Lucknow: परिषदीय विद्यालयों में सात दिनों तक बहेगी कथा, कविता और संवाद की सांस्कृतिक धारा। 

परिषदीय विद्यालयों में सात दिनों यानी 04 से 11 दिसंबर तक कथा, कविता और संवाद की एक जीवंत सांस्कृतिक धारा बहने वाली है। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश

By INA News Desk
Nov 28, 2025 - 20:10
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Lucknow: परिषदीय विद्यालयों में सात दिनों तक बहेगी कथा, कविता और संवाद की सांस्कृतिक धारा। 
परिषदीय विद्यालयों में सात दिनों तक बहेगी कथा, कविता और संवाद की सांस्कृतिक धारा। 
  • बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व और निर्देशन में होगा आयोजन
  • 'Many Languages, One Emotion' थीम पर आधारित है 'भारतीय भाषा उत्सव-2025'
  • महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर आयोजन का होगा समापन
  • प्रदेश के लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के 1.48 करोड़ विद्यार्थी बनेंगे सहभागी
  • विद्यार्थियों को भारत की बहुभाषीय परंपराओं और साहित्यिक संवेदना से कराया जायेगा परिचित
  • मातृभाषा-आधारित शिक्षा, बहुभाषीय सीख और सांस्कृतिक एकत्व को भी विद्यालयी वातावरण में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का है प्रयास

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में सात दिनों यानी 04 से 11 दिसंबर तक कथा, कविता और संवाद की एक जीवंत सांस्कृतिक धारा बहने वाली है। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर यह आयोजन उत्तर प्रदेश के लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में आयोजित किया जायेगा और लगभगा 1.48 करोड़ बच्चे इसमें सहभागी बनेंगे। 

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व और निर्देशन में 'Many Languages, One Emotion' थीम पर आधारित भारतीय भाषा उत्सव-2025 के आयोजन के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

बेसिक शिक्षा शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य है कि बच्चे अपनी स्थानीय भाषा और मातृभाषा पर गर्व महसूस करें, अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान विकसित करें और बहुभाषा की भावनात्मक शक्ति को समझें।

  • महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर होगा समापन

महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर समापन होने वाला यह उत्सव न केवल विद्यार्थियों को भारत की बहुभाषीय परंपराओं और साहित्यिक संवेदना से परिचित कराएगा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप मातृभाषा-आधारित शिक्षा, बहुभाषीय सीख और सांस्कृतिक एकत्व को विद्यालयी वातावरण में और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा इन्हें नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

  • हर दिन अलग-अलग थीम पर होगा आयोजन

इस सात दिवसीय उत्सव का प्रत्येक दिन एक अलग थीम को समर्पित होगा, जिसके माध्यम से बच्चे भाषाओं की विविधता और अभिव्यक्ति के अनेक रूपों से परिचित होंगे। 04 दिसंबर को विद्यालयों में भाषा वृक्ष और भाषाई विरासत वाल बनाई जाएगी, जहाँ बालक-बालिकाएँ अपने घर, क्षेत्र और देश में बोली जाने वाली भाषाओं का परिचय देंगे। अगले दिन, 05 दिसंबर को भाषाओं पर आधारित कविता और संगीत के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं की कविताओं और गीतों का प्रस्तुतिकरण होगा।

06 दिसंबर को विभिन्न भारतीय भाषाओं के त्योहारों से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम और भाषाओं की आवाज का पॉडकास्ट (Voice of Language Podcast) आयोजित किए जाएंगे। 08 दिसंबर को ‘कहावतों में एकता’ के माध्यम से बच्चों को देशभर की कहावतों में निहित एकता का संदेश समझाया जाएगा, जबकि 'भाषा मित्र में सहयोग' के तहत में छात्र-छात्राएं एक-दूसरे को अपनी भाषाओं के शब्द सिखाएंगे।

09 दिसंबर को 'भाषा बन्धु पत्र’ और बहुभाषीय कहानी-श्रृंखला का आयोजन होगा। 10 दिसंबर को विद्यालयों में भाषा अन्वेषण क्लब सक्रिय होंगे, जहाँ बच्चे खेल, कहानी, शब्द-यात्रा और संवाद आधारित गतिविधियों के माध्यम से भाषाओं की खोज करेंगे। उत्सव का समापन 11 दिसंबर को 'इंटरेक्टिव भाषा मेला’ और 'भाषा-रंगमंच' प्रस्तुतियों के साथ होगा।

भारतीय भाषा उत्सव-2025 विद्यार्थियों में मातृभाषा के प्रति आत्मीयता और भारतीय भाषाओं के सम्मान को सुदृढ़ करेगी। यह पहल बच्चों की भाषाई समझ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और बहुभाषीय दक्षता को बढ़ाएगी तथा विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को प्रभावी रूप से स्थापित करेगी।

-मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल

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