बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू- मतदाता सूची विवाद पर विपक्ष का सरकार पर हमला, हंगामेदार सत्र की संभावना। 

Monsoon session of Bihar Assembly: बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र आज शुरू हो रहा है, जो 25 जुलाई तक चलेगा। यह सत्र 17वीं विधानसभा का अंतिम सत्र है और आगामी...

Jul 21, 2025 - 10:56
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बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू- मतदाता सूची विवाद पर विपक्ष का सरकार पर हमला, हंगामेदार सत्र की संभावना। 
बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू

बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र आज शुरू हो रहा है, जो 25 जुलाई तक चलेगा। यह सत्र 17वीं विधानसभा का अंतिम सत्र है और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले होने के कारण इसका काफी हंगामेदार रहना तय माना जा रहा है। विपक्ष, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर होने की रणनीति बना रहा है। यह सत्र न केवल बिहार की सियासत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आगामी चुनावों के लिए भी माहौल तैयार करेगा।

बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई 2025 तक चलेगा। यह सत्र नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी सत्र है, क्योंकि बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद अक्टूबर या नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। चूंकि यह सत्र चुनाव से ठीक पहले हो रहा है, इसलिए यह सियासी दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक 2025 और गिग वर्करों (जैसे स्वीगी, जोमैटो के कर्मचारी) के हितों की रक्षा के लिए विशेष विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार 50 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट भी पेश करेगी, जिस पर 24 जुलाई को चर्चा होगी।

हालांकि, इस सत्र का मुख्य फोकस मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर होने वाला है, जिसे लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया गरीब, दलित और प्रवासी मजदूरों के मतदान के अधिकार को छीनने की साजिश है। इस मुद्दे पर सत्र में तीखी बहस और हंगामे की संभावना है।

  • मतदाता सूची विवाद: विपक्ष का मुख्य हथियार

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का निर्देश दिया था। यह प्रक्रिया 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक चल रही है। इसके तहत मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। आयोग के अनुसार, बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 5.22 करोड़ से अधिक ने 10 जुलाई तक गणना फॉर्म जमा कर दिए हैं, जो 66% से अधिक है। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रक्रिया को “अलोकतांत्रिक” और “लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश” करार दिया है।

विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने X पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचन आयोग को बिहार की पूरी मतदाता सूची निरस्त कर केवल 25 दिनों में 1987 से पहले के कागजी सबूतों के साथ नई सूची बनाने का निर्देश दिया है। यह गरीब और दलित वोटरों को मतदान से वंचित करने की साजिश है।” समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस प्रक्रिया का विरोध किया है। संजय सिंह ने दावा किया, “अगर एसआईआर पर रोक नहीं लगी, तो बीजेपी चुनाव से पहले ही बिहार जीत चुकी है।”

विपक्ष का कहना है कि बिहार जैसे बड़े और कम कनेक्टिविटी वाले राज्य में इतने कम समय में मतदाता सूची का पुनरीक्षण निष्पक्ष तरीके से संभव नहीं है। कई विशेषज्ञों ने भी इस प्रक्रिया की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। समाजशास्त्री पुष्पेंद्र ने बीबीसी से कहा, “यह बिहार की एक बड़ी आबादी की राजनीतिक नागरिकता पर संकट है। सरकार एक तरह से एनआरसी को बैकडोर से लागू करने की कोशिश कर रही है।” विपक्ष का यह भी आरोप है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी मतदाता सूची का उपयोग हुआ था, तो अब इसे बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को प्रक्रिया रोकने का आदेश नहीं दिया, लेकिन आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को दस्तावेजों की सूची में शामिल करने का सुझाव दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इन दस्तावेजों को अस्वीकार किया जाता है, तो इसके कारण स्पष्ट किए जाएं। अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है, और तब तक आयोग को जवाबी हलफनामा दाखिल करना है।

विपक्ष का कहना है कि एसआईआर के तहत 35.5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, और यह आंकड़ा 70 लाख तक पहुंच सकता है। उनका दावा है कि इससे गरीब, दलित और प्रवासी मजदूरों का वोटिंग अधिकार प्रभावित होगा, जो महागठबंधन का प्रमुख वोट बैंक हैं। दूसरी ओर, जेडीयू और बीजेपी का कहना है कि यह कटौती मृत और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए जरूरी थी, और इससे उनकी संगठनात्मक ताकत पर कम असर पड़ेगा।

मतदाता सूची विवाद के अलावा, विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराध को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। हाल ही में पटना के पारस अस्पताल में पांच शूटरों द्वारा एक मरीज की हत्या की घटना ने “जंगलराज” की बहस को फिर से हवा दी है। तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया और कहा, “बिहार में अपराध चरम पर है, और सरकार इसे नियंत्रित करने में नाकाम रही है।” इसके अलावा, विपक्ष मणिपुर हिंसा, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को भी सत्र में उठाने की योजना बना रहा है।

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विपक्ष के हमलों का जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। सरकार का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी और कानूनी तरीके से हो रहा है, और इसका उद्देश्य फर्जी वोटों को रोकना है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, “जिन्हें फर्जी वोटों पर भरोसा है, वे ही इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।”

सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी, जिनमें प्रमंडल स्तर पर अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना, शहरी क्षेत्रों में विशेष भूमि सर्वेक्षण और कृषि भूमि के अन्य उपयोग के नियमों को स्पष्ट करने वाले विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने पिछले साल नगर निकायों के अधिकारों में कटौती को लेकर हुए विरोध को देखते हुए संशोधन विधेयक लाने की योजना बनाई है, जिसके जरिए चार धाराओं में बदलाव कर अधिकार बहाल किए जाएंगे।

पांच दिनों तक चलने वाला यह सत्र हंगामेदार होने की पूरी संभावना है। विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव लाने की तैयारी की है, जिससे सत्र की कार्यवाही बाधित हो सकती है। तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में एक रैली में एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिससे साफ है कि विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगा। दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने की रणनीति तैयार की है। बिहार के मंत्री महेश्वर हजारी ने कहा, “प्रजातंत्र में सदन लोगों का मंदिर है। हम विपक्ष के हर सवाल का जवाब देंगे।”

यह सत्र न केवल बिहार की सियासत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी माहौल तैयार करेगा। विपक्ष का मानना है कि मतदाता सूची विवाद को उठाकर वह अपने वोट बैंक को एकजुट कर सकता है, खासकर गरीब और दलित समुदायों को। दूसरी ओर, एनडीए सरकार इस सत्र को अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने लाने के अवसर के रूप में देख रही है। नीतीश कुमार ने हाल ही में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होगी। सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर सकती है।

बिहार विधानसभा का मॉनसून सत्र 2025 न केवल नीतीश कुमार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह विपक्ष के लिए भी अपनी ताकत दिखाने का मौका है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण विवाद इस सत्र का मुख्य मुद्दा रहेगा, जिस पर विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था और अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी तीखी बहस होने की संभावना है। यह सत्र बिहार की सियासत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए माहौल तैयार करेगा। सत्र की कार्यवाही और उसका परिणाम न केवल बिहार की जनता, बल्कि पूरे देश की नजरों में रहेगा।

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