अभिषेक बनर्जी का बीजेपी पर तीखा हमला- 10 महीनों में जय बांग्ला कहलवाऊंगा।
Political News: कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वार्षिक शहीद दिवस रैली में टीएमसी सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी....
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वार्षिक शहीद दिवस रैली में टीएमसी सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “पहले बीजेपी वाले ‘जय श्री राम’ कहते थे, लेकिन आज वे ‘जय मां दुर्गा’, ‘जय मां काली’ कह रहे हैं। मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए, मैं उनसे ‘जय बांग्ला’ कहलवाऊंगा। 10 महीनों में, वे ‘जय बांग्ला’ कहने लगेंगे।” यह बयान न केवल पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल मचाने वाला था, बल्कि इसने बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी। अभिषेक बनर्जी, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं, ने इस रैली में बीजेपी को ‘बांग्ला-विरोधी’ करार देते हुए 2026 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हराने का दावा किया।
21 जुलाई को कोलकाता में टीएमसी की शहीद दिवस रैली आयोजित की गई, जो 1993 में राइटर्स बिल्डिंग मार्च के दौरान 13 कार्यकर्ताओं की शहादत को याद करने के लिए मनाई जाती है। इस रैली में हजारों टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हुए, और ममता बनर्जी के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी ने सभा को संबोधित किया। अभिषेक ने अपने भाषण में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी बंगाल की संस्कृति और भाषा को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बंगालियों को उनकी मातृभाषा बोलने के लिए ‘निरुद्ध केंद्र’ (डिटेंशन कैंप) में भेजना चाहती है। इसके जवाब में, उन्होंने बीजेपी को चुनौती दी कि वह 2026 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हराकर ‘जय बांग्ला’ कहलवाएंगे।
अभिषेक ने यह भी कहा कि बीजेपी दो ‘ई’ पर चल रही है—चुनाव आयोग (Election Commission) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इन संस्थानों का दुरुपयोग करके विपक्षी नेताओं को निशाना बनाती है और बंगाल के मतदाताओं को डराने की कोशिश करती है। उनके इस बयान ने रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं में जोश भरा, और सोशल मीडिया पर यह बयान तेजी से वायरल हो गया।
- बीजेपी की प्रतिक्रिया
अभिषेक के इस बयान पर पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई घुसपैठ के खिलाफ है। भारत कोई धर्मशाला नहीं है। बांग्लादेश में जो लोग रहते हैं, वे बांग्ला बोलते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि सारे बांग्लादेशियों को भारत लाकर मतदाता बना देंगे।” भट्टाचार्य का इशारा बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ की ओर था, जिसे बीजेपी लंबे समय से बंगाल में एक बड़ा मुद्दा बनाती रही है। उन्होंने अभिषेक के ‘जय बांग्ला’ बयान को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर इसे एक राजनीतिक स्टंट करार दिया।
इसके अलावा, बीजेपी के नेता सुवेंदु अधिकारी, जो पहले टीएमसी में थे और अब बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं, ने भी टीएमसी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि टीएमसी बंगाल की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है और ‘जय बांग्ला’ जैसे नारे सिर्फ भावनात्मक मुद्दों को भुनाने के लिए हैं।
- ममता बनर्जी की भूमिका
रैली में ममता बनर्जी भी मौजूद थीं, और उन्होंने अपने भाषण में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा, “हम हिंदी, गुजराती, मराठी, राजस्थानी—सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं। पश्चिम बंगाल के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई है।” ममता ने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और शहीदों के बलिदान को याद करते हुए बीजेपी पर बंगाल की अस्मिता को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने हमेशा लोकतंत्र और बंगाल की पहचान की रक्षा की है, और वह इसे भविष्य में भी करती रहेगी।
ममता के इस बयान ने अभिषेक के ‘जय बांग्ला’ बयान को और बल दिया। यह दिखाता है कि टीएमसी अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को 2026 के विधानसभा चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
‘जय बांग्ला’ पश्चिम बंगाल में एक सांस्कृतिक और भावनात्मक नारा है, जो बंगालियों की पहचान और गौरव से जुड़ा है। यह नारा 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से भी संबंधित है, जब भारत ने बांग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। टीएमसी इस नारे को बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करती है, जबकि बीजेपी इसे अवैध घुसपैठ और बांग्लादेशी नागरिकों से जोड़कर देखती है। अभिषेक का यह बयान बीजेपी को यह चुनौती देता है कि वह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को स्वीकार करे।
सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। एक यूजर (@BengalVoice) ने लिखा, “अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी को सही जवाब दिया है। बंगाल की आत्मा को कोई कुचल नहीं सकता।” वहीं, एक अन्य यूजर (@BJP4Bengal) ने कहा, “यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। टीएमसी बंगाल को बांग्लादेश बनाना चाहती है।” इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि यह बयान बंगाल की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
- अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक कद
अभिषेक बनर्जी, जो ममता बनर्जी के भतीजे हैं, टीएमसी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। डायमंड हार्बर से सांसद, अभिषेक ने कम उम्र में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है। वह टीएमसी की युवा शाखा के प्रमुख रहे हैं और पार्टी के रणनीतिकार के रूप में काम करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में, उन्होंने अपनी सीट भारी मतों से जीती, जिससे उनका कद और बढ़ गया। ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी छवि को बीजेपी अक्सर निशाना बनाती है, लेकिन अभिषेक ने हर बार अपने बयानों और रणनीतियों से जवाब दिया है।
इस रैली में, अभिषेक ने न केवल बीजेपी को चुनौती दी, बल्कि यह भी घोषणा की कि टीएमसी दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगी, अगर चुनाव आयोग मतदाता सूची में हेराफेरी करता है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा, जिन्होंने बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर निशाना बनाया था। अभिषेक ने कहा, “असम के मुख्यमंत्री को बंगालियों के खिलाफ बोलते हुए एक पखवाड़ा बीत गया, लेकिन बीजेपी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।”
- बीजेपी-टीएमसी का टकराव
पश्चिम बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन टीएमसी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की। इसके बाद से, बीजेपी ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद, और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर हमला बोला है। वहीं, टीएमसी ने बीजेपी पर बंगाल की संस्कृति और पहचान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
अभिषेक का यह बयान इस टकराव को और तेज करता है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, टीएमसी बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। ‘जय बांग्ला’ नारा इस रणनीति का हिस्सा है, जो बंगालियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। दूसरी ओर, बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे से जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अभिषेक बनर्जी का यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति को दर्शाता है। बंगाल में भाषा और संस्कृति हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और टीएमसी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है। दूसरा, यह बयान बीजेपी को रक्षात्मक स्थिति में लाता है, क्योंकि ‘जय बांग्ला’ जैसे नारे का विरोध करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर इस बयान ने टीएमसी कार्यकर्ताओं में जोश भरा, लेकिन बीजेपी समर्थकों ने इसे भावनात्मक ब्लैकमेलिंग करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “अभिषेक बनर्जी सिर्फ वोट के लिए बंगालियों की भावनाओं से खेल रहे हैं।” वहीं, टीएमसी समर्थकों ने इसे बंगाल की अस्मिता की जीत बताया।
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