टोंक कलेक्टर टीना डाबी के सरकारी आवास में कोबरा की दस्तक: 5 फीट लंबे जहरीले सांप के निकलने से मचा हड़कंप, सुरक्षाकर्मियों में मची अफरा-तफरी।
जिला कलेक्टर टीना डाबी हमेशा से ही अपनी कार्यशैली और सक्रियता के कारण सुर्खियों में रहती हैं, इसलिए उनके जीवन से जुड़ी छोटी सी घटना भी चर्चा का विषय बन जाती है। हालांकि, सांप मिलने के दौरान कलेक्टर ने धैर्य बनाए रखा और आधिकारिक प्र
- राजस्थान के टोंक में प्रशासनिक हलचल के बीच वन्यजीव का खौफ: नई कलेक्टर के निवास पर तैनात गार्ड्स ने देखा विशालकाय सांप, रेस्क्यू ऑपरेशन सफल।
- कलेक्टर परिसर में कोबरा का साया: पदभार ग्रहण करते ही टीना डाबी के बंगले पर पहुंची वन विभाग की टीम, कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा।
राजस्थान के टोंक जिले की कमान हाल ही में संभालने वाली चर्चित आईएएस अधिकारी और जिला कलेक्टर टीना डाबी के सरकारी आवास पर उस समय हड़कंप मच गया जब परिसर के भीतर एक विशालकाय और बेहद जहरीला कोबरा सांप देखा गया। यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर अपने कार्यालयीन कार्यों में व्यस्त थीं और आवास पर तैनात कर्मचारी नियमित ड्यूटी पर थे। अचानक करीब 5 फीट लंबे काले कोबरा की मौजूदगी ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और घरेलू सहायकों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया। जैसे ही सांप पर नजर पड़ी, सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों और वन विभाग को दी। कलेक्टर आवास जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान पर सांप का मिलना न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बना, बल्कि इसने वहां रहने वाले सभी लोगों की सांसें अटका दीं। जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी के निवास पर हुए इस वाकये ने स्थानीय प्रशासन को भी तुरंत हरकत में ला दिया।
आवास परिसर में सांप मिलने की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्र में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। चश्मदीदों के अनुसार, कोबरा सांप काफी आक्रामक मुद्रा में था और आवास के बगीचे वाले हिस्से में झाड़ियों के पास छिपा हुआ था। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों ने एहतियात के तौर पर तुरंत उस हिस्से की घेराबंदी कर दी ताकि सांप कहीं और न जा सके या किसी को नुकसान न पहुंचा दे। टीना डाबी ने टोंक कलेक्टर के रूप में अभी कुछ ही दिन पहले कार्यभार संभाला है, ऐसे में उनके सरकारी बंगले की साफ-सफाई और रखरखाव का काम भी चल रहा था। माना जा रहा है कि पास ही स्थित हरियाली और संभावित बिलों के कारण यह सरीसृप सुरक्षित स्थान की तलाश में बंगले के भीतर दाखिल हो गया होगा। सांप की लंबाई और उसकी फुंकार इतनी डरावनी थी कि अनुभवी कर्मचारी भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
सूचना मिलते ही वन विभाग की एक विशेष टीम रेस्क्यू किट के साथ मौके पर पहुंची। विशेषज्ञ स्नेक कैचर ने सावधानीपूर्वक सांप की गतिविधियों पर नजर रखी। कोबरा प्रजाति का यह सांप अपनी फुर्ती और घातक जहर के लिए जाना जाता है, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विशेष सावधानी बरती गई। वन विभाग के कर्मचारियों ने करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सांप को एक सुरक्षित डिब्बे में बंद करने में सफलता हासिल की। इस दौरान कलेक्टर आवास के बाहर लोगों की भीड़ जमा न हो, इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात रहा। सांप को पकड़े जाने के बाद ही वहां मौजूद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। वन विभाग ने बाद में पुष्टि की कि यह एक भारतीय चश्माधारी कोबरा (Spectacled Cobra) था, जिसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र पर प्रहार करता है और जो काफी खतरनाक माना जाता है।
रेस्क्यू के बाद की कार्रवाई
वन विभाग की टीम ने सांप को पकड़ने के बाद उसका प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। चूंकि यह एक संरक्षित प्रजाति का वन्यजीव है, इसलिए इसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर एक घने जंगल में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। विभाग ने बताया कि मानसून के बाद और गर्मी के मौसम में सांप अक्सर ठंडे और सुरक्षित स्थानों की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं।
इस घटना के बाद कलेक्टर आवास की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि बंगले के आसपास उगी झाड़ियों और अनावश्यक घास-फूस को तुरंत साफ किया जाए। साथ ही, दीवारों और फर्श में मौजूद किसी भी तरह के छेद या दरारों को भरने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। टोंक जिला मुख्यालय पर स्थित कई सरकारी बंगले पुराने बने हुए हैं और उनके पास काफी मात्रा में पेड़-पौधे मौजूद हैं, जो अक्सर ऐसे वन्यजीवों के लिए आश्रय स्थल बन जाते हैं। इस वाकये ने शहर के अन्य वीआईपी क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है, जहां बगीचों की संख्या अधिक है।
जिला कलेक्टर टीना डाबी हमेशा से ही अपनी कार्यशैली और सक्रियता के कारण सुर्खियों में रहती हैं, इसलिए उनके जीवन से जुड़ी छोटी सी घटना भी चर्चा का विषय बन जाती है। हालांकि, सांप मिलने के दौरान कलेक्टर ने धैर्य बनाए रखा और आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं वन विभाग की टीम की सराहना की जिन्होंने बिना किसी नुकसान के सांप को वहां से हटाया। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों के बीच भी वन्यजीवों के संरक्षण और उनसे बचाव के तरीकों को लेकर जागरूकता की बातें होने लगी हैं। यह घटना बताती है कि किस तरह प्राकृतिक आवास कम होने के कारण वन्यजीव शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
टोंक जिले में वन्यजीवों की बहुलता है और यहां का भूगोल पहाड़ियों और वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विस्तार के कारण सांपों जैसे जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, जिसके कारण वे रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं। कलेक्टर आवास पर कोबरा का मिलना इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर अब यह विचार किया जा रहा है कि सरकारी परिसरों में नियमित अंतराल पर कीटनाशकों और सांपों को दूर रखने वाले रसायनों का छिड़काव किया जाए। साथ ही, वहां तैनात कर्मचारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्राथमिक प्रशिक्षण देने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि आपात स्थिति में बिना घबराए सही कदम उठाए जा सकें।
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