झाड़-फूंक के नाम पर हैवानियत: चोटी पकड़कर किशोरी को बेरहमी से पीटा, गर्दन पर बांका रगड़कर दी जान से मारने की धमकी।
आधुनिकता के इस दौर में भी समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे अक्सर खौफनाक और अमानवीय घटनाओं
- आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खूनी खेल: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तांत्रिक की बर्बरता का वीडियो, पुलिस ने शुरू की तलाश
- मानवता शर्मसार: झाड़-फूंक के दौरान नाबालिग लड़की के साथ की गई मारपीट, वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने लिया कड़ा संज्ञान
आधुनिकता के इस दौर में भी समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे अक्सर खौफनाक और अमानवीय घटनाओं को जन्म देती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही विचलित करने वाला वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक कथित तांत्रिक को झाड़-फूंक के नाम पर एक नाबालिग किशोरी के साथ घोर बर्बरता करते देखा जा सकता है। यह घटना आस्था के नाम पर किए जा रहे उन अत्याचारों की ओर इशारा करती है, जहां इलाज के बहाने मासूमों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। वायरल हो रहे दृश्यों में साफ दिख रहा है कि तांत्रिक ने किशोरी को पूरी तरह से अपने वश में कर रखा है और वहां मौजूद भीड़ मूकदर्शक बनी हुई है, जो इस तरह के कृत्यों को धार्मिक मान्यता मानकर स्वीकार कर रही है।
वीडियो के विवरण के अनुसार, झाड़-फूंक की यह प्रक्रिया किसी तथाकथित ऊपरी बाधा या बुरी आत्मा को भगाने के नाम पर आयोजित की गई थी। इस दौरान तांत्रिक ने न केवल किशोरी की चोटी पकड़कर उसे जमीन पर घसीटा, बल्कि उसे लगातार थप्पड़ और घूंसे भी मारे। किशोरी दर्द से कराह रही थी और रहम की भीख मांग रही थी, लेकिन आरोपी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उसने किशोरी के बालों को हाथ में लपेटकर उसे कई बार झटके दिए, जिससे उसे गंभीर चोटें आने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरी घटना के दौरान वहां मौजूद अन्य लोग भी डरे हुए थे, लेकिन किसी ने भी आगे आकर उस तांत्रिक को रोकने या किशोरी को बचाने का साहस नहीं दिखाया।
सबसे भयावह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब तांत्रिक ने अपनी क्रूरता की सीमा पार करते हुए एक धारदार हथियार (बांका) निकाला और उसे किशोरी की गर्दन पर रगड़ना शुरू कर दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि तांत्रिक बांके को किशोरी के गले के पास ले जाकर उसे डरा रहा है और चिल्ला-चिल्लाकर कुछ मंत्र पढ़ रहा है। यह कृत्य न केवल कानूनन जुर्म है, बल्कि सीधे तौर पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर श्रेणी में आता है। धारदार हथियार का इस तरह सार्वजनिक रूप से उपयोग करना और एक नाबालिग की जान जोखिम में डालना यह स्पष्ट करता है कि झाड़-फूंक करने वाले इन अपराधियों के मन में कानून का कोई भय नहीं है।
अंधविश्वास के विरुद्ध कड़े कानून की आवश्यकता
भारत के कई राज्यों में जादू-टोना और झाड़-फूंक के खिलाफ विशेष कानून बनाए गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एक सख्त और व्यापक कानून की कमी अब भी खलती है। अंधविश्वास के चलते होने वाली हिंसा विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए जमीनी स्तर पर शिक्षा और जागरूकता अभियानों की अत्यंत आवश्यकता है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए उस क्षेत्र की पहचान करने की कोशिश शुरू कर दी है जहां यह घटना घटित हुई है। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, यह वीडियो किसी ग्रामीण अंचल का बताया जा रहा है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी तांत्रिक के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने इस घटना का वीडियो बनाया और इसे रोकने के बजाय बढ़ावा दिया।
किशोरी के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं। इस तरह की शारीरिक प्रताड़ना किसी भी व्यक्ति, विशेषकर एक नाबालिग के कोमल मन पर गहरा आघात पहुंचाती है। गर्दन पर धारदार हथियार रगड़ने से शारीरिक घावों के साथ-साथ उसे जीवन भर के लिए मानसिक आघात (Post-Traumatic Stress) भी लग सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग को भी इस मामले की सूचना दी गई है, ताकि पीड़िता को उचित परामर्श और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि चोटी पकड़कर पीटना और अपमानजनक व्यवहार करना महिला सम्मान के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है, जिसमें आरोपी को कड़ी सजा मिलनी तय है।
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