Trending: कलियुगी पिता ने नाबालिग बेटियों के साथ सालों तक किया दुष्कर्म, मां की चुप्पी टूटी तो सच्चाई जानकर उड़े होश।
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सदर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपनी दो नाबालिग...
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सदर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपनी दो नाबालिग बेटियों को पांच साल तक अपनी हवस का शिकार बनाया। 35 वर्षीय आरोपी रतन कुमार, जो पेशे से मैकेनिक है, को जयपुर पुलिस ने 26 जून 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस जघन्य अपराध का खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित बेटियों की मां उन्हें पेट दर्द की शिकायत के कारण अस्पताल ले गई। डॉक्टर की जांच और एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की मदद से इस मामले का भंडाफोड़ हुआ। मां ने सामाजिक बदनामी और पति के डर से लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी थी, लेकिन आखिरकार सच सामने आ गया। पुलिस ने इस मामले में गुप्त कैमरे से काउंसलिंग रिकॉर्ड की और मेडिकल जांच के बाद पुष्टि होने पर कार्रवाई की।
यह भयावह घटना जयपुर के सदर थाना क्षेत्र की है, जहां रतन कुमार अपनी पत्नी और दो नाबालिग बेटियों, जिनकी उम्र 7 और 9 साल है, के साथ रहता था। पुलिस के अनुसार, रतन कुमार पिछले चार से पांच साल से अपनी बेटियों का यौन शोषण कर रहा था। इस दौरान उसकी पत्नी ने कई बार उसे संदिग्ध हालत में बेटियों के साथ देखा, लेकिन सामाजिक बदनामी और आर्थिक निर्भरता के डर से वह चुप रही। पीड़ित बेटियां डर और शर्मिंदगी के कारण अपनी मां से भी कुछ नहीं कह पाईं।
20 जून 2025 को मां अपनी दोनों बेटियों को पेट दर्द और मानसिक तनाव की शिकायत के साथ स्थानीय अस्पताल ले गई। दोनों बच्चियां शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हालत में थीं। डॉक्टर ने जब गहन जांच की, तो उन्हें यौन शोषण के स्पष्ट संकेत मिले। डॉक्टर ने तुरंत इसकी सूचना आसरा फाउंडेशन नामक एनजीओ को दी, जो बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा और बाल श्रम के खिलाफ काम करता है। इसके बाद, आसरा फाउंडेशन ने एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA) नामक एक अन्य एनजीओ से संपर्क किया, जो इस तरह के मामलों में काउंसलिंग और कानूनी मदद प्रदान करता है।
- एनजीओ और पुलिस की भूमिका
21 जून को एनजीओ ने मां और दोनों बेटियों को एक सुरक्षित और शांत जगह पर ले जाकर काउंसलिंग शुरू की। शुरुआत में मां ने डर और सामाजिक दबाव के कारण औपचारिक शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। वह अपने पति की हिंसक प्रवृत्ति और परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित थी। उसने पुलिस से केवल अपने पति को चेतावनी देने की बात कही। हालांकि, एनजीओ और पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझा और काउंसलिंग को गुप्त कैमरे से रिकॉर्ड करने का फैसला किया।
चित्रकूट थाना प्रभारी अंतिम शर्मा ने मां और बेटियों की काउंसलिंग की। इस दौरान बेटियों ने बताया कि उनके पिता ने कई बार उनके साथ गलत हरकतें कीं और उन्हें धमकियां दीं कि अगर उन्होंने किसी को बताया, तो वह उन्हें और उनकी मां को नुकसान पहुंचाएगा। मां ने भी स्वीकार किया कि उसने अपने पति को कई बार बेटियों के साथ अश्लील हरकतें करते देखा था, लेकिन वह डर के मारे चुप रही। इस रिकॉर्डिंग ने पुलिस को पर्याप्त सबूत दिए, जिसके आधार पर सदर थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म) और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने दोनों बेटियों को मेडिकल जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के पास भेजा। मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि हुई, जिसके बाद रतन कुमार को 26 जून को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) अमित कुमार बुडानिया ने बताया कि जांच में पता चला कि रतन कुमार ने पिछले चार से पांच साल तक अपनी बेटियों का यौन शोषण किया। पुलिस ने बेटियों और मां के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए और मामले की गहन जांच शुरू की।
इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। बेटियां स्कूल में गुमसुम रहती थीं और बार-बार पेट दर्द और मानसिक तनाव की शिकायत करती थीं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के यौन शोषण का बच्चों पर गहरा और लंबे समय तक प्रभाव पड़ता है। वे डर, शर्मिंदगी, और अवसाद का शिकार हो सकते हैं। इस मामले में, बेटियों का डर इतना था कि वे अपनी मां से भी अपनी पीड़ा साझा नहीं कर पाईं।
मां की चुप्पी भी इस मामले में एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। सामाजिक कार्यकर्ता रेणुका शर्मा ने कहा, "महिलाएं अक्सर सामाजिक दबाव और आर्थिक निर्भरता के कारण अपने बच्चों के साथ होने वाले अत्याचारों पर चुप रहती हैं। यह समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी महिलाओं को सुरक्षित माहौल और समर्थन प्रदान किया जाए।"
इस मामले में आसरा फाउंडेशन और एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की भूमिका सराहनीय रही। इन संगठनों ने न केवल पीड़ित परिवार को काउंसलिंग दी, बल्कि पुलिस और कानूनी प्रक्रिया में भी मदद की। आसरा फाउंडेशन की प्रीति मेहता ने बताया, "हमारा उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित रखना और उनकी आवाज को सामने लाना है। इस मामले में, मां का डर और बेटियों की चुप्पी हमें चुनौती दे रही थी, लेकिन गुप्त रिकॉर्डिंग और पुलिस के सहयोग से हम न्याय के करीब पहुंचे।"
इस मामले में POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान करता है। धारा 376 और POCSO एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर रतन कुमार को सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। मेडिकल जांच और मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों ने पुलिस को मजबूत सबूत दिए हैं, जिससे इस मामले में सजा की संभावना प्रबल है।
हालांकि, मां की चुप्पी और उसकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह साबित होता है कि मां ने जानबूझकर अपराध को छिपाया, तो उसे भी कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। लेकिन इस मामले में, मां की आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों को देखते हुए पुलिस ने अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
इस घटना ने समाज में बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक हिंसा के मुद्दों पर गहरी चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर आक्रोशित हैं। एक X यूजर ने लिखा, "जयपुर जैसे शहर में अगर पिता अपनी बेटियों के साथ ऐसा कर सकता है, तो बेटियां कहां सुरक्षित हैं?" कई लोगों ने मां की चुप्पी पर भी सवाल उठाए, लेकिन कुछ ने उसकी मजबूरियों को समझते हुए सहानुभूति दिखाई।
स्थानीय समुदाय और सामाजिक संगठनों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल की मांग की। जयपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गुप्ता ने कहा, "यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है। यह हमारे समाज की उस मानसिकता को दर्शाता है, जो बच्चों के खिलाफ अपराधों को छिपाने के लिए सामाजिक दबाव का सहारा लेता है।"
- बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या करें?
जागरूकता: माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए और उनसे खुलकर बात करनी चाहिए।
शिक्षा: बच्चों को 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में समझाना जरूरी है ताकि वे ऐसी घटनाओं को पहचान सकें और बताने की हिम्मत जुटा सकें।
कानूनी सहायता: यौन शोषण के मामलों में तुरंत पुलिस और एनजीओ से संपर्क करना चाहिए।
सुरक्षित माहौल: स्कूलों और घरों में बच्चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाना जरूरी है।
महिलाओं का सशक्तिकरण: महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने की जरूरत है ताकि वे ऐसी परिस्थितियों में चुप न रहें।
जयपुर का यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। रतन कुमार की गिरफ्तारी और मेडिकल जांच से यह साफ हो गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध को छिपाना अब संभव नहीं है।
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