलाके को जोन और सेक्टर में बांटकर भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की है। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस ने उन लोगों की सूची तैयार की है जो घटना के बाद से ही फरार हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्दोष श्रमिकों को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन कानून को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
साजिश के इस पहलू ने औद्योगिक जगत में भी चिंता पैदा कर दी है। उद्यमियों का मानना है कि यदि इस तरह की घटनाओं को समय रहते सख्ती से नहीं कुचला गया, तो भविष्य में औद्योगिक उत्पादन और रोजगार पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने अब औद्योगिक क्षेत्रों में एक स्थायी इंटेलिजेंस यूनिट स्थापित करने पर विचार करना शुरू कर दिया है जो सीधे शासन को रिपोर्ट करेगी। इससे किसी भी प्रकार के असंतोष या साजिश की सूचना समय रहते प्राप्त हो सकेगी। वर्तमान में, गिरफ्तार किए गए 300 लोगों से पूछताछ जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस साजिश के मुख्य सूत्रधारों के नामों का खुलासा होगा।
श्रमिकों की वास्तविक मांगों को लेकर भी सरकार गंभीर है और हाई-लेवल कमेटी जल्द ही न्यूनतम वेतनमान और अन्य सुविधाओं पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। हालांकि, हिंसा और तोड़फोड़ ने वास्तविक मुद्दों को पीछे धकेल दिया है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि औद्योगिक इकाइयां जल्द से जल्द दोबारा शुरू हों और वहां काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित न हो। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है और वहां काम करने वाले श्रमिकों की काउंसलिंग भी की जा रही है ताकि उनके मन से डर और भ्रम को निकाला जा सके।
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