अहमदाबाद में सीरियाई नागरिक अली मेघात अल-अजहर गिरफ्तार, शरीर पर मिले गोलियों के निशान, तीन साथी फरार, पुलिस ने होटल और मस्जिदों की जांच शुरू की। 

Ahmedabad: गुजरात के अहमदाबाद में क्राइम ब्रांच ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए 23 अगस्त 2025 को एक सीरियाई नागरिक अली मेघात अल-अजहर को गिरफ्तार किया। यह शख्स अपने साथियों

Aug 25, 2025 - 12:10
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अहमदाबाद में सीरियाई नागरिक अली मेघात अल-अजहर गिरफ्तार, शरीर पर मिले गोलियों के निशान, तीन साथी फरार, पुलिस ने होटल और मस्जिदों की जांच शुरू की। 
अहमदाबाद में सीरियाई नागरिक अली मेघात अल-अजहर गिरफ्तार, शरीर पर मिले गोलियों के निशान, तीन साथी फरार, पुलिस ने होटल और मस्जिदों की जांच शुरू की। 

गुजरात के अहमदाबाद में क्राइम ब्रांच ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए 23 अगस्त 2025 को एक सीरियाई नागरिक अली मेघात अल-अजहर को गिरफ्तार किया। यह शख्स अपने साथियों के साथ मिलकर गाजा युद्ध के पीड़ितों के नाम पर मस्जिदों से चंदा इकट्ठा कर रहा था। जांच में सामने आया कि वह इस पैसे का इस्तेमाल जरूरतमंदों की मदद के लिए नहीं, बल्कि अपनी विलासितापूर्ण जिंदगी जीने के लिए कर रहा था। अली को अहमदाबाद के एलिसब्रिज इलाके में स्थित रीगल रेजिडेंसी होटल से गिरफ्तार किया गया। उसके तीन साथी जकारिया हैथम अल्जर, अहमद अलहबश और यूसुफ अल-जहर पुलिस कार्रवाई के बाद फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है, जिसमें होटल और मस्जिदों की तलाशी ली जा रही है।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि एक गिरोह शहर की मस्जिदों में जाकर खुद को गाजा युद्ध का पीड़ित बताकर लोगों से चंदा मांग रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की और अली मेघात अल-अजहर को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह सीरिया के दमिश्क का निवासी है और 22 जुलाई 2025 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था। वह अपने पांच साथियों के साथ पहले कोलकाता पहुंचा और फिर 1 अगस्त को अहमदाबाद आया। गिरोह में कुल छह लोग शामिल थे, जिनमें से तीन फरार हैं और दो अन्य की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

पुलिस ने अली के पास से 3,600 अमेरिकी डॉलर और 25,000 रुपये नकद बरामद किए। उसके मोबाइल फोन में गाजा युद्ध से संबंधित वीडियो मिले, जिनमें भूखमरी और अत्याचार की तस्वीरें थीं। वह इन वीडियो को मस्जिदों में नमाज के लिए आए लोगों को दिखाकर उनकी भावनाओं का फायदा उठाता था। वह खुद को गाजा का निवासी बताता और दावा करता कि उसका परिवार युद्ध में प्रभावित हुआ है। लोगों की सहानुभूति हासिल करने के लिए वह अपने सीने पर मौजूद चोट के निशानों को गाजा संघर्ष में लगी चोटें बताता था। हालांकि, पुलिस इन निशानों की जांच कर रही है, क्योंकि इनके युद्ध से संबंधित होने पर संदेह है।

जांच में पता चला कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वे मस्जिदों में जाकर लोगों को गाजा के पीड़ितों की दुखभरी कहानियां सुनाते और मानवीय सहायता के नाम पर मोटी रकम इकट्ठा करते। लेकिन यह पैसा कभी भी गाजा के पीड़ितों तक नहीं पहुंचता था। इसके बजाय, गिरोह के सदस्य इस पैसे से महंगे होटलों में ठहरते, ब्रांडेड कपड़े खरीदते और विलासितापूर्ण जीवन जीते थे। पुलिस को शक है कि यह गिरोह केवल धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि शहर में किसी अन्य मकसद से रेकी भी कर रहा था। इसकी जांच के लिए गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भी शामिल किया गया है।

क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर शरद सिंघल ने बताया कि अली और उसके साथी अरबी भाषा बोलकर लोगों का भरोसा जीतते थे। वे खुद को फिलिस्तीन का निवासी बताते और चंदे के लिए भावनात्मक अपील करते। लेकिन जांच में कोई सबूत नहीं मिला कि यह पैसा गाजा के लिए भेजा जा रहा था। अली के मोबाइल, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह भारत में किन-किन शहरों में गया और उसने कितनी रकम इकट्ठा की। पुलिस को शक है कि यह गिरोह देश के अन्य राज्यों में भी सक्रिय हो सकता है।

अली की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके तीन फरार साथियों की तलाश के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया है। साथ ही, होटल रीगल रेजिडेंसी के कमरा नंबर 201 की तलाशी ली गई, जहां से कुछ अहम दस्तावेज और सबूत बरामद हुए हैं। सीसीटीवी फुटेज में भी गिरोह के सदस्य सामान के साथ शहर में घूमते दिखाई दिए। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था और क्या इसके तार किसी आतंकी संगठन से जुड़े हैं। अली के पासपोर्ट की प्रामाणिकता की भी जांच की जा रही है, क्योंकि उसने पर्यटक वीजा का उल्लंघन करते हुए गैरकानूनी गतिविधियां कीं।

पुलिस ने अली पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), और विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा, पर्यटक वीजा नियमों का उल्लंघन करने के लिए भी कार्रवाई शुरू की गई है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने अली को ब्लैकलिस्ट करने और उसे भारत से डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं।

यह मामला गुजरात में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा अलर्ट है। गाजा युद्ध जैसे संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल करके लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले इस गिरोह ने समाज में विश्वास की कमी पैदा की है। मस्जिदों में चंदा देने वाले लोग इस उम्मीद में पैसा देते थे कि यह जरूरतमंदों तक पहुंचेगा, लेकिन इसका दुरुपयोग देखकर लोग स्तब्ध हैं। पुलिस ने स्थानीय समुदाय से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को चंदा देने से पहले उनकी विश्वसनीयता की जांच करें।

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