बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026: पीवी सिंधु का अभियान थमा, राउंड ऑफ 16 में वर्ल्ड नंबर 2 से मिली हार।
निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए इस मुकाबले में पीवी सिंधु से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन खेल की शुरुआत से ही वह दबाव में नजर आईं
- सिंधु के लिए कड़वी रही निंगबो की यादें: वांग झि यी ने सीधे गेमों में दी शिकस्त, टूर्नामेंट से बाहर हुईं भारतीय दिग्गज
- भारतीय बैडमिंटन को बड़ा झटका: पीवी सिंधु प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर, चीन की वांग झि यी के सामने नहीं टिक पाईं पूर्व विश्व चैंपियन
9 अप्रैल, 2026 को निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए इस मुकाबले में पीवी सिंधु से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन खेल की शुरुआत से ही वह दबाव में नजर आईं। मैच के पहले गेम में सिंधु ने कुछ अच्छे स्मैश और नेट शॉट्स के जरिए वांग झि यी को टक्कर देने की कोशिश की, लेकिन चीनी खिलाड़ी की फुर्ती और सटीक प्लेसमेंट के सामने उनकी रणनीति काम नहीं आई। पहले गेम के शुरुआती हिस्से में मुकाबला काफी करीबी रहा और स्कोर एक समय 18-18 की बराबरी पर था। हालांकि, निर्णायक मौकों पर वांग झि यी ने अपना संयम बनाए रखा और लगातार तीन अंक जीतकर पहला गेम 21-18 से अपने नाम कर लिया। इस करीबी हार ने दूसरे गेम के लिए सिंधु के आत्मविश्वास पर गहरा असर डाला।
दूसरे गेम की कहानी पूरी तरह से एकतरफा रही। वांग झि यी ने अपनी आक्रामक लय को बरकरार रखा और दूसरे गेम की शुरुआत में ही 11-3 की बड़ी बढ़त हासिल कर ली। सिंधु ने इस अंतर को कम करने के लिए कुछ प्रयास किए, लेकिन लंबी रैलियों के दौरान चीनी खिलाड़ी की रक्षात्मक तकनीक और रैलियों को खत्म करने की क्षमता बेजोड़ रही। सिंधु अपनी पुरानी लय को हासिल करने के लिए संघर्ष करती दिखीं और अनचाही गलतियों (unforced errors) के कारण अंक गंवाती रहीं। अंततः, वांग झि यी ने यह गेम 21-8 के बड़े अंतर से जीतकर मैच को महज 40 मिनटों के भीतर समाप्त कर दिया और क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
पीवी सिंधु के लिए यह हार विशेष रूप से निराशाजनक है क्योंकि उन्होंने पहले दौर में मलेशिया की वोंग लिंग चिंग को कड़े मुकाबले में हराकर दूसरे दौर में प्रवेश किया था। पहले दौर के मैच में सिंधु ने पहला गेम हारने के बाद शानदार वापसी की थी और 15-21, 21-11, 21-19 से जीत दर्ज की थी। उस जीत से यह उम्मीद जागी थी कि वह टूर्नामेंट के अगले दौरों में भी अपनी फॉर्म जारी रखेंगी। हालांकि, दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी वांग झि यी की चुनौती उनके लिए काफी कठिन साबित हुई। वांग झि यी का हालिया रिकॉर्ड भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ काफी मजबूत रहा है और इस मैच में भी उन्होंने अपने दबदबे को पूरी तरह से कायम रखा। वर्तमान में पीवी सिंधु विश्व रैंकिंग में 13वें स्थान पर हैं, जबकि वांग झि यी दूसरे स्थान पर काबिज हैं। रैंकिंग का यह फासला कोर्ट पर भी साफ दिखाई दिया। वांग झि यी ने न केवल अपनी शारीरिक श्रेष्ठता बल्कि अपनी सामरिक परिपक्वता से भी सिंधु को पछाड़ दिया। यह हार सिंधु के लिए आगामी महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों और विश्व रैंकिंग में सुधार की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती पेश करती है, क्योंकि पेरिस ओलंपिक के बाद से वह अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म की तलाश में हैं।
भारतीय बैडमिंटन दल के लिए यह टूर्नामेंट अब तक उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक तरफ जहां लक्ष्य सेन और किदांबी श्रीकांत जैसे अनुभवी खिलाड़ी पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गए, वहीं युवा खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने विश्व के नंबर 7 खिलाड़ी ली शी फेंग को हराकर सभी को अचंभित कर दिया था। सिंधु की हार ने भारत की एकल स्पर्धा में पदकों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। अब भारतीय प्रशंसकों की निगाहें आयुष शेट्टी और एचएस प्रणय जैसे खिलाड़ियों पर टिकी हैं, जो अभी भी अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं। सिंधु के कोच और सहयोगी स्टाफ के लिए अब आत्ममंथन का समय है कि कैसे उनकी फिटनेस और लंबी रैलियों में अंक जीतने की क्षमता को फिर से निखारा जाए।
बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप को महाद्वीपीय स्तर का सबसे कठिन टूर्नामेंट माना जाता है, क्योंकि इसमें चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। सिंधु के खिलाफ वांग झि यी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि चीनी शटलर्स का अपने घरेलू मैदान पर वर्चस्व कायम है। सिंधु के लिए सकारात्मक पहलू यह रहा कि उन्होंने पहले गेम में टक्कर दी, लेकिन दूसरे गेम में शारीरिक थकान या मानसिक दबाव के कारण वह पूरी तरह टूट गईं। इस स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए सिंधु को अपनी रिकवरी और बड़े अंकों पर अंकुश लगाने की अपनी पुरानी तकनीक को फिर से सक्रिय करना होगा।
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