LPG सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी और उज्ज्वला योजना के कोटे में कटौती से देश का सियासी तापमान बढ़ा, संसद से सड़क तक तीखी बहस
देश के आम नागरिकों की रसोई के बजट और घरेलू ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और
- वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया तनाव के बीच रसोई गैस के दामों में उछाल, तीन महीनों में ₹89 तक महंगे हुए घरेलू गैस सिलेंडर
- पेट्रोलियम मंत्रालय ने समझाया राहत और सब्सिडी का पूरा गणित, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹1,600 के पार पहुँची एक सिलेंडर की वास्तविक लागत
देश के आम नागरिकों की रसोई के बजट और घरेलू ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक बहस छिड़ गई है। बुधवार, 10 जून 2026 को तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार घरेलू और कमर्शियल तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की कीमतें हालांकि स्थिर बनी रहीं, लेकिन पिछले दिनों हुए दामों में इजाफे और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में किए गए नीतिगत बदलावों ने देश की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। पिछले तीन महीनों के भीतर ही घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कुल मिलाकर ₹89 की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जिसने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है। इस मूल्य वृद्धि के समानांतर ही केंद्र सरकार द्वारा प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दी जाने वाली रियायती रिफिलों की संख्या को घटाने के फैसले ने इस पूरे मुद्दे को एक बड़े राजनीतिक गतिरोध में तब्दील कर दिया है। संसद के भीतर जहां विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमलावर है, वहीं सरकार की ओर से प्रशासनिक अधिकारी वैश्विक परिस्थितियों और वित्तीय संतुलन का हवाला देकर स्थिति को स्पष्ट करने में जुटे हैं।
इस पूरे विवाद की तात्कालिक शुरुआत जून के पहले सप्ताह में हुई जब तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम के LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर की ताजा बढ़ोतरी लागू कर दी। इस नई वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में एक मानक घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर अब ₹942 के स्तर पर पहुँच गई है। गौरतलब है कि यह पिछले तीन महीनों के भीतर आम जनता को लगने वाला दूसरा बड़ा झटका है, क्योंकि इससे पहले मार्च के महीने में भी घरेलू सिलेंडरों के दामों में ₹60 की एकमुश्त बढ़ोतरी की गई थी। इस प्रकार दोनों संशोधनों को मिलाकर देश के परिवारों को अब प्रति सिलेंडर ₹89 अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं, जहां 1 जून को ही दिल्ली में इसके दाम ₹42 बढ़ाकर ₹3,113.50 कर दिए गए, जिससे छोटे खाद्य व्यापारियों और रेस्तरां संचालकों की लागत भी काफी ऊपर चली गई है।
कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के बीच सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना, प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के नियमों में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव कर दिया है। नई नीति के तहत अब उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एक वर्ष में मिलने वाले रियायती यानी सब्सिडी वाले सिलेंडरों के कोटे को नौ से घटाकर केवल चार सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, अब इन लाभार्थियों को एक साल में केवल पहले चार रिफिल पर ही ₹300 प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) सब्सिडी मिलेगी, और इसके बाद के किसी भी अतिरिक्त सिलेंडर के लिए उन्हें बाजार की पूरी कीमत चुकानी होगी। इस कोटे में की गई भारी कटौती को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और आरोप लगाया है कि एक तरफ महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ गरीब परिवारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा को आधा किया जा रहा है। भारत अपनी कुल LPG आवश्यकताओं का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे घरेलू कीमतें सीधे तौर पर 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' और वैश्विक रसद लागत से जुड़ी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी हालिया संघर्षों के कारण समुद्र मार्ग से होने वाली आपूर्ति बाधित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप तेल कंपनियों की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।
इस बड़े आर्थिक और राजनीतिक विवाद के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने मीडिया के सामने आकर इस पूरी मूल्य वृद्धि और नीतिगत बदलाव के पीछे के मुख्य कारणों को विस्तार से प्रस्तुत किया है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने आंकड़ों का पूरा गणित समझाते हुए स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई भारी तेजी के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को अब भी दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहद सस्ती दरों पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया के संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय एक घरेलू LPG सिलेंडर की वास्तविक लागत और आपूर्ति खर्च बढ़कर ₹1,600 के पार पहुँच चुका है। इस वास्तविक लागत के मुकाबले देश के सामान्य नागरिकों को ₹942 में सिलेंडर दिया जा रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि सरकार और सरकारी तेल कंपनियां प्रति सिलेंडर करीब ₹658 से लेकर ₹700 तक का अप्रत्यक्ष घाटा खुद बर्दाश्त कर रही हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडरों के कोटे को नौ से घटाकर चार करने के पीछे के प्रशासनिक और व्यावहारिक तर्कों को भी सामने रखा है। सरकारी डेटा और उपभोग पैटर्न के गहन विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि उज्ज्वला योजना के अंतर्गत आने वाले गरीब परिवारों की औसत वार्षिक खपत वास्तव में चार से पांच सिलेंडर के बीच ही है। अधिकारी वर्ग का कहना है कि यह नीतिगत बदलाव जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर और सब्सिडी प्रणाली में होने वाली संभावित गड़बड़ियों तथा सिलेंडरों के अवैध कमर्शियल डायवर्जन (व्यावसायिक उपयोग के लिए अवैध बिक्री) को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कोटे को कम करने से उन वास्तविक गरीब परिवारों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा जो सालाना औसतन चार ही सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि उन्हें अभी भी शुरुआती चार रिफिलों पर ₹300 की अतिरिक्त छूट मिलती रहेगी, जिससे उन्हें एक सिलेंडर प्रभावी रूप से केवल ₹642 का पड़ेगा।
दूसरी ओर, इस मूल्य वृद्धि और कोटे में कटौती को लेकर देश के संसदीय पटल पर विपक्ष का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष समेत तमाम विपक्षी सांसदों ने इसे सरकार का जनविरोधी कदम बताते हुए कहा है कि इस फैसले से देश के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रहने वाले करोड़ों परिवार दोबारा से पारंपरिक और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक लकड़ी व कोयले के चूल्हों की तरफ लौटने पर मजबूर हो जाएंगे। विपक्ष का तर्क है कि प्रति सिलेंडर ₹29 की बढ़ोतरी को 'मामूली' बताना आम जनता की आर्थिक तंगहाली का मजाक उड़ाने जैसा है, क्योंकि एक आम परिवार के लिए रसोई गैस की कीमतों में ₹89 का संचयी इजाफा उनके मासिक बजट को पूरी तरह से असंतुलित कर देता है। संसद के चालू सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव देकर तत्काल चर्चा कराने और पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग को लेकर भारी हंगामा किया है।
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