पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन- कानपुर के तीन बार सांसद और कांग्रेस के मजबूत स्तंभ का 81 वर्ष की आयु में देहांत
राजनीति में प्रवेश श्रीप्रकाश जायसवाल ने 1980 के दशक में किया। 1989 में वे कानपुर नगर निगम के मेयर बने। यह उनकी पहली बड़ी जीत थी। मेयर के रूप में उन्होंने शहर की
कानपुर, 28 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बड़ा झटका लगा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। कानपुर के चकेरी इलाके में स्थित उनके आवास पर आज दोपहर उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें पहले किदवई नगर के एक नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था, लेकिन बाद में कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचा न सकें। उनका निधन कार्डियक अरेस्ट से हुआ। यह खबर जैसे ही फैली, कानपुर शहर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थक और परिजन सदमे में हैं। श्रीप्रकाश जायसवाल न केवल कानपुर के राजनीतिक चेहरे थे, बल्कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक मजबूत स्तंभ भी माने जाते थे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और कानपुर के विकास में योगदान दिया।
श्रीप्रकाश जायसवाल का जन्म 25 सितंबर 1944 को कानपुर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन कानपुर के ही बीएनएसडी इंटर कॉलेज में बीता, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। वे एक वकील के रूप में भी सक्रिय रहे और कानपुर की अदालतों में प्रैक्टिस की। लेकिन उनकी असली पहचान राजनीति से जुड़ी। युवावस्था में ही वे स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरित हो गए। 1960 के दशक में हिंदी भाषा आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। यह आंदोलन हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की मांग को लेकर चला था, जिसमें उन्होंने कई प्रदर्शन और सभाओं में हिस्सा लिया। इस दौरान जेल यात्राएं भी कीं। यह अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की नींव बने। वे हमेशा कहते थे कि देश की आजादी के लिए जो संघर्ष किया गया, उसी तरह सामाजिक न्याय के लिए लड़ना चाहिए।
राजनीति में प्रवेश श्रीप्रकाश जायसवाल ने 1980 के दशक में किया। 1989 में वे कानपुर नगर निगम के मेयर बने। यह उनकी पहली बड़ी जीत थी। मेयर के रूप में उन्होंने शहर की सफाई, सड़कों और जल निकासी व्यवस्था पर काम किया। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की समस्या गंभीर थी। जायसवाल ने इन्हें हल करने के लिए कई योजनाएं चलाईं। उनके कार्यकाल में शहर की सड़कें चौड़ी हुईं और पार्कों का निर्माण हुआ। लोगों का मानना था कि वे आम आदमी की आवाज थे। मेयर पद से बाद वे भारतीय национल कांग्रेस की कमान संभालने लगे। 2000 से 2002 तक वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। इस दौरान पार्टी को मजबूत करने के लिए उन्होंने युवाओं को जोड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में सभाएं कीं।
श्रीप्रकाश जायसवाल का असली राजनीतिक उभार लोकसभा चुनावों से आया। 1999 में वे पहली बार कानपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। यह जीत आसान नहीं थी। कानपुर एक मिश्रित सीट है, जहां हिंदू, मुस्लिम और दलित वोटरों का प्रभाव है। जायसवाल ने अपनी मेहनत और कांग्रेस की नीतियों से जीत हासिल की। 2004 और 2009 के चुनावों में भी वे दोबारा चुने गए। तीन बार लगातार सांसद रहने से वे कानपुर के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित हो गए। संसद में उन्होंने विकास के मुद्दों पर जोर दिया। कानपुर के रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए। वे कहते थे कि कानपुर चमड़ा उद्योग का केंद्र है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी से मजदूर परेशान हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से फंडिंग की मांग की और कई प्रोजेक्ट शुरू कराए।
यूपीए सरकार के दौरान श्रीप्रकाश जायसवाल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली। 2004 में वे गृह राज्य मंत्री बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर काम किया। 2009 के ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमलों का मामला सामने आया। जायसवाल मेलबर्न गए और अस्पतालों, मंदिरों तथा सार्वजनिक परिवहन का दौरा किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाया और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह उनकी कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण था। 2009 में ही वे कोयला राज्य मंत्री बने और बाद में स्वतंत्र प्रभार के साथ कोयला मंत्री। 2011 से 2014 तक इस पद पर रहे। कोयला क्षेत्र में उन्होंने उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुधारने पर जोर दिया। लेकिन इस दौरान कोलगेट घोटाले का विवाद हुआ। विपक्ष ने उन पर आरोप लगाए, लेकिन जायसवाल ने इसे सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि कोयला आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी थी और रिपोर्ट विवादास्पद है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बचाव किया।
श्रीप्रकाश जायसवाल का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2012 में कोलगेट के अलावा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनके सेक्सिस्ट बयान ने सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि नई जीत और नई शादी का महत्व होता है, लेकिन समय के साथ जीत पुरानी हो जाती है और पत्नी भी बूढ़ी हो जाती है, वैसा आकर्षण नहीं रहता। इस बयान की देशभर में निंदा हुई। महिला संगठनों ने अदालत में याचिका दायर की। बाद में जायसवाल ने माफी मांगी और कहा कि यह मजाक था। लेकिन इस घटना ने उनकी छवि को प्रभावित किया। फिर भी, उनके समर्थक मानते थे कि वे महिलाओं के अधिकारों के पक्षधर रहे। उन्होंने संसद में महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया।
2014 के लोकसभा चुनाव में श्रीप्रकाश जायसवाल को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की लहर में वे सीट गंवा बैठे। लेकिन राजनीति से संन्यास नहीं लिया। वे कानपुर में सक्रिय रहे और कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश की। 2019 के चुनाव में भी पार्टी के लिए प्रचार किया। जायसवाल हमेशा कहते थे कि कांग्रेस ही सच्ची धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि सत्ता का। उनके भाषणों में अंबेडकर और गांधी का जिक्र रहता। कानपुर के विकास के लिए उन्होंने रेलवे ओवरब्रिज और मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम किया। शहर के चमड़ा उद्योग को पुनर्जीवित करने के प्रयास भी किए।
व्यक्तिगत जीवन में श्रीप्रकाश जायसवाल एक सादगीपूर्ण इंसान थे। 28 अप्रैल 1967 को उनकी शादी माया रानी से हुई। दंपति के दो बेटे और एक बेटी हैं। दो पोते भी हैं। वे जजमऊ, चकेरी में रहते थे। परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते थे। राजनीति के अलावा वे सामाजिक कार्यों में रुचि रखते थे। कानपुर में स्कूलों और अस्पतालों के लिए दान दिया। उनकी पत्नी माया रानी हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं। बेटे राजनीति से दूर हैं, लेकिन बेटी सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। जायसवाल को किताबें पढ़ना और शतरंज खेलना पसंद था। वे कहते थे कि जीवन संघर्ष है, लेकिन ईमानदारी से जीना चाहिए।
आज उनके निधन की खबर पर राजनीतिक हलकों में शोक व्याप्त है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जायसवाल एक सच्चे और वफादार कांग्रेसी थे। उन्होंने कानपुर के विकास और कल्याण के लिए कड़ी मेहनत की। उनका निधन पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है। वरिष्ठ नेता हर प्रकाश अग्निहोत्री ने बताया कि जायसवाल ने तीन दशकों तक कानपुर की राजनीति और नागरिक जीवन को आकार दिया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं में से एक थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया और कहा कि जायसवाल का योगदान याद रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी श्रद्धांजलि दी। कई पूर्व सांसदों और मंत्रियों ने उन्हें याद किया।
कानपुर में उनके आवास पर समर्थक जमा हो गए। अंतिम संस्कार कल सुबह गंगा घाट पर होगा। शहर में शोक सभा बुलाई गई है। श्रीप्रकाश जायसवाल की विरासत कानपुर के विकास और कांग्रेस की विचारधारा में बनी रहेगी। वे हमेशा कहते थे कि राजनीति जनसेवा है। उनका जाना एक युग का अंत है। कानपुर के लोग उन्हें एक मेहनती नेता के रूप में याद रखेंगे। उनके जीवन से युवा नेता प्रेरणा लें। जायसवाल ने साबित किया कि सादगी और मेहनत से ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। उनका निधन न केवल कांग्रेस बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए क्षति है।
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