Sawan 2025 Hardoi Special- सावन में हरदोई के शिव मंदिरों में उमड़ता है भक्तों का सैलाब, दिन में 3 बार रंग बदलता है शिवलिंग, हर युग से जुडी हैं इनकी आध्यात्मिक कथाएं

Kanwar Yatra 2025 : सावन में हरदोई के शिव मंदिर "हर हर महादेव" और "बम बम भोले" के जयकारों से गूंज उठते हैं। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, और शिव चालीसा का पाठ करते हैं। पिहानी के गाय

By INA News Desk
Jul 11, 2025 - 23:51
105 Views
Sawan 2025 Hardoi Special- सावन में हरदोई के शिव मंदिरों में उमड़ता है भक्तों का सैलाब, दिन में 3 बार रंग बदलता है शिवलिंग, हर युग से जुडी हैं इनकी आध्यात्मिक कथाएं
Sawan 2025 : संकटहरण सकाहा शिव मंदिर, बावन

उत्तर प्रदेश का हरदोई जिला अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ भगवान शिव के पौराणिक मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। सावन का पवित्र महीना आते ही ये मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बन जाते हैं। इस दौरान हरदोई के शिव मंदिरों में जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा की विशेष मान्यता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में इन मंदिरों का गहरा महत्व है, और इनके पीछे की कथाएं भक्तों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ती हैं। इस खबर में हम हरदोई के प्रमुख शिव मंदिरों के साथ-साथ पिहानी कस्बे में स्थित गायत्री मंदिर के प्राचीन शिव मंदिर की जानकारी, उनकी पौराणिक कथाएं, प्रसिद्ध चीजें, और सावन की मान्यताओं पर प्रकाश डालेंगे।

हरदोई के प्रमुख पौराणिक शिव मंदिर

1. संकटहरण सकाहा शिव मंदिर, बावन

स्थान: हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर, बावन ब्लॉक के सकाहा गांव में।

पौराणिक महत्व और हिंदू शास्त्रों से संबंध: यह मंदिर अपने चमत्कारी शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह दिन में तीन बार रंग बदलता है।हिंदू शास्त्रों में भगवान शिव को संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है, और स्कंद पुराण के अनुसार, सावन मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस मंदिर का शिवलिंग प्राचीन माना जाता है, जिसका इतिहास अज्ञात है।कथा: स्थानीय कथा के अनुसार, लगभग 70 वर्ष पहले बावन के सेठ लाला हीरालाल के बेटे को फांसी की सजा सुनाई गई थी। सेठ ने इस मंदिर में भगवान शिव से प्रार्थना की, और अगले दिन उनके बेटे की सजा माफ हो गई। इसके बाद सेठ ने मंदिर का निर्माण करवाया।

प्रसिद्ध चीजें: शिवलिंग का रंग बदलने का चमत्कार और सावन में कांवड़ियों की भीड़ इस मंदिर की खासियत है। भक्त बेलपत्र, धतूरा, और गंगाजल चढ़ाते हैं।

2. बूढ़े बाबा मंदिर, हरदोई शहर

स्थान: हरदोई शहर में प्रहलाद घाट के पास।

पौराणिक महत्व और हिंदू शास्त्रों से संबंध: 1949 में स्थापित यह मंदिर भगवान शिव सहित कई देवताओं की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के पास एक प्राचीन पीपल का पेड़ है, जो इसे और पवित्र बनाता है। शिव पुराण में पीपल को शिव और विष्णु से जोड़ा गया है। यह मंदिर हरदोई के ऐतिहासिक नाम "हरिद्रोही" (हिरण्यकश्यप की नगरी) से भी जुड़ा है, जो भक्त प्रह्लाद और भगवान विष्णु की कथा को दर्शाता है।कथा: हरदोई का नाम हिरण्यकश्यप से जुड़ा है, जो भगवान का विरोधी था। उनके पुत्र प्रह्लाद की भक्ति के कारण भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। इस क्षेत्र में शिव और विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।

प्रसिद्ध चीजें: मंदिर में शिवलिंग, अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां, और सावन में रुद्राभिषेक की विशेष पूजा भक्तों को आकर्षित करती है।

3. हत्या हरण तीर्थ, संडीला

स्थान: संडीला तहसील में नैमिषारण्य परिक्रमा क्षेत्र में।

पौराणिक महत्व और हिंदू शास्त्रों से संबंध: इस मंदिर का संबंध भगवान राम और शिव से है। मान्यता है कि रावण वध के बाद ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान राम ने यहां सरोवर में स्नान किया और शिवलिंग की पूजा की। शिव पुराण में भगवान शिव को पापमोचन के रूप में वर्णित किया गया है।कथा: त्रेतायुग में भगवान राम ने रावण वध के बाद इस तीर्थ में स्नान कर शिव की आराधना की थी। 1939 में इस तीर्थ का जीर्णोद्वार हुआ।

प्रसिद्ध चीजें: मंदिर के पास का पवित्र सरोवर और शिवलिंग। सावन में भक्त गंगाजल चढ़ाने और स्नान करने आते हैं।

4. गायत्री मंदिर में शिव मंदिर, पिहानी

स्थान: हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में गायत्री मंदिर परिसर में।

पौराणिक महत्व और हिंदू शास्त्रों से संबंध: पिहानी के गायत्री मंदिर में स्थापित प्राचीन शिव मंदिर भगवान शिव और माता गायत्री की संयुक्त पूजा के लिए प्रसिद्ध है। हिंदू शास्त्रों में गायत्री मंत्र को वेदों का सार माना जाता है, और शिव पुराण में शिव को सभी मंत्रों का स्वामी कहा गया है। इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा सावन में विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और भक्तों की आस्था का केंद्र है।कथा: गायत्री मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्थानीय लोग इसे प्राचीन और चमत्कारी मानते हैं। यह सैकड़ों वर्षों पहले से यहाँ स्थापित है, यहां भक्त एक ही स्थान पर वेदमाता गायत्री और भगवान शिव की पूजा कर सकें। सावन में इस मंदिर में जलाभिषेक और गायत्री मंत्र जाप का विशेष आयोजन होता है।

प्रसिद्ध चीजें: गायत्री मंदिर में शिवलिंग के साथ-साथ माता गायत्री की मूर्ति और हवन कुंड इस स्थान की विशेषता हैं। सावन में भक्त यहां गंगाजल, बेलपत्र, और धतूरा चढ़ाते हैं। मंदिर में गायत्री मंत्र के जाप के साथ शिव पूजा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

5. धोबिया आश्रम शिव मंदिर, पिहानी

स्थान: पिहानी कस्बे से लगभग 10 किलोमीटर दूर जंगल में।

पौराणिक महत्व और हिंदू शास्त्रों से संबंध: इस मंदिर में एक अनूठा शिवलिंग स्थापित है, जिसमें से निरंतर जलधारा निकलती है। यह मंदिर द्वापर युग में ऋषि धौम्य की तपस्थली से जुड़ा है। शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग से जलधारा का निकलना भगवान शिव का चमत्कार माना जाता है।कथा: मान्यता है कि यह स्थान ऋषि धौम्य की तपस्थली रहा है। कुछ भक्त इसे शिव का चमत्कार मानते हैं, जबकि अन्य इसे प्राचीन वास्तुकला का कमाल बताते हैं।

प्रसिद्ध चीजें: शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा और प्राकृतिक वातावरण। सावन में भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं।

हिंदू धर्म में सावन मास भगवान शिव को समर्पित है। स्कंद पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने सावन में कठिन तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इस महीने में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, और धतूरा चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन 2025 के चार सोमवार (14, 21, 28 जुलाई और 4 अगस्त) विशेष महत्व रखते हैं। भक्त व्रत रखते हैं और रुद्राभिषेक करते हैं।

सावन में कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों का प्रमुख अनुष्ठान है। भक्त गंगा नदी से जल लेकर कांवड़ में भरते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। हरदोई के संकटहरण मंदिर और पिहानी के धोबिया आश्रम में कांवड़ियों की भीड़ उमड़ती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम, भगवान राम, या श्रवण कुमार से हुई। कुछ कथाएं इसे रावण और समुद्र मंथन से भी जोड़ती हैं। डाक कांवड़, जिसमें भक्त बिना रुके जल लेकर मंदिर तक पहुंचते हैं, सबसे पुण्यकारी मानी जाती है।

सावन में हरदोई के शिव मंदिर "हर हर महादेव" और "बम बम भोले" के जयकारों से गूंज उठते हैं। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, और शिव चालीसा का पाठ करते हैं। पिहानी के गायत्री मंदिर में शिव पूजा और गायत्री मंत्र जाप का अनूठा संगम देखने को मिलता है। बाजारों में गेरुआ वस्त्र, त्रिशूल, रुद्राक्ष, और बेलपत्र की बिक्री बढ़ जाती है। महिलाएं सावन सोमवार और हरियाली तीज के लिए हरे रंग की साड़ियां और चूड़ियां खरीदती हैं।

हरदोई के संकटहरण सकाहा मंदिर, बूढ़े बाबा मंदिर, हत्या हरण तीर्थ, धोबिया आश्रम, और पिहानी के गायत्री मंदिर में स्थित शिव मंदिर सावन में भक्तों के लिए आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। खासकर पिहानी का गायत्री मंदिर, जहां शिव और गायत्री की संयुक्त पूजा होती है, भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। ये मंदिर न केवल धार्मिक, बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी रखते हैं। सावन में इन मंदिरों में जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा से भक्तों को सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यदि आप भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो हरदोई के इन पवित्र मंदिरों में सावन के दौरान दर्शन अवश्य करें।

Also Click : Lucknow : विश्व युवा कौशल दिवस पर 14 जुलाई को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में होगा वृहद रोजगार मेला

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow