पाकिस्तान को करारा जवाब: "अभिषेक बनर्जी ने भरी हुंकार, कहा- ममता दीदी और इंडिया गठबंधन के आते ही घर में घुसकर मारेंगे।
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहे तनाव ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिसमें पश्चिम बंगाल की राजधानी
- सुरक्षा पर सियासत: ख्वाजा आसिफ की 'कोलकाता' वाली धमकी पर बिफरे अभिषेक बनर्जी, केंद्र की चुप्पी पर उठाए गंभीर सवाल
- बंगाल की अस्मिता और सरहद की जंग: टीएमसी सांसद का बड़ा बयान- "पाकिस्तान की हिमाकत बर्दाश्त नहीं, सत्ता में आए तो सिखाएंगे सबक"
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहे तनाव ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिसमें पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता केंद्र बिंदु बन गई है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा कोलकाता को निशाना बनाने की दी गई गीदड़भभकी ने भारतीय राजनीति में उबाल ला दिया है। इस उकसावे वाले बयान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अभिषेक बनर्जी ने न केवल पाकिस्तान को उसके दुस्साहस के लिए चेतावनी दी, बल्कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी को लेकर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में ममता बनर्जी और इंडिया गठबंधन की सरकार केंद्र की सत्ता में आती है, तो भारत की नीति केवल रक्षात्मक नहीं रहेगी, बल्कि दुश्मनों को उनके घर में घुसकर खत्म किया जाएगा।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक सार्वजनिक मंच से भारत को धमकी देते हुए कहा कि यदि भारत ने कोई 'दुस्साहस' किया, तो पाकिस्तान का जवाब कोलकाता तक पहुंचेगा। ख्वाजा आसिफ का यह बयान भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उस चेतावनी के जवाब में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की किसी भी नापाक हरकत का 'मुंहतोड़ और अभूतपूर्व' जवाब दिया जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने बिना किसी ठोस आधार के भारत पर 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन' की योजना बनाने का आरोप लगाया और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगर को निशाना बनाने की बात कही। इस बयान ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया, बल्कि बंगाल की राजनीति में भी राष्ट्रवाद और क्षेत्रीय अस्मिता की एक नई बहस छेड़ दी है।
अभिषेक बनर्जी ने सिलीगुड़ी और नदिया में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करते हुए ख्वाजा आसिफ के नाम का उल्लेख किया और कहा कि वे इस नाम को भूलेंगे नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घेरते हुए सवाल किया कि जब पाकिस्तान खुलेआम बंगाल की राजधानी पर हमले की बात कर रहा है, तो केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक और कड़ा विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया गया। अभिषेक ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी नेताओं को 'पाकिस्तानी' और 'घुसपैठिया' बताने वाले नेता आज चुप क्यों हैं? उन्होंने इसे बंगाल के लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया और कहा कि बंगाल की जनता इस अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
'घर में घुसकर मारने' की नई परिभाषा
राजनीति में 'घर में घुसकर मारना' शब्द आमतौर पर सर्जिकल स्ट्राइक के संदर्भ में उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन अभिषेक बनर्जी ने इस मुहावरे का उपयोग करते हुए इंडिया गठबंधन की भावी विदेश और रक्षा नीति का एक आक्रामक खाका पेश करने की कोशिश की है। उनके इस बयान को रणनीतिकारों द्वारा ममता बनर्जी की राष्ट्रीय छवि को एक 'सख्त नेता' के रूप में स्थापित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। यह बयान विशेष रूप से उन मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए है जो सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र की वर्तमान सरकार के कट्टर समर्थक माने जाते हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी राजनीति में इस बयान के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल केंद्रीय एजेंसियों (ED, CBI) का उपयोग अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कर रही है, जबकि देश की सीमाओं की सुरक्षा और विदेशी खतरों पर उनका ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का '56 इंच का सीना' केवल देश के भीतर दिखता है, लेकिन जब पाकिस्तान जैसे देश कोलकाता को उड़ाने की धमकी देते हैं, तो वह 'मूकदर्शक' बन जाते हैं। अभिषेक ने मांग की कि यदि केंद्र में साहस है, तो वे सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को खुली छूट दें ताकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लिया जा सके।
तृणमूल कांग्रेस के इस रुख ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। अब तक बंगाल चुनाव स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार और रोजगार के इर्द-गिर्द घूम रहा था, लेकिन पाकिस्तान की धमकी और अभिषेक बनर्जी की 'घर में घुसकर मारने' वाली प्रतिक्रिया ने इसमें राष्ट्रवाद का तड़का लगा दिया है। टीएमसी का तर्क है कि भाजपा बंगाल को केवल चुनाव जीतने के लिए याद करती है, लेकिन जब बंगाल पर बाहरी खतरा मंडराता है, तो वे दिल्ली में बैठकर खामोश रहते हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की पूरी तैयारी में है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्वाजा आसिफ के बयान की काफी निंदा हो रही है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक अस्थिरता और आर्थिक बदहाली से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भड़काऊ बयानबाजी कर रहा है। लेकिन भारत के भीतर, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू हुआ वाकयुद्ध यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब चुनावी वैतरणी पार करने का एक प्रमुख औजार बन गई है। अभिषेक बनर्जी ने अपने संबोधन के अंत में यह दोहराया कि इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर भारत की संप्रभुता से समझौता करने वाले किसी भी देश को बख्शा नहीं जाएगा और उसका इलाज उसी की भाषा में किया जाएगा।
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