केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने को दी मंजूरी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार 24 फरवरी 2026 को केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें राज्य का आधिकारिक नाम अंग्रेजी

Feb 25, 2026 - 13:56
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने को दी मंजूरी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने को दी मंजूरी।
  • ममता बनर्जी ने केंद्र पर लगाया बंगाल के साथ भेदभाव का आरोप, 'बांग्ला' प्रस्ताव का जिक्र
  • केरल विधानसभा के प्रस्ताव पर तेजी से कार्रवाई, बंगाल का दो बार पास प्रस्ताव वर्षों से लंबित

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार 24 फरवरी 2026 को केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें राज्य का आधिकारिक नाम अंग्रेजी में 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की मांग की गई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जो केरल विधानसभा द्वारा जून 2024 में पारित प्रस्ताव पर आधारित था। विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से अपील की थी कि राज्य का नाम सभी भाषाओं में 'केरलम' किया जाए, जो मलयालम में इसका मूल उच्चारण है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की और कहा कि यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस मंजूरी का स्वागत किया और कहा कि यह लंबे समय से लंबित मांग थी, जो अब पूरी हो गई है। यह बदलाव संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में लागू होगा, और इससे सरकारी दस्तावेजों, बोर्डों और आधिकारिक संचार में नाम का एकरूपता आएगी। केरल सरकार ने इस प्रस्ताव को दो बार पास किया था, पहले 2023 में और फिर संशोधन के साथ 2024 में, ताकि केंद्र की आपत्तियों को दूर किया जा सके।

इस फैसले की घोषणा के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और बंगाल के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। ममता ने कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र ने केरल के नाम बदलने को तो मंजूरी दे दी, लेकिन बंगाल विधानसभा द्वारा दो बार पारित 'बांग्ला' नाम बदलने के प्रस्ताव को वर्षों से लंबित रखा है। उन्होंने इसे 'एंटी-बंगाली बायस' करार दिया और कहा कि यह राजनीतिक द्वेष का नतीजा है। ममता ने आरोप लगाया कि केरल में बीजेपी और सीपीआईएम के बीच 'राइटन एलायंस' है, जिसकी वजह से वहां का प्रस्ताव जल्दी पास हुआ, जबकि बंगाल में टीएमसी सरकार होने से केंद्र जानबूझकर देरी कर रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल विधानसभा ने 2018 में पहली बार और फिर संशोधन के साथ दूसरी बार प्रस्ताव पास किया था, लेकिन केंद्र ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया। ममता ने कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र से लड़ाई जारी रखेंगी और बंगाल की जनता को उनका हक दिलाकर रहेंगी। यह बयान विधानसभा चुनावों से पहले आया है, जो राजनीतिक माहौल को गर्मा सकता है।

बंगाल सरकार ने 2018 में राज्य का नाम बदलकर 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें नाम को तीन भाषाओं में बदलने की मांग थी - बंगाली में 'बांग्ला', अंग्रेजी में 'बंगाल' और हिंदी में 'बंगाली'। केंद्र ने इस पर आपत्ति जताई कि तीन नामों का प्रस्ताव अस्वीकार्य है, क्योंकि नाम बदलाव में एकरूपता होनी चाहिए। उसके बाद बंगाल सरकार ने 2021 में संशोधित प्रस्ताव पारित किया, लेकिन केंद्र ने अब तक मंजूरी नहीं दी। ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र के दोहरे मापदंड दिख रहे हैं, क्योंकि केरल के प्रस्ताव में भी भाषाई बदलाव था, लेकिन उसे जल्दी मंजूरी मिल गई। उन्होंने कहा कि बंगाल का नाम बदलाव सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, क्योंकि 'बांग्ला' बंगाली भाषा और संस्कृति का प्रतीक है। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार बंगाल को हर मोर्चे पर नजरअंदाज कर रही है, चाहे वह फंड आवंटन हो या नाम बदलाव। यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में पहले भी उठता रहा है, और टीएमसी इसे चुनावी मुद्दा बना सकती है।

केरल के नाम बदलाव का इतिहास लंबा है, जो 1956 में राज्य के गठन से जुड़ा है। राज्य का मूल नाम मलयालम में 'केरलम' है, लेकिन अंग्रेजी में 'केरल' हो गया। 2023 में केरल विधानसभा ने पहली बार प्रस्ताव पारित किया, लेकिन केंद्र ने कुछ आपत्तियां जताईं। उसके बाद जून 2024 में संशोधित प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें सभी आठवीं अनुसूची की भाषाओं में नाम 'केरलम' करने की मांग थी। केंद्र ने इसे मंजूरी देकर राज्य की भावनाओं का सम्मान किया। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करेगा और लोगों की लंबी मांग पूरी करेगा। यह बदलाव सरकारी गजट में अधिसूचित होने के बाद प्रभावी होगा, और इससे पर्यटन, शिक्षा और प्रशासन में नाम की एकरूपता आएगी। केरल सरकार ने इस मंजूरी का स्वागत किया और कहा कि यह राज्य के लिए ऐतिहासिक दिन है।

यह नाम बदलाव स्वतंत्रता के बाद कई राज्यों में हुए हैं, जैसे मद्रास से तमिलनाडु, बॉम्बे से महाराष्ट्र, और ओरिसा से ओडिशा। केंद्र ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जब वे नियमों के अनुरूप थे। बंगाल के मामले में केंद्र की आपत्ति नाम की बहुलता पर थी, क्योंकि तीन नाम प्रस्तावित थे। ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र जानबूझकर देरी कर रहा है, जबकि केरल का प्रस्ताव जल्दी पास हुआ। उन्होंने कहा कि बंगाल का प्रस्ताव भी सांस्कृतिक है, क्योंकि 'बांग्ला' बंगाली लोगों की पहचान है। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी बंगाल को राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज कर रही है। यह मुद्दा बंगाल और केंद्र के बीच तनाव को बढ़ा सकता है, जो पहले से ही फंड और नीतियों पर विवादित है।

विपक्षी दलों ने ममता के बयान का समर्थन किया है। कांग्रेस ने कहा कि केंद्र को सभी राज्यों के प्रस्तावों पर समान रूप से विचार करना चाहिए। सीपीआईएम ने कहा कि नाम बदलाव सांस्कृतिक मुद्दा है और राजनीति से ऊपर होना चाहिए। ममता ने कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र से बात करेंगी और जरूरी हुआ तो विधानसभा में फिर प्रस्ताव लाएंगी। यह फैसला केरल में चुनाव से पहले आया है, जहां सत्ताधारी एलडीएफ को फायदा मिल सकता है। बंगाल में भी चुनाव नजदीक हैं, और ममता इसे चुनावी मुद्दा बना सकती हैं। केंद्र ने अभी बंगाल के प्रस्ताव पर कोई बयान नहीं दिया है।

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