Ballia : बलिया में पत्रकार शुभम श्रीवास्तव पर शराब तस्करों का जानलेवा हमला, अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा करने पर हुयी घटना

थाने में शुभम ने तहरीर दी, जिसमें उन्होंने चार नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तहरीर में खुलासा किया गया कि बलिया के बैरिया में जीआरपी और आरपीएफ के कुछ कर्मि

By INA News Desk
Nov 8, 2025 - 13:15
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Ballia : बलिया में पत्रकार शुभम श्रीवास्तव पर शराब तस्करों का जानलेवा हमला, अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा करने पर हुयी घटना
Ballia : बलिया में पत्रकार शुभम श्रीवास्तव पर शराब तस्करों का जानलेवा हमला, अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा करने पर हुयी घटना
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक अखबार के वरिष्ठ पत्रकार शुभम श्रीवास्तव पर शराब तस्करों ने बेरहमी से हमला कर दिया। यह घटना बैरिया थाना क्षेत्र के सुरमनपुर रेलवे स्टेशन के पास हुई, जहां शुभम श्रीवास्तव शराब की अवैध तस्करी पर खबर तैयार कर रहे थे। हमलावरों ने उन्हें घंटों हिरासत में रखा, जमकर पिटाई की और उनके मोबाइल फोन से सारे वीडियो व फोटो डिलीट करा दिए। चोटें इतनी गंभीर हैं कि शुभम की एक आंख में चोट लगने से वह फिलहाल देखने में असमर्थ हैं। इलाज के लिए उन्हें बलिया से लखनऊ रेफर कर दिया गया है। इस घटना ने न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बलिया-बिहार सीमा पर फल-फूल रही शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क को भी उजागर कर दिया है।

घटना गुरुवार शाम की बताई जा रही है। शुभम श्रीवास्तव एक अखबार के लखनऊ मुख्यालय से जुड़े होने के बावजूद बलिया में ग्रामीण इलाकों की खबरों पर काम करते हैं। वे बैरिया क्षेत्र में शराब की तस्करी की पड़ताल कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने तस्करों का स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें तस्करी के तरीके और पुलिस की संलिप्तता के सबूत कैद हो गए थे। हमलावरों को जैसे ही इसकी भनक लगी, उन्होंने शुभम को घेर लिया। चार-पांच लोगों ने मिलकर उनकी पिटाई शुरू कर दी। चेहरे पर मुक्के मारे गए, सिर पर चोटें आईं और विशेष रूप से दाहिनी आंख पर गंभीर चोट लगी। हमलावरों ने धमकी भी दी कि आगे से इस तरह की रिपोर्टिंग की तो जिंदा नहीं छोड़ेंगे। पिटाई के बाद उन्होंने शुभम का मोबाइल छीन लिया और सारे डेटा मिटा दिया। किसी तरह शुभम वहां से निकले और बैरिया थाने पहुंचे।

थाने में शुभम ने तहरीर दी, जिसमें उन्होंने चार नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। तहरीर में खुलासा किया गया कि बलिया के बैरिया में जीआरपी और आरपीएफ के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से बिहार में शराब की तस्करी हो रही है। एक ट्रिप में तस्करों को जीआरपी और आरपीएफ को 1200 रुपये रिश्वत देनी पड़ती है। बैरिया में अवैध शराब के बड़े-बड़े गोदाम बने हुए हैं, जहां से ट्रेनों के जरिए बिहार भेजी जाती है। शुभम ने अपनी तहरीर में बताया कि उन्होंने मोबाइल पर तस्करों के स्टिंग वीडियो बनाए थे, जिसमें तस्करी का पूरा तरीका कैद था। लेकिन हमलावरों ने वह सब डिलीट कर दिया। पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 504, 506 और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। सूत्र बताते हैं कि दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मोबाइल के डिलीट डेटा को रिकवर करने के प्रयास भी चल रहे हैं, जिससे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

यह मामला केवल पत्रकार पर हमले तक सीमित नहीं है। बलिया बिहार सीमा पर शराब तस्करी का केंद्र बन चुका है। बिहार में शराबबंदी के बाद यहां से अवैध शराब की खेपें बढ़ गई हैं। बैरिया के कई गोदामों में विदेशी ब्रांड की शराब स्टोर की जाती है। तस्कर ट्रेनों में छिपाकर बिहार ले जाते हैं। सुरमनपुर रेलवे स्टेशन इस कारोबार का मुख्य हब है। जीआरपी और आरपीएफ के कुछ जवान इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं। शुभम की तहरीर से साफ है कि एक ट्रिप के लिए 1200 रुपये की रिश्वत दी जाती है। इसके अलावा आबकारी विभाग की भी संलिप्ता सामने आ रही है। विभाग ने बॉर्डर पर शराब के गोदामों को अनुमति दी, जो अब तस्करी का मुख्य जरिया बने हुए हैं। बैरिया के कई बेरोजगार युवा इस कारोबार में लिप्त हैं। उन्हें अच्छी कमाई का लालच देकर फंसाया जाता है।

पिछले कुछ महीनों में बलिया पुलिस ने कई छापेमारी की हैं। अक्टूबर 2024 में बैरिया पुलिस ने छह मोटरसाइकिलों से 881 लीटर शराब बरामद की थी। एक तस्कर गिरफ्तार हुआ, बाकी फरार। दिसंबर 2024 में जयप्रकाश नगर चौकी के पांच पुलिसकर्मियों को शराब तस्करी में संलिप्तता के लिए निलंबित किया गया। एक वैन से लाखों की शराब छोड़ दी गई थी। ये घटनाएं बताती हैं कि तस्करी का जाल कितना गहरा है। विवादित इंस्पेक्टर विपिन सिंह के पोस्टिंग हटने के बाद यह कारोबार और तेज हो गया। जुलाई 2024 में डीआईजी ने बैरिया एसएचओ धर्मवीर सिंह को लाइन हाजिर किया, क्योंकि वे तीन साल से एक ही थाने पर तैनात थे। लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई। आबकारी और पुलिस दोनों विभागों की लापरवाही से तस्करी फल-फूल रही है।

शुभम की पिटाई ने पूरे पत्रकार समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया। सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों ने इसकी निंदा की। सौरभ के. शुक्ला, प्रज्ज्वल यादव और अन्य ने पोस्ट कर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की। एक अखबार प्रबंधन ने भी बयान जारी कर कहा कि वे इस मामले की पैरवी करेंगे। बलिया एसपी और डीआईजी आजमगढ़ को टैग कर कई ने न्याय की अपील की। विपक्षी नेता भी सक्रिय हो गए। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश का दावा झूठा साबित कर रहा है। पूर्व में प्रतापगढ़ में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या शराब माफिया से जुड़ी थी। वहां भी पुलिस ने पहले हादसा बताया, बाद में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। ऐसे मामलों से पत्रकारों में डर का माहौल है।

पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। डिलीट डेटा रिकवर होने पर कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं। शुभम का इलाज लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि आंख की चोट गंभीर है, लेकिन समय पर इलाज से सुधार संभव है। बैरिया थाने के एसएचओ ने बताया कि आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे। डीएम बलिया और एसएसपी को पत्र भेजा गया है। रेलवे अधिकारियों को भी स्टेशन पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना बताती है कि सीमावर्ती इलाकों में अपराध का बोलबाला है। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से युवा तस्करी की ओर धकेले जा रहे हैं। सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे।

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