रेप पीड़िता से शादी के बाद आरोपी की 10 साल की सजा माफ, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
इस फैसले ने कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं। SC ने इस मामले में एक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें कानूनी जवाबदेही और व्यक्तिगत सहमति के बीच संतु...
मुख्य बिंदु:
- 2021: पीड़िता ने मध्य प्रदेश में FIR दर्ज की, जिसमें 2016 से बार-बार बलात्कार का आरोप।
- आरोप: आरोपी ने शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में शादी से इनकार किया।
- सितंबर 2024: निचली अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई।
- 15 मई 2025: SC में आरोपी ने शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे पीड़िता ने स्वीकार किया।
- जमानत: सजा निलंबित, सत्र न्यायालय को जमानत देने का आदेश।
- शर्त: दोनों परिवार शादी की व्यवस्था को अंतिम रूप दें।
- स्थगन: मामला 25 जुलाई 2025 तक स्थगित।
- आलोचना: शादी के प्रस्ताव से सजा माफी को गलत मिसाल माना गया।
- समर्थन: कुछ ने इसे मानवीय और सहमति पर आधारित बताया।
- पिछले फैसले: SC ने पहले शादी के प्रस्ताव को सजा माफी का आधार मानने से इनकार किया था।
SC ने 15 मई 2025 को एक अभूतपूर्व और भावनात्मक फैसले में रेप के एक मामले में दोषी व्यक्ति की 10 साल की सजा को निलंबित कर दिया, जब उसने कोर्टरूम में पीड़िता को शादी का प्रस्ताव दिया और पीड़िता ने इसे स्वीकार कर लिया। जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने इस मामले में दोनों पक्षों और उनके परिवारों के साथ निजी मुलाकात के बाद यह निर्णय लिया। इस फैसले ने न केवल कानूनी हलकों में चर्चा को जन्म दिया है, बल्कि यह समाज में सहमति, मेल-मिलाप और न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय पहलुओं पर भी सवाल उठाता है। यह मामला मध्य प्रदेश से संबंधित है, जहां पीड़िता ने 2016 से शुरू हुए यौन उत्पीड़न के आरोप में शिकायत दर्ज की थी।
यह मामला 2021 में शुरू हुआ, जब पीड़िता ने मध्य प्रदेश में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की, जिसमें उसने एक व्यक्ति पर 2016 से कई वर्षों तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। दोनों की मुलाकात फेसबुक के माध्यम से हुई थी, और पीड़िता आरोपी की बहन की दोस्त थी। पीड़िता ने दावा किया कि आरोपी ने शादी का वादा करके उसका विश्वास जीता और शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, जब आरोपी ने अपनी मां के विरोध के कारण शादी से इनकार कर दिया, तो पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज की। सितंबर 2024 में निचली अदालत ने आरोपी को धारा 376(2)(n) (बार-बार बलात्कार) और धारा 417 (धोखाधड़ी) के तहत 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सजा को निलंबित करने की अपील को खारिज कर दिया, जिसके बाद मामला SC पहुंचा।
15 मई 2025 को SC में सुनवाई के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम हुआ। कोर्ट ने दोनों पक्षों और उनके परिवारों के साथ चैंबर में निजी मुलाकात की और उनकी भविष्य की मंशा को समझा। सुनवाई के दौरान आरोपी ने पीड़िता को शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे पीड़िता ने स्वीकार कर लिया। कोर्टरूम में दोनों के बीच फूलों का प्रतीकात्मक आदान-प्रदान हुआ, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया। जस्टिस नागरथना ने टिप्पणी की, “दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से शादी करने की इच्छा स्पष्ट रूप से व्यक्त की है।” इसके बाद, कोर्ट ने आरोपी की सजा को निलंबित कर दिया और सत्र न्यायालय को उचित शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी उम्मीद जताई कि दोनों परिवार जल्द ही शादी की व्यवस्था को अंतिम रूप देंगे।
कानूनी और सामाजिक निहितार्थ
इस फैसले ने कानूनी और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं। SC ने इस मामले में एक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें कानूनी जवाबदेही और व्यक्तिगत सहमति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, इस फैसले ने यह सवाल उठाया है कि क्या शादी का प्रस्ताव रेप जैसे गंभीर अपराध की सजा को माफ करने का आधार बन सकता है। कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले की आलोचना की है। एक कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा, “रेप जैसे अपराध को शादी के प्रस्ताव से माफ करना गलत संदेश देता है। यह पीड़िता के दर्द को कमतर करता है।” वहीं, कुछ लोगों ने इसे एक मानवीय दृष्टिकोण माना, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति को प्राथमिकता दी।
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यह मामला उन कई मामलों से अलग है, जहां SC ने रेप के आरोपी को पीड़िता से शादी के प्रस्ताव के आधार पर राहत देने से इनकार किया था। उदाहरण के लिए, मार्च 2021 में SC ने एक मामले में टिप्पणी की थी कि रेप के आरोपी को शादी का प्रस्ताव देकर सजा से छूट नहीं दी जा सकती। जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े की बेंच ने तब कहा था, “रेप जैसे अपराध को शादी से हल नहीं किया जा सकता। यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है।” इस हालिया फैसले में, हालांकि, दोनों पक्षों की सहमति और उनकी शादी की इच्छा ने कोर्ट को एक अलग दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
अन्य मामले
SC ने हाल के वर्षों में रेप के कई मामलों में सहमति और शादी के वादे से जुड़े मुद्दों पर फैसले दिए हैं। फरवरी 2024 में, कोर्ट ने एक मामले में रेप के आरोप को रद्द कर दिया, जिसमें यह पाया गया कि दोनों पक्षों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध थे और शादी का वादा वास्तविक था। सितंबर 2023 में, कोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा था कि लंबे समय तक सहमति से बने शारीरिक संबंध, जो बाद में शादी में नहीं बदले, स्वतः रेप नहीं माने जा सकते। इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि कोर्ट सहमति और परिस्थितियों के आधार पर मामले-दर-मामले निर्णय लेता है।
इसके विपरीत, इस मामले में कोर्ट ने यह माना कि दोनों पक्षों की शादी की इच्छा और उनके परिवारों की सहमति एक सकारात्मक कदम है। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि सजा का निलंबन सशर्त है और भविष्य में शादी की व्यवस्था को अंतिम रूप देना होगा। यह फैसला उन मामलों से अलग है, जहां पीड़िता ने शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था या जहां सहमति की कमी थी।
SC ने इस मामले को 25 जुलाई 2025 तक के लिए स्थगित कर दिया है, ताकि दोनों परिवार शादी की व्यवस्था को अंतिम रूप दे सकें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत सशर्त है और आरोपी को जांच में सहयोग करना होगा। यह फैसला रेप के मामलों में मेल-मिलाप और कानूनी सजा के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश करता है। हालांकि, यह समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इस तरह के फैसले रेप जैसे अपराधों की गंभीरता को कम करते हैं या यह एक प्रगतिशील कदम है, जो व्यक्तिगत सहमति को प्राथमिकता देता है।
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