'इसकी फ्लॉप रैली के चक्कर में क्या मैं सरेंडर हो जाती अपनी visa अपनी जॉब सब ख़त्म...', Rohini Ghavari ने बताई रैली में न आने की असल वजह
रोहिणी का दावा है कि यह केवल वीजा समस्या नहीं, बल्कि चंद्रशेखर की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर उन्हें चुप कराने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे
मुजफ्फरनगर में 26 नवंबर 2025 को आयोजित चंद्रशेखर आजाद की महत्वपूर्ण रैली में एक अप्रत्याशित घटना घटी। नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी कांशीराम के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की इस रैली में उनकी पूर्व प्रेमिका डॉक्टर रोहिणी घावरी की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया। रोहिणी ने एक दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की थी कि वे रैली में शामिल हो रही हैं और मंच पर चंद्रशेखर की पोल खोलेंगी। लेकिन अंतिम क्षण में वे नहीं पहुंच सकीं। अब उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की असल वजह बताई है, जो न केवल वीजा संबंधी तकनीकी समस्या है, बल्कि चंद्रशेखर पर लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ी साजिश का भी दावा करती हैं। यह विवाद दोनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यक्तिगत और राजनीतिक टकराव को नई ऊंचाई दे रहा है।
चंद्रशेखर आजाद की यह रैली संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित की गई थी। इसका नाम रखा गया था संवैधानिक अधिकार बचाओ भाईचारा बनाओ। यह रैली 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का आगाज मानी जा रही थी। मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में हुई इस सभा में सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडलों से हजारों समर्थक पहुंचे। स्थानीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लगभग 10 से 15 हजार लोग जुटे। चंद्रशेखर ने मंच पर संविधान की किताब उठाकर शपथ दिलाई और कहा कि जब तक वे जिंदा हैं, संविधान पर आंख उठाने नहीं देंगे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर बहुजन समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए बोले कि आवाज उठाओ तो बुलडोजर चल जाता है, यह संविधान का राज नहीं बल्कि किसी और का राज है। उन्होंने डॉक्टर अंबेडकर को याद किया और कहा कि जब तक संविधान जिंदा है, बाबासाहेब जिंदा हैं। रैली में जोश भरा माहौल था, समर्थक बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारे लगाते रहे। पार्टी का दावा है कि इस अभियान के तहत अब तक 50 लाख लोगों को संविधान की शपथ दिलाई जा चुकी है।
लेकिन इस रैली की पूर्व संध्या पर रोहिणी घावरी का एक्स पर पोस्ट वायरल हो गया था। उन्होंने लिखा था कि अब वे भी रैली में शामिल हो रही हैं, जो होगा देखा जाएगा। इस पोस्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था। रैली स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात था, क्योंकि रोहिणी की उपस्थिति में हंगामा या झड़प की आशंका थी। लेकिन रोहिणी मुजफ्फरनगर नहीं पहुंचीं। अब उन्होंने एक वीडियो और पोस्ट के जरिए अपनी अनुपस्थिति का खुलासा किया है। उनका कहना है कि स्विट्जरलैंड में उनकी पीएचडी और नौकरी चल रही है। वहां का वर्क परमिट वीजा 31 अगस्त 2025 को समाप्त हो गया था। एयरपोर्ट अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि वे भारत तो जा सकती हैं, लेकिन वापसी संभव नहीं होगी। इससे उनकी नौकरी और करियर खतरे में पड़ जाता। रोहिणी ने कहा कि वे लंबी लड़ाई लड़ रही हैं, इसलिए खुद को सुरक्षित रखना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बुद्धिजीवियों की सलाह मानी कि जल्दबाजी न करें।
रोहिणी का दावा है कि यह केवल वीजा समस्या नहीं, बल्कि चंद्रशेखर की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर उन्हें चुप कराने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। दो दिन पहले चंद्रशेखर दिल्ली गए और दिल्ली पुलिस से मिले। उनका मकसद था कि रोहिणी को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया जाए। रोहिणी के समर्थक पूरे दिन वहां खड़े रहते। अगर वे दिल्ली पहुंचतीं, तो चंद्रशेखर को मौका मिल जाता फंसाने का। रोहिणी ने कहा कि चंद्रशेखर जानते हैं कि 2026 में यह मामला बहुत गरमाएगा और उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। इसलिए वे बचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार वे बिना बताए किसी रैली में पहुंचेंगी, ताकि कोई संभल न पाए।
यह विवाद रोहिणी और चंद्रशेखर के बीच का पुराना है। रोहिणी स्विट्जरलैंड में रहती हैं और जनपावर वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक हैं। वे संयुक्त राष्ट्र की प्रतिनिधि भी हैं। चंद्रशेखर के साथ उनका रिश्ता 2021 से था। रोहिणी का कहना है कि उन्होंने चंद्रशेखर को संसद की शपथ दिलाने से लेकर हर कदम पर साथ दिया। अपनी स्विट्जरलैंड की जिंदगी छोड़कर आंदोलन में कूद पड़ीं। लेकिन चंद्रशेखर ने शादी का झांसा देकर उन्हें धोखा दिया। वे पहले से शादीशुदा थे, जो छिपाया। रोहिणी ने यौन शोषण, आत्महत्या के लिए उकसाने और करियर बर्बाद करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने उन्हें इस्तेमाल किया और सफलता के बाद छोड़ दिया। समाज के सामने उनका चरित्रहनन किया। रोहिणी की यह लड़ाई न केवल उनकी अपनी है, बल्कि सभी बेटियों के सम्मान की है। उन्होंने कहा कि वे धोखेबाज नहीं हैं जो समाज को बेवकूफ बनाएं। समझौता करना होता तो आज तक न लड़तीं। उनकी ईमानदारी से यह लड़ाई मिसाल बनेगी।
दूसरी ओर, चंद्रशेखर ने रोहिणी के आरोपों का काउंटर करते हुए उन पर सेक्सटॉर्शन का मामला दर्ज कराया। यह शिकायत उनकी पत्नी वंदना कुमारी के माध्यम से दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाने में दर्ज हुई। रोहिणी के अलावा उनके पिता और भाई को भी आरोपी बनाया गया। रोहिणी का भाई अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। रोहिणी ने इसे झूठा केस बताया और कहा कि चंद्रशेखर ने जानबूझकर परिवार को घसीटा ताकि दबाव बने। उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला, जानकारी वकील की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। चंद्रशेखर के समर्थक रोहिणी को बदनाम करने का प्रयास मानते हैं। उनका कहना है कि चंद्रशेखर जैसा मेहनती नेता बदनामी का शिकार हो रहा है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने रोहिणी पर जातियों को लड़वाने का आरोप लगाया। लेकिन रोहिणी ने स्पष्ट किया कि वे समाज को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने रोहिणी की शिकायत पर संज्ञान लिया है। आयोग ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। रोहिणी ने कहा कि न्याय का फैसला केवल कोर्ट में होगा। वे सरेंडर नहीं करेंगी। अगर वे रैली में जातीं तो वीजा, नौकरी सब खत्म हो जाता और चंद्रशेखर की जीत होती। उन्होंने समर्थकों से पूछा कि क्या उनका फैसला सही था। ज्यादातर ने उनका साथ दिया। रोहिणी ने नोट किया कि यह सबक मिला है, अगली बार बिना घोषणा के आएंगी।
यह मामला बहुजन समाज में चर्चा का विषय बन गया है। चंद्रशेखर की रैली में रोहिणी की अनुपस्थिति से माहौल शांत रहा, लेकिन विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। कुछ का मानना है कि रोहिणी भाजपा से जुड़ी हैं और चंद्रशेखर को फंसाने की साजिश है। चंद्रशेखर ने रैली में पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी सरकार पर निशाना साधा, लेकिन व्यक्तिगत आरोपों पर चुप्पी साधी। रोहिणी ने कहा कि चंद्रशेखर की पार्टी भाजपा की बी-टीम है और उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री का संरक्षण मिला है। वैसे, चंद्रशेखर ने रैली में कहा कि सत्ता वाले बहुजन की आवाज दबाना चाहते हैं। यह लड़ाई अधिकारों और समानता की है। बहुजन समाज आखिरी सांस तक लड़ेगा।
रोहिणी की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े किए कि क्या यह व्यक्तिगत दुश्मनी है या राजनीतिक साजिश। रोहिणी ने जोर देकर कहा कि वे हक की लड़ाई लड़ रही हैं। निमंत्रण भेजे नहीं जाते, जिम्मेदारी खुद चंद्रशेखर की है। उन्होंने विमान में बैठी तस्वीर शेयर की और कहा कि हक की लड़ाई में जो होगा, देखा जाएगा। चंद्रशेखर के समर्थकों ने रोहिणी को झूठी ठहराया। कहा कि उन्होंने रैली में आने का वादा किया लेकिन पीछे हट गईं। यह उनकी बेबुनियाद आरोपों की पुष्टि करता है। लेकिन रोहिणी का पक्ष मजबूत है कि वे मजबूर थीं। वीजा रिन्यू की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही वे भारत लौटेंगी।
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