मराठी-हिंदी विवाद: राज ठाकरे का निशिकांत दुबे को जवाब, 'मुंबई आओ, समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे'

Political News: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के मीरा-भायंदर में एक सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे .....

Jul 19, 2025 - 13:17
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मराठी-हिंदी विवाद: राज ठाकरे का निशिकांत दुबे को जवाब, 'मुंबई आओ, समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे'
मराठी-हिंदी विवाद: राज ठाकरे का निशिकांत दुबे को जवाब, 'मुंबई आओ, समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे'

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के मीरा-भायंदर में एक सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के एक विवादास्पद बयान का तीखा जवाब दिया। दुबे ने कहा था कि मराठी लोगों को "पटक-पटक कर मारेंगे," जिसके जवाब में ठाकरे ने कहा, "तू हमें मारेगा दुबे? तू मुंबई आ जा, मुंबई के समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे।" यह बयान महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी भाषा विवाद के बीच आया, जो हाल के दिनों में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ कथित हिंसा और मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर गरमाया हुआ है। ठाकरे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता की रक्षा की बात दोहराई, साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने के प्रयासों के लिए चेतावनी दी।

महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पहली से पांचवीं कक्षा तक मराठी और अंग्रेजी के साथ हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा। इस नीति का मनसे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सहित कई संगठनों ने कड़ा विरोध किया। विरोध के बाद सरकार ने इस आदेश को वापस ले लिया, लेकिन इसने मराठी अस्मिता और हिंदी के कथित "थोपने" को लेकर बहस छेड़ दी।

इस बीच, मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में हिंदी भाषी दुकानदारों के साथ मारपीट की कुछ घटनाएं सामने आईं। मीरा रोड पर एक दुकानदार को कथित तौर पर मराठी में बात न करने के लिए पीटा गया। इस घटना के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 7 जुलाई 2025 को एक बयान में कहा, "हिम्मत है तो महाराष्ट्र से बाहर निकलो, बिहार-यूपी आओ, तुम्हें पटक-पटक कर मारेंगे।" उन्होंने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर सस्ती लोकप्रियता के लिए हिंदी भाषियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

  • राज ठाकरे का पलटवार

18 जुलाई 2025 को मीरा-भायंदर में मनसे की सभा में राज ठाकरे ने दुबे के बयान का जवाब देते हुए कहा, "एक बीजेपी सांसद कहता है कि मराठी लोगों को पटक-पटक कर मारेंगे। मैं दुबे को कहता हूं, तू मुंबई आ जा, मुंबई के समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे।" ठाकरे ने इस बयान को हिंदी में कहा, जिस पर बाद में दुबे ने तंज कसते हुए X पर लिखा, "मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी?"

ठाकरे ने सभा में मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता पर जोर देते हुए कहा कि वे मराठी मानुष और मराठी भाषा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोग जल्द से जल्द मराठी सीखें और हर जगह मराठी में ही बात करें। ठाकरे ने मीरा रोड की घटना का समर्थन करते हुए कहा, "जो हुआ, वह सही हुआ। पानी खरीदने के बाद भी वह हिंदी में बात कर रहा था। उसे महाराष्ट्र स्टाइल में जवाब दिया गया।"

  • हिंदी बनाम मराठी विवाद

महाराष्ट्र में मराठी भाषा और अस्मिता का मुद्दा दशकों पुराना है। मनसे और शिवसेना जैसे संगठन लंबे समय से मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा की वकालत करते रहे हैं। ठाकरे ने सभा में दावा किया कि मराठी का इतिहास 2,500-3,000 साल पुराना है, जबकि हिंदी केवल 200 साल पुरानी भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने देश की 250 से अधिक भाषाओं को "खा लिया" और यह किसी की मातृभाषा नहीं है।

ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ गुजराती व्यापारी और नेता मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने 1950 के दशक में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने मुंबई को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाए रखने की बात कही थी, लेकिन कुछ लोग आज भी इसे गुजरात में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना

ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फडणवीस हिंदी को अनिवार्य करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सभी स्कूलों में मराठी को अनिवार्य करना चाहिए। ठाकरे ने चेतावनी दी, "अगर कक्षा एक से पांच तक हिंदी अनिवार्य की गई, तो हम स्कूल बंद करा देंगे।" उन्होंने 2018 की एक घटना का जिक्र किया, जब मनसे ने हिंदी थोपने के खिलाफ दुकानें बंद कराई थीं।

फडणवीस ने जवाब में कहा कि सरकार त्रिभाषा नीति लागू करेगी, लेकिन हिंदी को कक्षा एक से लागू करना है या कक्षा पांच से, इसका फैसला एक समिति करेगी। हालांकि, ठाकरे ने इसे महाराष्ट्र की अस्मिता पर हमला बताया और लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

  • निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया

निशिकांत दुबे, जो झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद हैं, ने ठाकरे के बयान पर हल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने ठाकरे के हिंदी में दिए बयान पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने ठाकरे को हिंदी सिखा दी। दुबे ने यह भी कहा कि मुंबई केवल मराठियों की नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की आर्थिक राजधानी है, जिसमें हिंदी भाषी लोगों का भी योगदान है। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एलआईसी जैसे संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके मुख्यालय मुंबई में हैं, और इनमें पूरे देश के लोगों का पैसा है।

दुबे ने यह भी कहा कि हिंदी भाषी मजदूर और गरीब लोग, जो मुंबई में रोजगार के लिए आते हैं, महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। उन्होंने ठाकरे पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का आरोप लगाया और कहा कि अगर मनसे हिंदी भाषियों को निशाना बनाएगी, तो उन्हें अन्य भाषा बोलने वालों, जैसे उर्दू या तमिल भाषियों, को भी निशाना बनाना चाहिए।

इस विवाद ने महाराष्ट्र में भाषा की राजनीति को और गरमा दिया है। सोशल मीडिया, खासकर X पर, लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने ठाकरे के बयान का समर्थन किया और इसे मराठी अस्मिता की रक्षा बताया, जबकि अन्य ने इसे हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाला करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "राज ठाकरे का बयान मराठी गौरव के लिए है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता।"

विपक्षी नेताओं ने भी इस विवाद पर टिप्पणी की। शिवसेना (यूबीटी) की नेत्री शाइना एनसी ने कहा कि ठाकरे हमेशा विवादास्पद बयान देते हैं, लेकिन जनता वोटों से जवाब देगी। वहीं, कुछ हिंदी भाषी नेताओं, जैसे पप्पू यादव, ने भी इस मुद्दे पर ठाकरे की आलोचना की।

  • मराठी अस्मिता और हिंदी का सवाल

ठाकरे ने अपने भाषण में कहा कि वे सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन हिंदी को जबरन थोपने का विरोध करेंगे। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोग अपनी मातृभाषा, जैसे भोजपुरी या मैथिली, बोलते हैं, और हनुमान चालीसा भी अवधी में है, हिंदी में नहीं। यह बयान हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में देखने की धारणा पर सवाल उठाता है।

हालांकि, ठाकरे का हिंदी में बयान देना और फिर उस पर दुबे का तंज कसना इस विवाद को और रोचक बनाता है। यह दिखाता है कि भाषा का मुद्दा न केवल भावनात्मक है, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है।

मराठी बनाम हिंदी विवाद और राज ठाकरे-निशिकांत दुबे के बीच की तीखी बयानबाजी ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। ठाकरे का "मुंबई के समंदर में डुबो-डुबोकर मारेंगे" और दुबे का "पटक-पटक कर मारेंगे" जैसे बयान न केवल व्यक्तिगत हमले हैं, बल्कि भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता की गहरी राजनीति को दर्शाते हैं। यह विवाद महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता, हिंदी के कथित थोपने, और मुंबई की सांस्कृतिक-आर्थिक पहचान को लेकर सवाल उठाता है।

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