रांची रेलवे स्टेशन पर देवदूत बनकर आईं आरपीएफ कांस्टेबल साविता गारी, चलती ट्रेन से गिरती महिला को मौत के मुंह से निकाला

इस पूरे बचाव अभियान को रेलवे के "ऑपरेशन जीवन रक्षा" के एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यह आरपीएफ द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है जिसका प्राथमिक उद्देश्य स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपात

May 11, 2026 - 11:06
977 Views
रांची रेलवे स्टेशन पर देवदूत बनकर आईं आरपीएफ कांस्टेबल साविता गारी, चलती ट्रेन से गिरती महिला को मौत के मुंह से निकाला
रांची रेलवे स्टेशन पर देवदूत बनकर आईं आरपीएफ कांस्टेबल साविता गारी, चलती ट्रेन से गिरती महिला को मौत के मुंह से निकाला

  • "ऑपरेशन जीवन रक्षा" के तहत महिला जवान की जांबाजी: रांची स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और पटरी के बीच फंसी यात्री को सुरक्षित बचाया
  • मुस्तैदी और साहस की मिसाल: आरपीएफ की महिला आरक्षक ने दिखाई बिजली जैसी फुर्ती, टल गया एक बड़ा ट्रेन हादसा

झारखंड की राजधानी स्थित रांची रेलवे स्टेशन पर हाल ही में मानवता और साहस का एक ऐसा उदाहरण देखने को मिला जिसने न केवल सुरक्षा बलों के गौरव को बढ़ाया है, बल्कि आम नागरिकों के मन में रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) के प्रति सम्मान को और गहरा कर दिया है। स्टेशन पर तैनात आरपीएफ की महिला कांस्टेबल साविता गारी ने अपनी ड्यूटी के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक महिला यात्री की जान उस समय बचाई, जब वह चलती ट्रेन में चढ़ने के प्रयास के दौरान अनियंत्रित होकर प्लेटफॉर्म और पटरी के बीच बने जानलेवा गैप में समाने ही वाली थी। रांची रेल मंडल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों का पालन करते हुए जवान पूरी तरह मुस्तैद थे, और इसी सतर्कता का परिणाम रहा कि एक परिवार की खुशियां उजड़ने से बच गईं।

घटना की शुरुआत तब हुई जब रांची स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म पर ट्रेन अपनी गति पकड़ चुकी थी। इसी दौरान एक महिला यात्री ने जल्दबाजी में चलती हुई ट्रेन के कोच में प्रवेश करने की कोशिश की। गति अधिक होने के कारण महिला का संतुलन बिगड़ गया और उसका पैर पायदान से फिसल गया। वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खाली जगह की ओर खिंचने लगी। वहां मौजूद अन्य यात्री इस दृश्य को देखकर सिहर उठे और शोर मचाने लगे, लेकिन जब तक कोई कुछ समझ पाता, वहां ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कांस्टेबल साविता गारी ने बिना एक पल गंवाए बिजली की तेजी से दौड़ लगाई। साविता ने अपनी जान की परवाह न करते हुए महिला यात्री को मजबूती से पकड़ लिया और उसे बाहर की ओर खींच लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से रुक गया।इस पूरे बचाव अभियान को रेलवे के "ऑपरेशन जीवन रक्षा" के एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यह आरपीएफ द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है जिसका प्राथमिक उद्देश्य स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपातकालीन स्थितियों में उनकी जान बचाना है। साविता गारी की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आरपीएफ के जवान केवल सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि यात्रियों के रक्षक के रूप में भी सदैव तत्पर रहते हैं। घटना के समय प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी का माहौल था, लेकिन साविता के धैर्य और पेशेवर प्रशिक्षण ने स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया और उन्होंने महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उसे प्राथमिक सांत्वना भी प्रदान की।

सतर्कता ही बचाव का आधार

रेलवे सुरक्षा बल द्वारा समय-समय पर यात्रियों को चलती ट्रेन में न चढ़ने की सलाह दी जाती है। रांची की यह घटना सिखाती है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी जानलेवा हो सकती है, लेकिन जवानों की सतर्कता ऐसे हादसों के बीच सुरक्षा कवच का काम करती है। महिला यात्री की जान बचाने के बाद रांची स्टेशन पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य यात्रियों ने साविता गारी के जज्बे को सलाम किया। लोग इस बात से बेहद प्रभावित थे कि कैसे एक महिला सुरक्षाकर्मी ने इतनी विकट परिस्थिति में अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार के नेतृत्व में रांची रेल मंडल में सुरक्षा कर्मियों को विशेष रूप से ऐसे संकटकालीन समय के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

पवन कुमार ने स्वयं इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट ली और कांस्टेबल साविता के कार्य की प्रशंसा की। उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं है, बल्कि हर उस यात्री की सुरक्षा करना है जो रेल परिसर में कदम रखता है। बचाई गई महिला यात्री घटना के बाद काफी डरी और सहमी हुई थी। साविता गारी ने न केवल उसे मौत के चंगुल से निकाला, बल्कि उसे पानी पिलाकर और ढांढस बंधाकर सामान्य स्थिति में लाने में मदद की। महिला ने अपनी जान बचाने के लिए साविता का बार-बार आभार व्यक्त किया। रेलवे प्रशासन ने इस घटना के वीडियो फुटेज और साक्ष्यों का अवलोकन किया है, जिसमें साविता की बहादुरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। यह मामला अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसे रेलवे सुरक्षा बल के स्थापना उद्देश्यों की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है। आरपीएफ की इस जांबाज महिला सिपाही ने साबित कर दिया है कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और वीर हृदय धड़कता है। रांची मंडल में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के तहत सभी संवेदनशील बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरों और जवानों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। इस घटना के बाद स्टेशन पर सुरक्षा ब्रीफिंग में भी इस सफल बचाव कार्य का उल्लेख किया गया ताकि अन्य जवानों को भी इससे प्रेरणा मिल सके। साविता गारी जैसे कर्मठ सिपाही विभाग के लिए एक संपत्ति की तरह हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोते। मंडल सुरक्षा आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया है कि प्लेटफॉर्म पर गश्त बढ़ाना और यात्रियों के साथ संवाद करना ऐसी दुर्घटनाओं को कम करने में सहायक होता है। साविता की इस उपलब्धि ने रांची रेल मंडल का नाम पूरे देश के रेल सुरक्षा नेटवर्क में ऊंचा किया है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow