Viral: मस्तिष्क संरचना समझाने को गाय का सिर लेकर कक्षा में पहुंची विज्ञान की शिक्षिका, गोहत्या अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
तेलंगाना के विकाराबाद जिले में एक सरकारी स्कूल की जीव विज्ञान शिक्षिका ने दसवीं कक्षा के छात्रों को मस्तिष्क की संरचना समझाने....
तेलंगाना के विकाराबाद जिले में एक सरकारी स्कूल की जीव विज्ञान शिक्षिका ने दसवीं कक्षा के छात्रों को मस्तिष्क की संरचना समझाने के लिए कथित तौर पर गाय का मस्तिष्क कक्षा में लाया, जिसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस घटना के बाद शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ तेलंगाना गौहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम, 1977 के तहत मामला दर्ज किया गया। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने इस कृत्य को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया, जिसके बाद स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। पुलिस ने स्कूल के प्रधानाध्यापक की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि मस्तिष्क वास्तव में गाय का था या नहीं।
यह घटना 24 जून 2025 को विकाराबाद जिले के यालाल मंडल में स्थित जिला परिषद हाई स्कूल (लड़कियों) में हुई। स्कूल की जीव विज्ञान शिक्षिका कासिम बी (कभी-कभी खसीम बी के रूप में भी उल्लेखित) ने दसवीं कक्षा के छात्रों को मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली समझाने के लिए एक जानवर का मस्तिष्क कक्षा में लाया। शिक्षिका ने इसे एक टिफिन बॉक्स में रखकर लाया और कक्षा में एक प्लेट पर रखकर इसका प्रदर्शन किया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि शिक्षिका ने कहा कि यह गाय का मस्तिष्क है, जिसे उन्होंने पाठ को और जीवंत बनाने के लिए लाया था।
शुरुआत में छात्रों ने इस प्रदर्शन में रुचि दिखाई, लेकिन अगले दिन यह बात स्कूल के बाहर फैल गई। स्थानीय समुदाय और कुछ हिंदू संगठनों, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य शामिल थे, ने इसे धार्मिक भावनाओं के खिलाफ माना। 25 जून को स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने शिक्षिका के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इसे तेलंगाना गौहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम, 1977 का उल्लंघन बताया, क्योंकि गाय को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है।
स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इस घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज की, जिसके बाद शिक्षिका के खिलाफ धारा 5 (गाय या भैंस के बछड़े की हत्या पर रोक) और धारा 6 (प्रमाणित प्राधिकारी से बिना प्रमाणपत्र के पशु वध पर रोक) के तहत मामला दर्ज किया गया। शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) रेणुका देवी ने मंडल शिक्षा अधिकारी (एमईओ) रमेश को प्रारंभिक जांच के लिए स्कूल भेजा।
- शिक्षिका का दावा
शिक्षिका कासिम बी ने पुलिस और स्कूल प्रशासन को बताया कि उन्होंने कक्षा में भेड़ का मस्तिष्क लाया था, न कि गाय का। उनका कहना था कि मानव मस्तिष्क की संरचना को समझाने के लिए एक ताजा और अच्छी स्थिति में मस्तिष्क की जरूरत थी, जो आसानी से उपलब्ध नहीं था। इसलिए, उन्होंने स्थानीय बाजार से भेड़ का मस्तिष्क खरीदा और इसे शैक्षिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया। हालांकि, कुछ छात्रों ने दावा किया कि शिक्षिका ने इसे गाय का मस्तिष्क बताया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। पुलिस ने कहा कि मस्तिष्क की प्रजाति की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
- विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हस्तक्षेप
घटना के अगले दिन, 25 जून को, स्थानीय हिंदू संगठनों और बीजेपी नेताओं ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षिका पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शिक्षा विभाग को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें शिक्षिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। स्थानीय पुलिस और रूरल सर्कल इंस्पेक्टर ने प्रदर्शनकारियों को शांत किया और जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
सोशल मीडिया पर भी इस घटना ने तूल पकड़ा। कुछ यूजर्स ने इसे "जिहादी मानसिकता" से जोड़ा और शिक्षिका की धार्मिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने इसे एक शैक्षिक गलती बताया, जिसे गलत समझा गया। एक X पोस्ट में लिखा गया, "तेलंगाना में एक बायोलॉजी टीचर को क्लास में गाय का दिमाग लाने पर सस्पेंड कर दिया गया।" हालांकि, ये पोस्ट्स पूरी तरह से तथ्यात्मक नहीं हो सकतीं, और पुलिस ने इस तरह के दावों की पुष्टि नहीं की है।
तेलंगाना गौहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम, 1977 के तहत गाय और उसके बछड़े की हत्या पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अन्य मवेशियों, जैसे बैल और भैंस, को "वध के लिए उपयुक्त" प्रमाणपत्र के साथ ही वध किया जा सकता है, जो पशु चिकित्सक द्वारा जारी किया जाता है। इस प्रमाणपत्र के लिए पशु का आर्थिक रूप से उपयोगी न होना जरूरी है। इस कानून का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल और 1,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह अपराध संज्ञेय है, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।
इस मामले में, चूंकि मस्तिष्क की प्रजाति की पुष्टि नहीं हुई है, शिक्षिका के खिलाफ दर्ज मामला अभी जांच के दायरे में है। अगर फॉरेंसिक जांच में यह साबित होता है कि मस्तिष्क गाय का नहीं था, तो यह मामला कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप ने इस मामले को और जटिल बना दिया है।
जिला शिक्षा अधिकारी रेणुका देवी ने बताया कि मंडल शिक्षा अधिकारी रमेश ने स्कूल में जाकर छात्रों, शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच के आधार पर शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया और उन्हें जांच पूरी होने तक मुख्यालय छोड़ने से मना किया गया है। शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और एक विस्तृत जांच की जा रही है।
इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। पहला, क्या शिक्षिका का इरादा वास्तव में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना था, या यह केवल एक शैक्षिक प्रदर्शन था जो गलत समझा गया? दूसरा, क्या इस तरह के प्रदर्शन के लिए स्कूलों में दिशानिर्देश होने चाहिए? तीसरा, क्या धार्मिक भावनाओं और शिक्षा के बीच संतुलन बनाना संभव है?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षिका का इरादा शायद केवल शैक्षिक था, लेकिन गाय जैसे संवेदनशील प्रतीक का उपयोग करने से पहले उन्हें स्कूल प्रशासन और स्थानीय समुदाय की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए था। शिक्षा मनोवैज्ञानिक डॉ. स्वाति पांडे ने कहा, "शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों का उपयोग करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन उन्हें स्थानीय संस्कृति और संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए।"
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने शिक्षिका के निलंबन का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसे अतिशयोक्ति करार दिया। एक X यूजर ने लिखा, "इतना भी प्रैक्टिकल नहीं होना था। शिक्षिका पर गौहत्या अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।" दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने इसे शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक प्रयास बताया, जो गलत समझा गया।
स्थानीय समुदाय में इस घटना ने गहरी नाराजगी पैदा की है। गाय को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है, और इसे लेकर संवेदनशीलता पूरे भारत में देखी जाती है। विकाराबाद के एक स्थानीय निवासी रामचंद्र राव ने कहा, "हम शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गाय का मस्तिष्क लाना गलत था। शिक्षिका को पहले स्कूल प्रबंधन से अनुमति लेनी चाहिए थी।"
वहीं, कुछ शिक्षकों ने शिक्षिका का बचाव करते हुए कहा कि उनका इरादा केवल छात्रों को बेहतर ढंग से पढ़ाना था। यालाल स्कूल की एक अन्य शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "कासिम बी बहुत मेहनती शिक्षिका हैं। उन्होंने बच्चों को प्रैक्टिकल तरीके से समझाने की कोशिश की, लेकिन शायद गलत जानवर का मस्तिष्क चुन लिया।"
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