शिक्षा के मंदिर में शर्मसार हुई इंसानियत: मात्र 100 रुपये के लिए दूसरी कक्षा के मासूम को बेरहमी से पीटा।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के एक निजी स्कूल से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ शिक्षा के मंदिर को कलंकित
- परीक्षा शुल्क न लाने की मिली खौफनाक सजा: शिक्षक की पिटाई से सहम गया 7 साल का छात्र
- गुरु-शिष्य परंपरा पर लगा गहरा दाग: आरोपी शिक्षक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज, शिक्षा विभाग ने बिठाई जांच
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के एक निजी स्कूल से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ शिक्षा के मंदिर को कलंकित करते हुए एक शिक्षक ने अपनी मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। मामला कक्षा दो में पढ़ने वाले एक 7 साल के मासूम छात्र से जुड़ा है, जिसे उसके शिक्षक ने केवल इसलिए बेरहमी से पीट दिया क्योंकि वह परीक्षा शुल्क के रूप में मांगे गए 100 रुपये घर से लाना भूल गया था। बच्चे की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति या शायद भूलवश वह समय पर पैसे जमा नहीं कर पाया था। शिक्षक के इस उग्र रूप ने न केवल बच्चे को शारीरिक रूप से चोटिल किया, बल्कि उसके कोमल मन पर भी गहरा आघात पहुँचाया है। इस घटना के बाद से स्कूल परिसर में तनाव का माहौल है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
घटना के विवरण के अनुसार, स्कूल में छमाही परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है, जिसके लिए प्रबंधन द्वारा प्रत्येक छात्र से मामूली परीक्षा शुल्क जमा करने का निर्देश दिया गया था। पीड़ित छात्र जब कक्षा में पहुँचा, तो शिक्षक ने फीस को लेकर पूछताछ शुरू की। जब मासूम ने बताया कि वह आज पैसे नहीं ला पाया है, तो शिक्षक का आपा खो गया। आरोप है कि शिक्षक ने बच्चे को अन्य छात्रों के सामने खड़ा कर पहले उसे भद्दी गालियां दीं और फिर थप्पड़ व डंडे से उसकी पिटाई शुरू कर दी। बच्चा दर्द से कराहता रहा और माफी मांगता रहा, लेकिन शिक्षक का दिल नहीं पसीजा। पिटाई के कारण बच्चे के शरीर पर नील के निशान पड़ गए और वह रोते हुए अपने घर पहुँचा, जहाँ उसने आपबीती अपने परिजनों को सुनाई।
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने बच्चे के शरीर पर चोट के निशान देखे और उसे गुमसुम पाया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्चा इतना डरा हुआ था कि वह दोबारा स्कूल जाने के नाम से ही कांपने लगा। पीड़ित के पिता ने तुरंत स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन वहां से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद, परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थानीय पुलिस स्टेशन का रुख किया। पुलिस ने बच्चे की मेडिकल जांच कराई, जिसमें पिटाई की पुष्टि हुई है। परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
- बाल संरक्षण और शिक्षा का अधिकार
भारत में 'शिक्षा का अधिकार' कानून और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड (Corporal Punishment) पूरी तरह से प्रतिबंधित है। किसी भी स्थिति में शिक्षक बच्चे को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना नहीं दे सकते। 100 रुपये जैसी मामूली राशि के लिए हिंसा का सहारा लेना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह शिक्षक के पेशेवर नैतिक मूल्यों का भी पूर्ण पतन है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने तत्काल प्रभाव से जांच टीम का गठन कर दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और किसी भी सूरत में दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। स्कूल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है कि आखिर ऐसी हिंसक प्रवृत्ति के शिक्षक को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति कैसे मिली। जांच टीम स्कूल के अन्य बच्चों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह शिक्षक पहले भी बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार करता रहा है। विभाग ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षक द्वारा की गई इस हरकत ने समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान और विश्वास को हिलाकर रख दिया है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बचपन में इस तरह की प्रताड़ना झेलने वाले बच्चों के व्यक्तित्व पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वे पढ़ाई से दूर भागने लगते हैं और उनमें हीन भावना या अत्यधिक क्रोध विकसित हो सकता है। इस मामले में भी, बच्चा अब घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे शिक्षकों को न केवल नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें उम्र भर के लिए किसी भी शिक्षण संस्थान में पढ़ाने से प्रतिबंधित कर देना चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा शिक्षक ऐसी जुर्रत न कर सके। पुलिस और शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बीच, क्षेत्र के अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कई अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए सुरक्षा मानकों और शिक्षकों के व्यवहार की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की मांग उठाई है। स्कूल प्रबंधन ने फिलहाल बचाव की मुद्रा अपनाते हुए आरोपी शिक्षक को निलंबित करने का दावा किया है, लेकिन परिजनों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, उन्हें कड़ी कानूनी सजा मिलनी चाहिए। पुलिस की एक टीम स्कूल रिकॉर्ड और उपस्थिति पंजिका की भी जांच कर रही है ताकि घटना के समय की परिस्थितियों का स्पष्ट विश्लेषण किया जा सके।
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