मैनचेस्टर टेस्ट में ऋषभ पंत का जज्बा- चोट के बावजूद बल्लेबाजी की, अनिल कुंबले की याद दिलाई।
Cricket News: भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर 23 जुलाई 2025 से शुरू हुए चौथे टेस्ट मैच में भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज....
Cricket News: भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर 23 जुलाई 2025 से शुरू हुए चौथे टेस्ट मैच में भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने साहस से सभी का दिल जीत लिया। पहले दिन बल्लेबाजी के दौरान उनके दाहिने पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर होने के बावजूद उन्होंने दूसरे दिन मैदान पर उतरकर बल्लेबाजी की और 54 रन बनाए। इस जज्बे ने पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले की 2002 की उस घटना की याद दिला दी, जब उन्होंने टूटे जबड़े के साथ वेस्टइंडीज के खिलाफ गेंदबाजी की थी। मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन 68वें ओवर में ऋषभ पंत 48 गेंदों पर 37 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की एक यॉर्कर गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश में गेंद उनके दाहिने पैर के अंगूठे पर लगी। इससे उनके पैर में गंभीर चोट लगी और खून भी बहने लगा। दर्द के कारण वह चल नहीं पा रहे थे। मैदान पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गोल्फ कार्ट से अस्पताल ले जाया गया, जहां स्कैन में अंगूठे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने बताया कि पंत इस मैच में विकेटकीपिंग नहीं करेंगे, और उनकी जगह ध्रुव जुरेल ने यह जिम्मेदारी संभाली।
दूसरे दिन, जब भारतीय टीम की पहली पारी मुश्किल में थी, पंत ने दर्द को नजरअंदाज कर बल्लेबाजी करने का फैसला किया। वह लंगड़ाते हुए मैदान पर उतरे और ओल्ड ट्रैफर्ड के दर्शकों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया। पंत ने 75 गेंदों पर 54 रन बनाए, जिसमें सात चौके शामिल थे, और भारत को 358 रनों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। हालांकि, जोफ्रा आर्चर की गेंद पर वह आउट हो गए। पंत के इस साहस ने 2002 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एंटीगा टेस्ट की याद ताजा कर दी। उस मैच में अनिल कुंबले को बल्लेबाजी के दौरान मर्वन डिल्लन की गेंद से ठोड़ी पर चोट लगी थी, जिससे उनका जबड़ा टूट गया। डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी, लेकिन कुंबले ने हार नहीं मानी। उन्होंने चेहरे पर पट्टी बांधकर 14 ओवर गेंदबाजी की और वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा को आउट किया। वह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन कुंबले का जज्बा आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय है।
पंत का यह साहस भारतीय क्रिकेट इतिहास में साहसिक प्रदर्शनों की परंपरा को दर्शाता है। पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा, "पंत का यह जज्बा कम से कम 50 साल तक याद रखा जाएगा। यह वही साहस है, जो कुंबले ने 2002 में दिखाया था।" पंत ने इस सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें तीन टेस्ट मैचों की छह पारियों में 70.83 की औसत से 425 रन बनाए, जिसमें दो शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं। हालांकि, चोट की गंभीरता के कारण बीसीसीआई ने बताया कि पंत को छह सप्ताह तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ सकता है, जिसके चलते वह 31 जुलाई से शुरू होने वाले पांचवें टेस्ट में शायद न खेल पाएं।
भारतीय क्रिकेट में ऐसे कई मौके आए हैं, जब खिलाड़ियों ने चोट के बावजूद मैदान पर जज्बा दिखाया। 1989 में 16 साल के सचिन तेंदुलकर ने कराची टेस्ट में वकार यूनुस की बाउंसर से नाक पर चोट लगने के बावजूद बल्लेबाजी जारी रखी। 2011 में युवराज सिंह ने कैंसर के शुरुआती लक्षणों के बावजूद विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। 2021 में सिडनी टेस्ट में हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन ने चोटिल होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच ड्रॉ करवाया। ऋषभ पंत का मैनचेस्टर टेस्ट में चोट के बावजूद बल्लेबाजी करना भारतीय क्रिकेट के जज्बे का प्रतीक है। उनके इस साहस ने न केवल प्रशंसकों का दिल जीता, बल्कि अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों की याद भी ताजा कर दी। यह घटना दर्शाती है कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि हिम्मत और समर्पण का मंच है। प्रशंसक और विशेषज्ञ पंत के इस योगदान को लंबे समय तक याद रखेंगे।
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