वायरल होने का खौफनाक जुनून: बेंगलुरु में परिवार ने बुजुर्ग पिता को बोरी में भरकर कूरियर ऑफिस भेजा।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज की संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह
- मर्यादा और मानवता शर्मसार: रील बनाने के चक्कर में पिता को 'पार्सल' बनाकर मंगलुरु भेजने की कोशिश
- बेंगलुरु में सनसनीखेज वाकया: सोशल मीडिया के चक्कर में अपने ही खून को कूरियर करने निकला परिवार
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज की संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'वायरल' होने और चंद व्यूज व लाइक्स बटोरने की अंधी दौड़ में लोग किस हद तक गिर सकते हैं, यह इस मामले से साफ झलकता है। यहां एक महिला और उसके परिवार के सदस्यों ने अपने ही घर के बुजुर्ग पिता को एक बोरी में भरकर बंद कर दिया और उसे एक कूरियर सेवा केंद्र (कुरियर ऑफिस) ले पहुंचे। उनका कहना था कि वे इस बुजुर्ग को बेंगलुरु से मंगलुरु 'पार्सल' के रूप में भेजना चाहते हैं। इस अजीबोगरीब और विचलित करने वाली हरकत को देखकर वहां मौजूद लोग और कूरियर कंपनी के कर्मचारी दंग रह गए, जिसके बाद यह पूरा वाकया इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गया।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब परिवार ने सोशल मीडिया के लिए एक 'प्रैंक' या चौंकाने वाला वीडियो बनाने की योजना बनाई। डिजिटल दौर में कंटेंट क्रिएशन के नाम पर अक्सर लोग खतरनाक और अनैतिक कदम उठाते हैं, लेकिन एक बुजुर्ग पिता के साथ इस तरह का व्यवहार करना क्रूरता की पराकाष्ठा मानी जा रही है। वीडियो फुटेज और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिवार के सदस्यों ने बुजुर्ग को बोरी के अंदर बैठाया और उसे ऊपर से बांध दिया। इसके बाद वे उसे उठाकर कूरियर काउंटर तक ले गए और वहां तैनात कर्मचारियों से उसे दूसरे शहर भेजने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा। कर्मचारी यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि बोरी के भीतर कोई जीवित इंसान है या कोई भारी सामान।
जब कूरियर ऑफिस के कर्मचारियों ने सामान की जांच करने या उसे तौलने की कोशिश की, तो उन्हें बोरी के अंदर कुछ हलचल महसूस हुई। संदेह होने पर जब बोरी को खोला गया, तो उसमें से एक वृद्ध व्यक्ति को बाहर निकलते देख वहां अफरा-तफरी मच गई। बुजुर्ग की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे काफी असहज और डरे हुए थे। हैरानी की बात यह थी कि उनके परिवार के सदस्य इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर रहे थे। उन्हें बुजुर्ग की तकलीफ या इस कृत्य के कानूनी परिणामों की कोई चिंता नहीं थी; उनका पूरा ध्यान केवल इस बात पर था कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर कितनी सुर्खियां बटोरेगा। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि 'वायरल' होने की चाहत अब एक मानसिक विकार का रूप लेती जा रही है। लोग दूसरों का ध्यान खींचने के लिए अपनों की गरिमा और सुरक्षा को भी दांव पर लगा रहे हैं। बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यवहार न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक ढांचे पर भी प्रहार है जो बड़ों के सम्मान की नींव पर टिका है।
जैसे ही इस घटना की खबर आसपास के इलाके और इंटरनेट पर फैली, स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सतर्क हो गई। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि परिवार का मुख्य उद्देश्य केवल एक प्रैंक वीडियो बनाना था जो लोगों को हैरान कर दे। हालांकि, कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसकी सुरक्षा को खतरे में डालकर इस तरह का कृत्य करना अपहरण या उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है। भले ही परिवार इसे एक मजाक का नाम दे रहा हो, लेकिन एक बुजुर्ग को बोरी में बंद करना उनकी जान के लिए जोखिम भरा हो सकता था, खासकर यदि उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती या कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती।
बेंगलुरु जैसे महानगर में, जहां तकनीक और आधुनिकता का बोलबाला है, इस तरह की संवेदनहीनता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। लोग इस बात से भी हैरान हैं कि परिवार के अन्य सदस्यों, विशेषकर युवाओं ने भी इस विचार का समर्थन किया और इसे अंजाम देने में मदद की। यह घटना दर्शाती है कि स्क्रीन पर दिखने वाले 'लाइक्स' की भूख ने इंसान के विवेक को कितना सीमित कर दिया है। बुजुर्ग पिता को एक वस्तु की तरह ट्रीट करना और उन्हें सार्वजनिक रूप से उपहास का पात्र बनाना आधुनिक समाज के खोखलेपन की ओर इशारा करता है। फिलहाल अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इसमें बुजुर्ग की सहमति शामिल थी या उन्हें डरा-धमका कर ऐसा कराया गया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के प्रसारित होने के बाद कानूनी कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है। कई नागरिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को प्रतिबंधित करना चाहिए जो समाज में गलत संदेश फैलाते हैं। पुलिस विभाग ने भी चेतावनी दी है कि मनोरंजन के नाम पर किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना या सार्वजनिक शांति भंग करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिवार ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वे केवल मनोरंजन के लिए ऐसा कर रहे थे, लेकिन उनकी इस दलील ने लोगों के गुस्से को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया है।
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